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जम्मू कश्मीर के सबसे चर्चित राज्यपाल सत्यपाल मालिक का तबादला, शायद दिल्ली उनसे नाराज़ हो ही गया

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ग्राउंड रिपोर्ट | श्रीनगर

जम्मू कश्मीर 370 हटने के बाद 2 फाड़ होने वाला है, इस राज्य को बांट कर 2 नए केंद्रशासित प्रदेश बनाये जाएंगे। अब तक राज्य की कमान संभाले हुए थे राज्यपाल सत्यपाल मलिक, अब जब राज्य नहीं रहा तो सत्यपाल मालिक को गोवा भेज दिया गया और 2 नए उप राज्यपाल बना दिये गए हैं। एक हैं जी सी मुर्मू जो जम्मू कश्मीर के पहले उप राज्यपाल होंगे। दूसरे हैं राधा कृष्ण माथुर जो लद्दाख के पहले उप राज्यपाल होंगे। सत्यपाल मालिक अब गोवा के नए राज्यपाल बनाए गए हैं। जब धारा 370 हटाई गई और नए राज्य बनाये गए तब यह माना जा रहा था कि सत्यपाल मालिक ही नए राज्यों के उपराज्यपाल होंगे। लेकिन शायद केंद्र उनसे नाराज़ हो गया।

कौन है 2 नए राज्यपाल?

गिरीश चंद्र मुर्मू 1985 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी हैं। गुजरात के सीएम रह चुके नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के  दौरान गिरीश चंद्र मुर्मू  उनके प्रमुख सचिव थे। मुर्मू को नरेंद्र मोदी का करीबी विश्वासपात्र माना जाता है। दूसरी तरफ केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के पहले एलजी बनाए गए राधा कृष्ण माथुर त्रिपुरा कैडर के 1977 बैच के सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी हैं। वह नवंबर 2018 में भारत के मुख्य सूचना आयुक्त (CIC) के रूप में सेवानिवृत्त हुए। 25 मई 2013 को इस पद पर नियुक्त होने के दो साल बाद माथुर भारत के रक्षा सचिव के रूप में सेवानिवृत्त हुए।

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ढाल की तरह खड़े रहे सत्यपाल

सत्यपाल मालिक ने केंद्र सरकार की जी हजूरी बड़ी ईमानदारी से की, उन्होंने राज्य से 370 हटने की खबर को अंत तक दबाये रखा। वे अंत तक ऐसे किसी भी कदम को नकारते रहे। राज्य में जब बीजेपी-PDP की सरकार गिरी तो सत्यपाल मालिक ने राज्य का मोर्चा संभाला। उन्होंने राज्य के युवाओं से बंदूक छोड़ मुख्यधारा से जुड़ने के लिए कई बार अपील की और तमाम राजनीतिक दबाव के बावजूद दीवार की तरह लोकतांत्रिक व्यवस्था को कश्मीर में चलाने के लिए काम करते रहे।

विवादित बयानों से सुर्खियां बनाते रहे

अपने बयानों की वजह से सत्यपाल मालिक हमेशा सुर्खियों में रहे। हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान मलिक ने कहा कि वह कई बार ऐसे बयान दे देते हैं, जिसकी उन्हें तीन-तीन दिन तक सफाई देनी पड़ती है। साथ ही ये भी लगता है कि दिल्ली में कोई नाराज़ ना हो जाए।

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उन्होंने कहा कि राज्यपाल रोजाना बात नहीं करता है, ना ही प्रेस कॉन्फ्रेंस करता है। लेकिन दिक्कत ये भी है कि कई बार मेरे मुंह से ऐसी बातें निकल जाती हैं, जिनकी मुझे तीन दिन तक सफाई देनी पड़ती है। लगता है कि दिल्ली में कोई नाराज ना हो जाए। उन्होंने कई ऐसे बयान दिए जिससे केंद्र की मोदी सरकार असहज दिखाई दी।