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संकल्पपत्र: क्या नीतीश मोदी से पूछ पाएंगे 19 लाख नौकरियों का पैसा कहां से लाओगे?

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Bihar Election 2020: भाजपा ने गुरुवार को बिहार विधानसभा चुनाव का संकल्पपत्र जारी कर दिया है। इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, आईटी समेत विभिन्न क्षेत्रों में 19 लाख रोजगार देने का वादा किया गया है। साथ ही  हर बिहारवासी को फ्री कोरोना वैक्सीन (Corona Vaccine) का वादा भी पार्टी ने किया है।

इससे पहले तेजस्वी यादव ने भी 10 लाख नौकरियों का वादा किया था। इस पर नीतीश कुमार ने सवाल किया था कि इतनी नौकरियों का पैसा क्या जेल से आएगा। यही नहीं तेजस्वी यादव के नौकरियों पर भाजपा के सुशील मोदी ने भी ट्वीट कर बजट आगे रख इसे असंभव वादा करार दिया था। अब भाजपा द्वारा जारी संकल्प पत्र में 19 लाख नौकरियाों के वादे पर भी वही सवाल खड़ा होता है कि जब खुद उनकी पार्टी के नेता इसे असंभव बता रहे हैं तो यह वादा पूरा कैसे होगा?

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तेजस्वी की 10 लाख नौकरी बनाम भाजपा की 19 लाख नौकरियां

जब तेजस्वी यादव ने 10 लाख नौकरियों का वादा किया था तब नीतीश कुमार ने कहा था कि इसके लिए पैैसे क्या जेल से लाओगे? यानि क्या बजट का पैसा क्या तुम्हारे पिताजी देंगे। तभी भाजपा नेता सुशील मोदी ने भी कई अखबारों में अपना लेख छपवाकर ट्वीट किया था कि 10 लाख नौकरियों को लिए अतिरिक्त 58 हजार करोड़ की आवश्यकता होगी। इसका पैसा विपक्ष कहां से लाएगा।

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बिहार के लिए भाजपा का संकल्प पत्र

इस संकल्प पत्र में 5 सूत्र,1 लक्ष्य और 11 संकल्प व्यक्त किए गए है। भाजपा ने तेजस्वी के 10 लाख नौकरी के काट के रूप में 19 लाख रोजगार के अवसर का संकल्प घोषणा पत्र में लिया गया है।

तीन लाख नए शिक्षकों की नियुक्ति करेंगे। बिहार को आईटी हब बनाएंगे, जिससे पांच लाख रोजगार मिलेंगे। पार्टी ने कृषि क्षेत्र में दस लाख रोजगार का संकल्प भी लिया है।

एक करोड़ महिलाओं को स्वावलंबी बनाएंगे। दस लाख समूहों के माध्यम से 1.20 करोड़ महिलाओं को पहले ही स्वावलंबी बनाया जा चुका है।

मक्का, फल-सब्जी, चूड़ा, मखाना, पान, मसाला, शहद, मेंथा और औषधीय पौधों के लिए सप्लाई चेन विकसित करेंगे। इससे दस लाख नए रोजगार सृजित किए जाएंगे।

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क्या बिहार को एक बार फिर ठगने को तैयार बैठे हैं नेता?

कोरोना महामारी और प्रवासी मज़दूर संकट से जूझ रहे बिहार को नेता हर हाल में रिझाने में लगे हुए हैं। हमने हर चुनाव में देखा है कि चुनाव में नेता ऐसे वादे कर देते हैं जो ज़मीन पर उतारना संभव नहीं है। अगर आम भाषा में कहें तो ऐसे जुम्ले गढ़े जाते हैं जो लोकलुभावन होते हैं लेकिन उनका पूरा होना असंभव।

बिहार में ज़मीन पर रिपोर्ट कर रहे पत्रकार बताते हैं कि बिहार में लोग परेशान हैं। बेरोज़गारी चरम पर है। 90 दिनों में कई लोगों को केवल नौ दिन ही रोज़गार उपलब्ध हुआ है। कोरोना महामारी ने लोगों के घरों के चूल्हे बुझा दिए हैं। योग्य युवा बेरोज़गारी की वजह से घर में खाली बैठे हैं। लोगों में इसको लेकर काफी गुस्सा है। नौकरियों का वादा कर पार्टियां ऐसे ही वोटरों को रिझाना चाहती है। लेकिन बिहार का युवा किस नेता के वादे को असल मानता है यह नतीजों वाले दिन ही पता चलेगा।

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