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SC/ST Act- हर 15 मिनट में दलित पर अत्याचार, कब आएंगे ‘अच्छे दिन’?

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नई दिल्ली, 6 अगस्त। सुप्रीम कोर्ट के एससी-एसटी एक्ट पर दिए गए फैसले के बाद दलित समुदायों में बढ़ रहे गुस्से को देखते हुए मोदी सरकार अब अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (SC/ST) एक्ट को अपने पुराने और मूल स्वरूप में बहाल करने की जुगत में है, क्योंकि एनडीए गठबंधन में शामिल लोक जनशक्ति पार्टी के मुखिया और केन्द्रीय खाद्य आपूर्ती मंत्री रामविलास सहित केन्द्रीय मंत्री रामदास आठवले राष्ट्रव्यापी आंदोलन की धमकी दे चुके है।

पासवान सहित अन्य दलित समुदाय दो टूक साफ कर चुके हैं कि अगर एससी-एसटी एक्ट बिल अपने पुराने मूल रूप में लागू नहीं किया जाता है तो आगामी 9 अगस्त को ‘भारत बंद’ कर आंदोलन किया जाएगा। हांलाकि SC/ST एक्ट संशोधन विधेयक को कैबिनेट से मंजूरी तो पहले ही मिल चुकी थी लेकिन लोकसभा में इसे आज पेश किया जाएगा। कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दल इसे समर्थन देने की बात कर रहे हैं।

18 जुलाई से शुरू हुए संसद के मानसून सत्र में हंगामें के दौरान मोदी सरकार कई बार विपक्ष के निशाने पर रही है। सरकार पर पलटवार का ये सिलसिला इस बिल पर तब भी देखने को मिला था जब गुरुवार 2 अगस्त को भी जारी रहा। कांग्रेस सांसद मल्लिकार्जुन खड़गे ने लोकसभा में दलित एट्रोसिटी एक्ट यानी एससी/एसटी ऐक्ट के मुद्दे पर सदन में तीखे सवाल पूछे थे।

मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा था कि सरकार सत्र के दौरान कई बिल लेकर आई लेकिन एससी/एसटी ऐक्ट के ऊपर अब तक अध्यादेश नहीं लाया गया है। उन्होंने कहा था कि, ‘इस तबके पर देश में हर 15 मिनट पर अत्याचार होता है। इस पर अध्यादेश लाना चाहिए था। इस पर बिल पेश किया जाए। हम सरकार से मांग करते हैं कि इस पर कल अध्यादेश लाया जाए हम सर्वसम्मति से इसे पास कराएंगे।’

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हांलाकि, मल्लिकार्जुन खड़गे के सवाल का जवाब देते हुए केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद तत्काल बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि जरूरत पड़ी तो इससे भी कड़ा बिल लाएंगे। उन्होंने कहा कि इस बिल को इसी सत्र में पास कराया जाएगा।

संशोधन के बाद एससी-एसटी एक्ट में होंगे ये प्रावधान

1) अगर आज लोकसभा में एससी\एसटी संशोधन विधेयक 2018 पास हो जाता है तो यह अपने मूल रूप में वापस आ जाएगा। इसके मूल कानून में धारा 18 A जोड़ी जाएगी, जिससे पुराने कानून को बहाल कर दिया जाएगा।

2) अगर ऐसा होता है सुप्रीम कोर्ट का फैसला तत्काल प्रावधान से रद्द हो जाएगा। संशोधन के बाद फिर से एससी/एसटी एक्ट में केस दर्ज होते ही गिरफ्तारी का प्रावधान लागू हो जाएगा।

3) इसके अलावा आरोपी को मिलने वाली अग्रिम जमानत भी रद्द हो जाएगी। आरोपी को हाईकोर्ट से ही नियमित जमानत मिल सकेगी। जबकि एससी/एसटी एक्ट में दर्ज हुए मामलों की सुनवाई सिर्फ स्पेशल कोर्ट में ही होगी।

4) जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल संबंधी शिकायत पर तुरंत मामला दर्ज होगा। वहीं इस एक्ट के तहत दर्ज होने वाले मुकदमों की जांच इन्सपेक्टर रैंक के पुलिस अधिकारी करेंगे।

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क्या कहा था सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में

1) बीती 20 मार्च को एक मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एससी-एसटी एक्ट के तहत होने वाली तत्काल गिरफ्तारी पर रोग लगा दी थी।

