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सतना : घर लौटे प्रवासी मज़दूरों की कब सुध लेगी सरकार ?

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सतना : लॉकडाउन के बाद जो प्रवासी श्रमिक लौटे उन्हें रोजगार की जरूरत थी। सरकारी इंतज़ाम इतने कम थे कि उन्हें या तो किराने की दुकान खोलनी पड़ गई या फिर सब्जी का ठेला लगाना पड़ गया। मज़बूरी ऐसी भी आई कि गांव में ही किसानों के खेत मे मज़दूरी करने लगे। हालांकि अब वो वापस नहीं जाना चाहते

मध्य प्रदेश के सतना ज़िला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूर बसे किटहा गांव के 19 वर्षीय आदर्श पांडेय भी उन प्रवासी श्रमिको में से एक हैं जिनका काम लॉकडाउन के बाद छूट गया थाा।

आदर्श बताते हैं-

पहले मैं मुम्बई में एक कपड़ा कंपनी में काम करता था। बारह-तेरह हज़ार पगार थी। कोरोना की वजह से गांव आया। गांव आते ही सब्ज़ी का ठेला खोल लिया। सब्ज़ी की दुकान से एक दिन का 12  से 13 सौ मिलता है। उसी से अपना चलता है। आदर्श लॉकडाउन के बाद चाट का ठेला भी लगाते थे लेकिन मुनाफा कम होता देख। सब्जी बेचनी शुरू कर दी।

इसी तरह करीब 7 किलोमीटर दूर ग्राम सकरिया के प्रद्युमन मिश्रा (24 वर्ष)  बताते हैं, ” मैं पहले ग्वालियर में रहता था। टेक्सटाइल कंपनी में वर्क (काम) करता था। वहां महीने के 10-15 हज़ार कमा लिया करता था। फिर लॉकडाउन हो गया कोरोना वायरस के चलते। इसके बाद घर आया गृह ग्राम सकरिया। रोजगार का कोई साधन नहीं मिला तो किराना की दुकान खोल ली।”

इसी तरह सकरिया के ही महेश (24 वर्ष) बताते हैं सूरत में रहता था । वहां मेरी सैलेरी थी 15 हज़ार। कपड़ा कंपनी में काम करता था। लॉक डाउन की वजह से गांव आ गया। यहाँ खेती बाड़ी का काम करता हूँ। 180 रुपये मिलता है यहां। जो मिल रहा है यहां उससे खर्चा भी नही निकल रहा।

महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना के तहत नए मज़दूरों के जॉबकार्ड बनाए गए। पोर्टल के अनुसार 1 लाख 2 हजार 75 प्रवासियों के जॉबकार्ड बन चुके हैं जबकि 1 लाख 34 हजार 5 सौ 56 की प्रक्रिया पूरी की जा रही है, हालांकि 2 लाख 56 हजार 4 सौ 30 प्रवासियों जॉब कार्ड धारक हैं इनमें से 1 लाख 93 हजार 83 को मनेरगा में नियोजित किया गया है।

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सतना जिले में 6 हजार 6 सौ 63 के जॉबकार्ड बनाए जा चुके हैं, 6 हजार 9 सौ 68 के जॉब कार्ड बनने की कतार में है। यहां 3 हजार 8 सौ 20 प्रवासी पहले से ही जॉब कार्ड धारक इनमें से 3 हजार 5 सौ 7 को मनरेगा के कार्यों में लगाया जा चुका है।

लॉकडाउन के बीच अपने घरों की ओर लौटे प्रवासी श्रमिक के लिए प्रदेश सरकार ने मनरेगा के तहत कामकाज शुरू करने के आदेश दिए थे। इनके लिए मनरेगा ही एक मात्र सहारा थी। यही कारण है कि प्रदेश में सर्वाधिक दिवस मई माह जबकि सतना जिले में जून माह में सृजित किए गए।

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मनरेगा पोर्टल के एमआइएस डाटा के अनुसार स​तना जिले में जून माह में 1076454 मानव दिवस सर्वाधिक ​सृजित किए गए जबकि अप्रैल में 95459, मई में 745790 और जुलाई में 371137 मानव दिवस बनाए गए। समूचे प्रदेश का आंकड़ा देखा जाय तो  43880276 मानव दिवस अकेले मई माह में सृजित किए गए जबकि अप्रैल में 6854517, जून में 48697031 और जुलाई में 27841024 सृजित किए गए।

ये रिपोर्ट मध्य प्रदेश से फ्रीलांस पत्रकार सचिन त्रिपाठी ने की है ।

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