मुल्ला और जिहादी बताकर तोड़ डाली साईबाबा की मूर्ती, कौन हैं ये लोग?

Sharing is Important
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

Scroll.in इन वेबसाईट के अनुसार दक्षिणी दिल्ली के शाहपुर जाट स्थित एक मंदिर में साईबाबा की मूर्ती को तोड़ा गया है। मंदिर कमेटी के लोगों का कहना है कि मूर्ती खंडित हो गई थी इसलिए उसे मंदिर से हटा दिया गया। वहां आसपास जो लोग साईबाबा की पूजा करने मंदिर आते थे उन्हें यह बात हज़म नहीं हुई। वह मूर्ती के इस तरह तोड़े जाने से काफी दुखी हैं। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। जिसमें मूर्ती तोड़ने वालों को साफ-साफ देखा जा सकता है।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को देखकर साफ पता चलता है कि साईबाबा की मूर्ती को हथौड़े से तोड़ा जा रहा है, साथ ही मूर्ति को तोड़ने वाले साई बाबा को जिहादी और मुल्ला भी बता रहे हैं।

वह पहले साईबाबा की मूर्ती को उखाड़ने को कहता है फिर पांच बार हथौड़े से मूर्ती पर वार करवाता है। वह वीडियो में कहता है कि यह कोई भगवान नहीं है, 1918 में मर गया था। यह मुसलमान था, इस मंदिर में लगानी है तो भगत सिंह, सुखदेव की मूर्ती लगाओ।

READ:  SC कॉलेजियम की लगी मुहर तो सौरभ किरपाल होंगे देश के पहले समलैंगिक जज

जो व्यक्ति इस वीडियो में साईबाबा की मूर्ती तुड़वा रहा है उसे एक वीडियो में गाज़ियाबाद के डासना देवी मंदिर के मुख्य पुजारी सरस्वती के साथ देखा जा सकता है। सरस्वती हिंदू स्वाभीमान नाम के एक संगठन के अध्यक्ष हैं। न्यूज़ वेबसाईट The Quint में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक यह संगठन मुस्लिमों के खिलाफ आखिरी लड़ाई के लिए लोगों को उकसा रहा है और क्षेत्र में सांप्रदायिक माहौल खराब करने की कोशिश कर रहा है। 14 मार्च को गाज़ियाबाद में ही एक मुस्लिम बच्चे को शिव मंदिर में पानी पीने की वजह से दो लोगों ने पीटा था।

ALSO READ: Muslim teenager beaten in Ghaziabad for allegedly drinking water at temple

देश में इस तरह की कई घटनाएं आए दिन सामने आ रही हैं जहां धार्मिक कट्टरता को बढ़ावा देते कुछ लोग और संगठन दिखाई देते हैं। कई ऐसे संगठन खड़े हो गए हैं जो हिंदुत्व के नाम पर देश में सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने के कोशिश में लगे हुए हैं। यह संगठन खुले तौर पर अपना काम करते हैं।

READ:  बुढ़ानशाह महिला कमांडो: गांव को नशामुक्त करने महिलाओं ने थामी लाठी

ऐसी ही एक घटना यूपी के बागबत के दिगंबर जैन कॉलेज में सामने आई थी जहां एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने कॉलेज कैंपस में लगी जैन देवी श्रुतदेवी की मूर्ती को हटाने के लिए बवाल किया था। इनका कहना था कि कॉलेज कैंपस में श्रुतदेवी की जगह सरस्वती की मूर्ती लगाई जाए।

हाल ही में यूपी के झांसी में भी केरल की दो नन के साथ एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने बदसलूकी की और जबरन ट्रेन से उतार दिया। एबीवीपी के कार्यकर्ताओं को इनपर जबरन धर्मपरिवर्तन करवाने का शक था।

सवाल यहां यह है कि इन संगठनों को कौन बढ़ावा दे रहा है। इन लोगों को किसी को पीटने, धमकाने और कानून हाथ में लेने का अधिकार किसने दिया। क्या इस तरह मंदिर में जाकर किसी मूर्ती को तोड़ने से देश का सांप्रदायिक सौहार्द नहीं बिगड़ता। फिर इन लोगों पर कार्यवाई क्यों नहीं होती। इस तरह धार्मिक कट्टरता फैलाने और दूसरे धर्म के प्रति नफरत भरने से समाज में सौहार्द रह पाएगा।

READ:  IFFCO ने लिया अहम फैसला, किसानों को दी बड़ी राहत

ALSO READ: लिव इन रिलेशन को नकारने वाला समाज नाता प्रथा पर चुप क्यों रहता है?

अभी ये लोग मुस्लिमों के खिलाफ आखिरी लड़ाई की बात कर रहे हैं कल किसी और धर्म के लोगों के लिए यही बात की जाएगी। क्या एक लोकतांत्रिक देश में इस तरह की घटनाओं की जगह होनी चाहिए?

Ground Report के साथ फेसबुकट्विटर और वॉट्सएप के माध्यम से जुड़ सकते हैं और अपनी राय हमें Greport2018@Gmail.Com पर मेल कर सकते हैं।

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.