2) इसके अलावा बड़ा फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एससी/एसटी ऐक्ट के तहत दर्ज होने वाले केसों में अग्रिम जमानत को भी मंजूरी दी थी।

3) फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि, इस कानून के तहत दर्ज मामलों में होने वाली ऑटोमेटिक गिरफ्तारी की बजाय पुलिस को 7 दिन के भीतर जांच करनी होगी अगर जांच में आरोपी के खिलाफ सबूत मिलते हैं तो ऐक्शन लिया जाना चाहिए।

4) सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि, इस ऐक्ट के दुरुपयोग को रोकने के लिए इसके तहत दर्ज कराए गए मामलों में डीएसपी रैंक का अधिकारी जांच करेगा।

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फैसले के बाद भारत बंद,  दलित हिंसा

1) 20 मार्च को आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद तमाम दलित संगठनों में आक्रोश देखने को मिला था। फैसले के करीब 2 हफ्ते बाद 2 अप्रेल को देश भर में भारत बंद के दौरान हिंसा और आगजनी देखने को मिली थी।

2) दलित हिंसा के हिंसा के दौरान कथित तौर पर शामिल हुए असामाजिक तत्वोंने हिंसा की आग को भड़काने में मदद की।

3) इस दौरान 12 बेगुनाह लोगों की  मौत हो गई जबकि कई गंभीर रूप से घायल हुए। जगह-जगह तोड़-फोड़ हुई, बसों-वाहनों को आग के हवाले कर दिया।

4) हिंसा का सबसे ज्यादा असर मध्य प्रदेश में देखने को मिला था जहां कुल 12 लोगों में से 6 मौत ही सिर्फ मध्य प्रेदश में हुई थी। हांलाकि इस हिंसा के बाद दलितों की कथित झूठी गिरफ्तार के बाद पुलिस प्रशासन की कार्रवाई पर जमकर सवाल उठाए गए थे।

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केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से की थी ये अपील

1)  20 मार्च को आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ केंद्र ने पुनर्विचार याचिका दाखिल करते हुए कहा था कि सुप्रीम कोर्ट का 20 मार्च का फैसला SC/ ST समुदाय को संविधान के तहत दिए गए अनुच्छेद 21 के तहत जीने के मौलिक अधिकार से वंचित करेगा।

2) SC/ ST के खिलाफ अपराध लगातार जारी है आंकडें बताते हैं कि कानून के लागू करने में कमजोरी है न कि इसका दुरुपयोग हो रहा है। जस्टिस आदर्श कुमार गोयल और जस्टिस यू यू ललित की बेंच ने एक मामले की सुनवाई के दौरान अग्रिम जमानत का आदेश दिया था।

3) केंद्र सरकार ने अपनी पुनर्विचार याचिका में यह भी कहा था कि अगर अनुच्छेद 21 के तहत जीने के अधिकार के तहत आरोपी के अधिकारों को सुरक्षित करना महत्वपूर्ण है तो SC/ ST समुदाय के लोगों को भी संविधान के अनुच्छेद 21 और छूआछात प्रथा के खिलाफ अनुच्छेद 17 के तहत सरंक्षण जरूरी है। अगर आरोपी को अग्रिम जमानत दी गई तो वो पीडित को आतंकित करेगा और जांच को रोकेगा।

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क्या है एससी-एसटी एक्ट

1) बता दें कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निरोधक) अधिनियम को 11 सितम्बर 1989 में भारतीय संसद द्वारा पारित किया गया था। जम्मू-कश्मीर को छोड़ समूचे भारत में इसे 30 जनवरी 1990 को सक्रिय रूप से लागू कर दिया गया था।

2) यह अधिनियम उस प्रत्येक व्यक्ति पर लागू होता है जो अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति का सदस्य नहीं है और साथ ही वह व्यक्ति इस वर्ग के सदस्यों का उत्पीड़न करता है तो उस पर एससी-एसटी एक्ट के तहत कार्यवाही की जाएगी।

3) इस अधिनियम में 5 अध्याय और 23 धाराएं अंकित की गई है। यह कानून अनुसूचित जातियों और जनजातियों में शामिल व्यक्तियों के खिलाफ अपराधों को दंडित करता है।

4) यह पीड़ितों को विशेष सुरक्षा और अधिकार मुहैया करवाता है। इसके लिए विशेष अदालतों की भी व्यवस्थाएं की गई है।

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