साराह-अल-अमीरी पर्दों की दीवार लांघ अंतरिक्ष में करेंगी नाम रौशन

साराह-अल-अमीरी यूएई के मंगल मिशन को कर रही हां लीड
Sharing is Important
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

संयुक्त अरब अमीरात जहां अधिकतर महिलाओं को पर्दे में रखा जाता है वहां अब महिलाएं बड़ी भूमिकाओं में नज़र आने लगी हैं। कट्टर से कट्टर देश भी अब महिलाओं की प्रतिभा को पहचानने लगे हैं और उन्हें नेतृत्व करने के लिए आगे कर रहे हैं। ऐसी ही कहानी है साराह-अल-अमीरी की जो यूएई के मिशन मंगल का नेतृत्व कर रही हैं। साराह-अल-अमीरी संयुक्त अरब अमीरात के मंगल यान अमल को अंतरिक्ष में भेजने वाली टीम को लीड कर रही हैं। यह मिशन यूएई के पहला अंतर गृहीय मिशन है।

2014 में जब यूएई ने अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम की घोषणा की तब यूएई के पास अपनी खुद की अंतरिक्ष एजेंसी नहीं थी। 6 साल की मेहनत के बाद यह मिशन लॉंच के लिए तैयार हुआ है। प्रक्षेपण के सात महीने बाद यह यान मंगल की कक्षा में पहुंचकर वहां के वातावरण का अध्ययन करेगा जिसे दुनिया की तमाम अंतरिक्ष एजेंसियों के साथ साझा किया जाएगा।


सारा के अनुसार इस मिशन पर पिछले छह सालों से काम चल रहा था। मिशन की टीम ने रोज लगभग 12 घंटे काम किया है। वे मानती हैं कि इस मिशन को पूरा करने में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। वहीं इन चैलेंज से मिशन की टीम को बहुत कुछ सीखने को भी मिला। सारा को इस प्रोजेक्ट का हिस्सा बनने पर गर्व है। 

साराह-अल-अमीरी की रुचि अंतरिक्ष विज्ञान में थी लेकिन तब उनके देश में अंतरिक्ष कार्यक्रम की कोई योजना नहीं थी। साराह-अल-अमीरी ने अमेरिका जाकर कंम्प्यूटर सांईंस में पढाई की। जब पहली बार संयुक्त अरब अमीरात ने 2014 में अपना अंतरिक्ष कार्यक्रम शुरु करने की घोषणा की तो साराह-अल-अमीरी को अहम ज़िम्मेदारी सौंपी गई। 150 लोगों की उनकी टीम में अधिकतर महिलाएं ही अहम ज़िम्मेदारियां संभाल रही हैं। यह उन महिलाओं के लिए काफी उत्साह भरा है जो आगे आकर कुछ करना चाहती हैं। यह उन महिलाओं के लिए आशा की एक किरण है जो पाबंदियों की वजह से अपने सपनों को पीछे छोड़ देती हैं। यूएई के मंगल मिशन का नाम भी अमल है, यानि होप आशा उम्मीद।

Ground Report के साथ फेसबुकट्विटर और वॉट्सएप के माध्यम से जुड़ सकते हैं और अपनी राय हमें Greport2018@Gmail.Com पर मेल कर सकते हैं।