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Sehore Flood : साध्वी प्रज्ञा बेतुके बयान की जगह एक ठोस निर्देश जारी करतीं तो ये हालात न बनतें

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Bhopal BJP MP Sadhvi Pragya Singh Thakur. File Photo.

न्यूज डेस्क | नई दिल्ली/सीहोर

अक्सर अपने विवादित बयानों को लेकर चर्चा में रहने वालीं भोपाल से बीजेपी सांसद साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने बीते दिनों भोपाल से सटे सीहोर जिले में एक बैठक के दौरान ऐसा बयान दिया जो पल भर में ही न सिर्फ नेशनल मीडिया की सुर्खी बन गया बल्की सोशल मीडिय पर भी तेजी से वायरल हो गया।

सांसद साध्वी प्रज्ञा ठाकुर का वो विवादित बयान-
भोपाल सांसद प्रज्ञा ठाकुर ने अपने बयान में कहा था कि हम नदी, नालें-नालियों की सफाई के लिए सांसद नहीं बने हैं…हम जिस काम के लिए सांसद बने हैं उसे पूरी निष्ठा के साथ कर रहे हैं। साध्वी प्रज्ञा ठाकुर का ये बयान ऐसे समय में आया जब सीहोर के नाले-नालियों की सफाई का काम अधर में लटका हुआ था।

साध्वी के इस बयान के महज दो-तीन दिनों के बाद ही सीहोर में 29 जुलाई कों बारिश का ऐसा जलजला आया जो कई लोगों के मकान और संपत्ति बहा ले गया। जन क्या, जानवर क्या, गरीब क्या और धनी व्यापारी क्या सब के सब इस जलजले का शिकार बनें।

चंद घंटों में रिकॉर्ड 10 इंच बारिश-
देखते ही देखते महज चंद घंटों में ही रिकॉर्ड 10 इंच तक बारिश हो गई। मानों आसमान से बारिश नहीं कोई बादल फट पड़ा हो। सीहोर शहर में नदी, नालों और नालियों की सफाई न होने से पानी को निकासी का रास्ता न मिला और देखते ही देखते मानों शहर के कई इलाके ‘समंदर की लहरों’ में जद्दोजहद कर रहे हो।

देखें सीहोर में आई बाढ़ पर ग्राउंड रिपोर्ट –

कई लोगों के मवेशी बह गए, कुछ के मकां इस ‘आफत की बारिश’ में ज़मींदोज़ हो गए, व्यपारियों का दिवाला निकल गया। सुबह होते-होते तक कुछ हाल इतने बेहाल हो चुके थे कि जो तन पर कपड़े बचे थे मानों अब वो ही उनकी संपत्ति हो। ऐसी एक दास्ता शहर के मजीद की थी जिनका घर का आधे से ज्यादा हिस्सा पानी मेें बह गया। मजदूरी करने वाले मजीद के पास सिर्फ तन पर कपड़े ही बचे हैं। हिम्मत जवाब दे चुकी है अब उन्हें प्रशासन से भी कोई उम्मीद नहीं है।

इंग्लिशपुरा, रानीगंज जैसे कई अन्य इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित-
इंग्लिशपुरा, रानीगंज जैसे कई अन्य इलाके सबसे ज्यादा इस आपदा में सबसे ज्यादा प्रभावित रहे। कई फुट तक लोगों के घरों में पानी भर गया। लोग बस यही बात कहते नजर आए कि अगर समय रहते नालों की सफाई हो जाती तो ये हालात नहीं बनते। ग्राउंड रिपोर्ट की टीम जब इन प्रभावित इलाकों में पहुंची तो नगर पालिका के कर्मचारी पुल के नीचे से गारबेज निकालते दिखाई दिए।

सीहोर नगर पालिका ने सफाई के नाम पर की सिर्फ लीपा-पोती-
एन वक्त पर नगर पालिका द्वारा करवाई गई नालों की सफाई का आलम ये रहा कि नालों के किनारे ही कचरे का पहाड़ बना दिया जिससे पानी को निकलने का रास्ता नहीं मिला। एक बात गौर फरमाने वाली है, ये दुनिया का पहला ऐसा इलाका है जहां नाले को भरकर और उसका चौड़ीकरण खत्म कर उस पर सड़क बनाने का काम किया जा रहा है।

इस पूरे मामले में जब ग्राउंड रिपोर्ट की टीम ने नगर पालिका अध्यक्ष पति जसपाल अरोड़ा से संपर्क किया तो उन्होंंने बताया कि वे सीहोर नहीं बल्की दिल्ली में हैं। इन सबके बीच एक सवाल यह है कि आखिर इन हालातों का जिम्मेदार कौन है?

अगर वक्त रहते शहर के नालों की सफाई हो जाती तो शायद सीहोर में ऐसे हालात पैदा नहीं होते या शायद साध्वी प्रज्ञा ठाकुर नालों की सफाई के लिए कोई ठोस निर्देश जारी कर देतीं तो बरसों से उबासी मार रहा सिस्टम वक्त रहते एक्टिव हो जाता और सीहोर में ऐसे हालात न बनतें।

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