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रविदास मंदिर मुद्दा : नेशनल मीडिया से गायब है दलितों का इतना बड़ा आंदोलन!

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न्यूज़ डेस्क | नई दिल्ली

यूं तो आपने भैंस को हवा में उड़ने, पानी पर चलने, और नागिन डांस, जिंदा सांप खाने वाली लड़की के वायरल वीडियो जैसी कई खबरें प्रमुख समाचार चैलनों में प्राइम टाइम में देखने को मिल जाती है लेकिन किसानों, गरीबों और दलितों से जुड़ी इक्का दुक्का खबरें ही हैं जिन्हें कथित नेशनल मीडिया अपने-अपने चैनलों में जगह देता है। टीआरपी की रैस और राजनीतिक दबाव के चलते कई प्रमुख खबरें लोगों को तक नहीं पहुंच पाती हैं।

करीब 600 वर्ष पुराना है संत रविदास का ये मंदिर
इसी कड़ी में दलितों और वंचित तबके से जुड़ी एक ऐसी खबर है जिस पर बीते कई दिनों से कोहराम मचा हुआ है लेकिन मानो ‘राष्ट्रीय मीडिया’ को इस बात से कोई फर्क ही न पड़ता हो। बीते दिनों दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने तुगलकाबाद स्थित संत रविदास का 600 वर्ष पुराना मंदिर ढहा दिया। मंदिर ढहने की ये खबर ‘जंगल में आग’ की तरह पूरे देश भर में फैल गई। इस बात पर देश भर में राजनीति गरमा गई।

क्या कहा मंदिर तोड़ने वाले दिल्ली विकास प्राधीकरण ने-
मामले ने तूल पकड़ा तो डीडीए ने सामने आकर सफाई दी और कहा, गुरु रविदास जयंती समारोह समिति ने जंगल की जमीन पर निर्माण किया था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद जगह खाली नहीं की गई थी। इसलिए नौ अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने डीडीए को आदेश दिया कि वह पुलिस की मदद से इस जगह को खाली कराए और ढांचे को हटाए।

SC/ST OBC, दलित संगठन के हजारों कार्यकर्ताओंका प्रदर्शन –
संत रविदास का ये प्राचीन ढहाए जाने के खिलाफ तमाम दलित संगठन, SC/ST, OBC संगठन और भीम आर्मी के हजारों कार्यकर्ता दिल्‍ली स्थित रामलीला मैदान में राष्ट्रव्यापी आंदोलन कर रहे हैं। इस आंदोलन में दिल्ली से बीजेपी के पूर्व सांसद उदित राज, भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद, दिल्‍ली सरकार में सामाजिक कल्‍याण मंत्री राजेंद्र पाल गौतम और आम आदमी पार्टी (AAP) के कई विधायक भी श‍ामिल हैं।

केन्द्र सरकार पर मंदिर तुड़वाने का आरोप –
प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि ये काम केन्द्र सरकार के इशारे पर हुआ है जिससे उनकी हिन्दूवादी और ब्राह्मणवादी मानसिकता साफ झलकती है। इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने राजनीति न करने की हिदायत भी दी थी लेकिन इसके बावजूद संत रविदास के हजारों अनुयायी और दलित संगठन से जुड़े हजारों लोग सड़कों पर उतर आंदोलन कर रहे हैं। प्रदर्शन कर रहे लोगों की मांग है कि संत रविदास के मंदिर का निर्माण उसी जगह पर करवाया जाए।

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बीएसपी सुप्रीमों ने साधा निशाना –
इससे पहले बीएसपी सुप्रीमों और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने मोदी सरकार और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर आरोप लगाते हुए कहा कि, ‘दिल्ली के तुगलकाबाद क्षेत्र में बना सन्त रविदास मन्दिर केन्द्र और दिल्ली सरकार की मिलीभगत से गिरवाए जाने का बीएसपी ने सख्त विरोध किया है। इससे इनकी आज भी हमारे सन्तों के प्रति हीन और जातिवादी मानसिकता साफ झलकती है।’

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दी सफाई –
इसका जवाब देते हुए मुख्यमंत्री केजरीवाल ने कहा कि, ‘मायावती जी, मंदिर के गिराए जाने से हम सब लोग बेहद व्यथित हैं। इसका कड़ा विरोध करते हैं। मुझे दुख है कि आप केंद्र के साथ इसके लिए हमें दोषी मानती हैं। दिल्ली में भूमि केंद्र सरकार के अधीन आती है। हमारी सरकार का इस मंदिर के गिराए जाने में कोई हाथ नहीं है।’

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मीडिया की बेरुखी का ये पहला मौका नहीं –
बहरहाल, यह कोई पहला मौका नहीं है जब इस तरह से किसी संगंठित दलित आंदोलन को मुख्यधारा के मीडिया में उतनी तवज्जो जगह न मिली हो। इससे पहले भी कई दलित आंदोलन की छुट-पुठ खबरों को दिखा खानापूर्ती करने का काम किया गया है। इससे पहले बीते साल एससी-एसटी एक्ट में हुए बदलाव के बाद हुए दलित आंदोलन के दौरान प्रशासन और ‘नेशनल मीडिया’ का रवैया किसी से छुपा नहीं है।

हांलाकि देखना होगा कि दिल्ली के रामलीला मैदान में हुआ ये आंदोलन क्या रंग लाता है। क्या माननीय सर्वोच्च न्यायालय इसे अवमानना के तहत देखेगा या सरकार दलितों की मांग को जायज मानते हुए संत रविदास के मंदिर का पुन: निर्माण करवाएगी।