बेटियों को मिलेगी उड़ान, अब सैनिक स्कूल में भी पढ़ सकेंगी

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ग्राउंड रिपोर्ट | न्यूज़ डेस्क

भारत सरकार ने लैंगिक समानता बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब सैनिक स्कूलों में लड़कियां भी दाखिला ले सकेंगी। पहले सैनिक स्कूलों में केवल लड़कों को ही दाखिल मिलता था। इन स्कूलों का उद्देश्य कम उम्र से ही बच्चों को सेना के विभिन्न अंगों में सेवा के लिए तैयार करना होता है। देश में कुल 28 सैनिक स्कूल हैं।

भारत सरकार बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान को एक नया स्तर देने जा रही है। भारत की सेना के तीनों अंगों में महिलाओं की भूमिका बढ़ी है। पहले की तुलना में अब ज़्यादा शाखाओं में महिला अफ़सर कार्यरत हैं। वायुसेना में भी महिलाएं अब लड़ाकू विमान उड़ा रही हैं। ऐसे में सैनिक स्कूलों में महिलाओं का प्रवेश उनकी भागीदारी को मजबूत करेगा।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। वर्ष 20121-22 के सत्र में इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। मिज़ोरम के छिंगछिप सैनिक स्कूल में सरकार ने इसे पायलट प्रोजेक्ट की तरह शुरू किया था, जो सफल रहा। इसे देखते हुए बाकी सैनिक स्कूलों को सभी जरूरी प्रबंध करने के निर्देश दे दिए गए हैं।

तो अगर आपकी बेटी सेना में जाने का सपना देखती है तो आप अभी से उसके सपनों को पंख दे सकते हैं। सैनिक स्कूल में कक्षा 6 के बाद दाखिला लिया जा सकता है। रक्षा अकादमी में प्रवेश पाने वाले सबसे अधिक बच्चे सैनिक स्कूल से ही होते हैं।

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