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#SaveReservation: सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी पर मंडल-चंद्रशेखर से लेकर हंसराज ने दिया ये रिएक्शन!

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SaveReservation Twitter पर इस वक्त नंबर 1 ट्रेंड कर रहा है। दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण पर एक टिप्पणी की है। जिसके बाद आरक्षण समर्थक और आरक्षण विरोधी आमने सामने हैं। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि आरक्षण मौलिक अधिकार नहीं है। अदालत ने यह टिप्पणी तमिलनाडु के मेडिकल कॉलेजों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) उम्मीदवारों के लिए कोटा को लेकर दाखिल कई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए की। 

Komal Badodekar | New Delhi

सु्प्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति एल. नागेश्वर राव की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि कोई भी आरक्षण के अधिकार को मौलिक अधिकार नहीं कह सकता है। इसलिए कोटा का लाभ नहीं देना किसी संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन नहीं माना जा सकता।

जस्टिस राव ने कहा, ‘आरक्षण का अधिकार मौलिक अधिकार नहीं है। यह आज का कानून है।’ पीठ ने अपने ओबीसी छात्रों के लिए तमिलनाडु मेडिकल कॉलेजों में सीटें आरक्षित न रखकर मौलिक अधिकारों के उल्लंघन का दावा करने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा।

वहीं इस मामले में अब आरक्षण का समर्थन करते हुए भीम आर्मी चीफ चंद्रेशखर राव ने ट्वीट कर कहा है कि, आरक्षण का प्रावधान संविधान के भाग 03 में दिया गया है, हेडिंग- मौलिक अधिकार। अब सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि आरक्षण मौलिक अधिकार नहीं है। सरासर संविधान की अवहेलना! यह कोलेजियम सिस्टम का दुष्परिणाम है। कोलेजियम सिस्टम खत्म किया जाए।

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वहीं दिलीप सिंह मंडल ने ट्विट कर अपने साथियों से अपील की है कि #SaveReservation को ट्विटर पर नंबर वन पर ट्रेंड करना है ताकि मामला लोगों की नजरों में आ सके। वहीं एक अन्य ट्विट में उन्होंने कहा, संविधान के मामले में कोर्ट कुछ नहीं है। सरकार जब चाहे अध्यादेश लाकर फ़ैसले को पलट सकती है। आरक्षण मौलिक अधिकार है। रात 8 बजे ट्विटर स्टॉर्म में हिस्सा लें।

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वहीं हंसराज मीणा ने एक साथ कई ट्विट कर आरक्षण के समर्थन में अपनी बात रखी। हंसराज में एक ट्विट में कहा, मैं उन वर्गों की एक छोटी सी आवाज हूँ जिनकी आवाजें सदियों से गलियों, कुचों और जंगल, पहाड़ों में दबा दी गयी। #SaveReservation…. वहीं एक अन्य ट्विट में उन्होंने कहा, अगर आज आप जागे नहीं तो कल को आरक्षण खत्म मानो। तुम्हें वो धूल समझते है, तुम आंधी बनकर उठो। #SaveReservation

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बता दें कि, सीपीआई, डीएमके और अन्य नेताओं द्वारा दाखिल की गई याचिका में कहा गया था कि तमिलनाडु में 50 प्रतिशत सीटों को स्नातक, स्नातकोत्तर चिकित्सा और दंत चिकित्सा 2020-21 के पाठ्यक्रमों के लिए अखिल भारतीय कोटा में तमिलनाडु में आरक्षित रखी जानी चाहिए। याचिकाओं में कहा गया है कि केंद्र सरकार के संस्थानों को छोड़कर अन्य सभी ओबीसी उम्मीदवारों को ऑल इंडिया कोटा के तहत दी गई सीटों से बाहर मेडिकल कॉलेजों में दाखिला मिलना चाहिए। ओबीसी उम्मीदवारों को प्रवेश से इनकार करना उनके मौलिक अधिकार का उल्लंघन है। आरक्षण दिए जाने तक नीट के तहत काउंसलिंग पर रोक लगाई जाए।