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#SaveLakshadweep: लक्षद्वीप के प्रशासक प्रफुल्ल पटेल के खिलाफ लोगों में आक्रोश क्यों?

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#SaveLakshadweep Attack on Nature and Culture: यह मामला दिसंबर 2020 में लक्षद्वीप के पूर्व प्रशासक (Administrator Dineshwar Sharma) दिनेश्वर शर्मा के निधन के साथ (#SaveLakshadweep) शुरू हुआ। लक्षद्वीप समूह (Lakshadweep Group) में रहने वाले लोग द्वीप की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण पर्यावरणीय (Environmental) की सुरक्षा करते हैं। वहां बाहरी लोगों को आने और वहां जमीन खरीदने की अनुमति नहीं है। पूर्व प्रशासक दिनेश्वर शर्मा (Dineshwar Sharma) के निधन के बाद से लोगों के दिलों में द्वीप को लेकर डर सा पैदा हो गया है। पिछले कुछ दिनों से Social Media में #SaveLakshadweep के साथ कई पोस्ट ट्रेंड हो रहे हैं।

क्यों हैं द्वीप के लोग विधायक प्रफुल्ल खोड़ा पटेल (Prafulla Khoda Patel) के खिलाफ ( #SaveLakshadweep )

Lakshadweep के पूर्व प्रशासक (Administrator Dineshwar Sharma) दिनेश्वर शर्मा की फेफड़ों की गंभीर बीमारी से मौत हो चुकी है। गुजरात के पूर्व विधायक प्रफुल्ल खोड़ा पटेल (Prafulla Khoda Patel) ने नए प्रशासक के रूप में कार्यभार संभाला है। द्वीपों के रहने वाले लोगों के अनुसार प्रशासक ने द्वीप के सुधार से पहले किसी भी प्रकार का परामर्श नहीं लिया था। उनका कहना है की पटेल का मकसद लक्षद्वीप के लोगों के पारंपरिक और सांस्कृतिक जीवन को नष्ट करना है।

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Proposed Land Reform का क्यों कर रहे द्वीप के लोग विरोध

#SaveLakshadweep वहां के लोगोंका कहना है की पटेल ने सड़कों को चौड़ा करने और उनके घरों को तोड़ने का आदेश दिया है। यह जानते हुए भी की लक्षद्वीप में भूत कम वाहन चलते है। वहां सिर्फ दो पहिया वाहन ही चलते हैं। वहां के लोगों का कहना है कि हम चौड़ी सड़कें पाकर खुश हैं, लेकिन जब वे दोनों तरफ के घरों को नष्ट करके मौजूदा छोटी सड़कों को चौड़ा करने का प्रस्ताव रखते हैं, तो हम कैसे सहमत हो सकते हैं?” National Congress Party राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) President of Lakshadweep लक्षद्वीप के अध्यक्ष, बुन्यामिन से सवाल किया। उन्होंने टीएनएम को बताया “द्वीपों में पहले से ही जगह की कमी है। कई परिवारों के पास सिर्फ एक घर है। अगर वे इसे खो देते हैं तो क्या होगा? कुछ द्वीप सिर्फ 500 मीटर चौड़े हैं, इसलिए यदि वे जमीन को चौड़ा करने के लिए अधिग्रहण ( Acquisition ) करते हैं, तो इन लोगों को समुद्र के किनारे रहना होगा।

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Keral से संबंध तोड़ने का प्रयास

कोच्चि से लगभग 150 से 200 समुद्री मील की दूरी पर स्थित, लक्षद्वीप की आबादी 60,000 से अधिक है। चिकित्सा सुविधाओं से लेकर उच्च शिक्षा तक, द्वीपवासी बड़े पैमाने पर केरल पर निर्भर हैं।

हालांकि, कुछ के अनुसार, प्रशासक के नए फैसले कथित तौर पर लक्षद्वीप के केरल के साथ संबंधों को काटने के लिए भी हैं। राष्ट्रपति को लिखे अपने पत्र में, केरल के राज्यसभा सांसद, एलमाराम करीम ने लिखा, “प्रशासन ने यह भी तय किया है कि द्वीपवासियों को अब माल ढुलाई के लिए बेपोर बंदरगाह पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। इसके बजाय, उन्हें इस उद्देश्य के लिए मंगलुरु बंदरगाह पर निर्भर रहना चाहिए। इस निर्णय से बेपोर पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, जो दशकों से द्वीप से निकटता से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि इस फैसले का मकसद लक्षद्वीप का केरल से संबंध खत्म करना है।

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द्वीपों पर महामारी

Lakshadweep के लोगों का मानना है की Covid 19 के बढ़ते मामलों के पीछे स्पाइक का भी दोष है।पटेल ने वहां प्रत्येक द्वीप पर जहाज के माध्यम सेवा अगत्ती द्वीप पर, जहां हवाई अड्डा है, लोगों के पहुंचने के बाद , उन्हें एक परीक्षण और 14 दिवसीय संगरोध से गुजरने का आदेश दिया था। ऐसा कहा जा रहा है की lakshadweep समूह में जाने के लिए केवल एक ICMR प्रयोगशाला से एक negative RTPCR अनुमोदित रिपोर्ट ले जाने की आवश्यकता है। वहीं अनीस ने आरोप लगाया है कि अब , द्वीपों में परीक्षण positive दर कई बार 60% को पर कर गई है।

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Lakshadweep ने अभी तक Covid 19 के एक भी मामले की सूचना क्यों नहीं दी

द्वीपों के लोग और राजनेता भी इस बात पर जोर देते हैं कि यह हिंदू विचारधारा और मुस्लिम समुदाय के बीच की लड़ाई नहीं है जैसा कि मीडिया में कुछ लोग दिखा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार द्वारा नियुक्त पूर्व प्रशासक अच्छे थे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उनकी लड़ाई व्यक्तिगत प्रफुल्ल पटेल के खिलाफ है। बुन्यामिन ने कहा, “यहां कोई सांप्रदायिक तत्व नहीं है। ये संशोधन उनके अपने फैसले हैं। पटेल के अपने लक्ष्य हैं। ऐसा नहीं है कि भाजपा सरकार यहां मुस्लिम समुदाय के खिलाफ काम कर रही है। पटेल के अपने लक्ष्य हैं।”

बुन्यामिन ने यह भी कहा की हम इसके खिलाफ राजनीतिक और कानूनी दोनों तरह से लड़ेंगे। हमारी लड़ाई भाजपा सरकार के खिलाफ नहीं बल्कि प्रशासक के निरंकुश शासन के खिलाफ है। प्रशासन प्रत्येक सुधार का मसौदा अंग्रेजी में लगभग 100 पृष्ठों में जारी करता है। कई द्वीपवासी यह नहीं समझ सकते हैं कि इसलिए वे उम्मीद करते हैं कि लोग आपत्ति नहीं करेंगे।

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