भाजपा स्टार प्रचारकों की सूची में सिंधिया 10वें नंबर पर, कांग्रेस ने कसा तंज़

“सिंधिया का बीजेपी में घुट रहा दम, कांग्रेस में जल्द करेंगे वापसी”

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Ground Report | News Desk

मध्यप्रदेश में उपचुनाव को लेकर उथल-पुथल शुरु हो चुकी है। ज्योतिरादित्य सिंधिया के कट्टर समर्थक रहे मध्य प्रदेश सेवादल के पूर्व अध्यक्ष सत्येंद्र यादव प्रदेश कांग्रेस कमेटी में वापस लौट आए हैं और इसी के साथ मध्यप्रदेश में उपचुनाव के बाद दोबार सत्ता के पलटी मारने का रास्ता बनता दिखाई दे रहा है। सत्येंद्र यादव ने पीसीसी दफ्तर पहुंच कर कामकाज शुरू कर दिया है। ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल होने के बाद सत्येंद्र यादव ने भी सेवादल से इस्तीफा दे दिया था। अब उनका कहना है कि जल्द सिंधिया कांग्रेस में वापसी कर सकते हैं।

सत्येंद्र यादव ने ज़ी न्यूज़ से बातचीत में कहा-


”मैं भाजपा में नहीं जा सकता। सेवादल की पूरी टीम कांग्रेस के लिए उपचुनाव में जुटी है। ज्योतिरादित्य सिंधिया भी भाजपा में घुटन महसूस कर रहे हैं। सिंधिया इन दिनों किसी से मुलाकात नहीं कर रहे हैं।वह भाजपा में परेशान होकर जल्द ही कांग्रेस में वापसी करेंगे।”

मध्य प्रदेश में विधानसभा की 24 सीटों के लिए उपचुनाव होने हैं। ये सीटे राज्य में मची सियासी घमासान का निर्णायक फैसला करेंगी। सत्तासीन भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियां पूरे दमखम के साथ उपचुनाव की तैयारी कर रही हैं। इन 24 सीटों में 16 सीटें ग्वालियर-चंबल संभाग की हैं। इन सीटों पर ज्योतिरादित्य सिंधिया का प्रभाव माना जाता है। ऐसे में अगर सिंधिया दोबारा कांग्रेस में आते हैं तो राज्य में सत्ता का पासा फिर कांग्रेस के खेमें में आ जाएगा। यह सीटें सिंधिया के साथ 24 विधायकों के भाजपा में शामिल हो जाने के बाद खाली हुई हैं। सिंधिया की बगावत के बाद राज्य में 15 साल बाद सत्ता में लौटी कांग्रेस सरकार का पतन हो गया था। अब इन सीटों पर उपचुनाव में ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतकर दोनों पार्टियां अपनी स्थिति मजबूत करने का प्रयास कर रही हैं। आपको बता दें कि कमलनाथ भी दोबारा मध्यप्रदेश की सत्ता में आने का दावा कर चुके हैं।

दोबारा कांग्रेस में वापसी सिंधिया के लिए मुश्किल क्यों है?

मध्यप्रदेश राज्यसभा सीट को लेकर सिंधिया का कांग्रेस से विवाद शुरु हुआ था। दरअसल वो इस सीट से राज्यसभा जाना चाहते थे, लेकिन यह सीट दिग्विजय सिंह छोड़ना नहीं चाहते थे। दूसरी सीट से भी कांग्रेस सिंधिया को राज्यसभा भेजने के पक्ष में नहीं थी। मध्यप्रदेश में कांग्रेस का कद्दावर चेहरा रहे सिंधिया अलग-थलग महसूस कर रहे थे। केंद्रीय नेतृत्व भी उनकी सुनने को तैयार नहीं था। ऐसे में सिंधिया ने कांग्रेस छोड़ भाजपा में जाने का फैसला किया था। भाजपा में जाने से कांग्रेस को गहरा झटका लगा और कमलनाथ की सरकार गिर गई। सिंधिया द्वारा किया गया यह विश्वासघात कांग्रेस नेतृत्व अब तक पचा नहीं पाई है। ऐसे में सिंधिया की दोबारा वापसी आसान नहीं होगी। भाजपा भी किसी हाल में सिंधिया को दोबारा कांग्रेस का दामन नहीं थामने देगी। लेकिन माना जा रहा है कि सिंधिया भाजपा में वह कद हासिल नहीं कर पाएंगे जो उनका कांग्रेस में था। भाजपा में सिंधिया के दम घुटने की बात कहकर सत्येंद्र यादव ने एक नई राजनीतिक उठापटक को हवा दे दी है। और अंदरखाने से बार – बार उठ रही आवाज़ को थोड़ा पुख्ता यह बयान कर देता है। सत्येंद्र यादव को सिंधिया का कद्दावर समर्थक माना जाता है। उनकी दोबारा कांग्रेस में वापसी भाजपा के लिए बड़ा झटका है। अब देखना होगा की मध्यप्रदेश की राजनीति और कितने ट्विस्ट और टर्न से होकर गुज़रेगी।

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