मध्यप्रदेश में कांग्रेस को मिला साधु-संतो का साथ, सटोरियों ने भी लगाया दांव

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न्यूज़ डेस्क।। मध्य प्रदेश में इस बार कांग्रेस के पक्ष में बयार बह रही है और इसका कारण भाजपा से नाराजगी है। जबलपुर में साधु संतों का नर्मदा संसद के लिए जमावड़ा लगा तो सर्वसम्मति से यह फैसला लिया गया कि इस बार चुनावों में कांग्रेस का समर्थन किया जाएगा। ‘नर्मदा संसद’ का आयोजन कंप्यूटर बाबा ने किया, वही कम्प्यूटर बाबा जो कभी शिवराज सरकार में मंत्री बनाए गए थे। शिवराज सरकार से नाराज़ होकर कम्प्यूटर बाबा ने इस्तीफा दे दिया था और शिवराज को धर्मविरोधी करार दिया था। नर्मदा संसद में कहा गया “जो राम का नहीं वह किसी काम का नहीं “

सट्टा बाज़ार में कांग्रेस की लहर

चुनावों में सटोरियों की भी अहम भूमिका होती है। सट्टा बाजार में इस बार कांग्रेस की जीत का अनुमान लगाया गया है। सट्टा बाज़ार का अनुमान हमेशा सही नहीं होता। यह अनुमान मात्र पर ही आधारित होता है।

ओपिनियन पोल भाजपा के पक्ष में

अभी तक जारी हुए दर्जनों ओपिनियन पोल का रुख भी स्पष्ट नहीं दिखा, सभी ओपिनियन पोल में भाजपा को सबसे बड़ी पार्टी बताया गया और कड़ी टक्कर की भविष्यवाणी की गई।

मध्यप्रदेश में आगामी 28 नवंबर को वोट डाले जाएंगे। इस बार का चुनाव भाजपा के लिए सबसे कठिन है। कांग्रेस के लिए 15 साल के सूखे को खत्म करने का यही मौका है।