हिंदी दिवस: ‘फीवर 104’ के आरजे अनुराग पांडे से खास बातचीत

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एम.एस.नौला | मुंबई

आज 14 सितंबर को हिंदी दिवस पूरे भारत में मनाया जा रहा है। आइए जानने की कोशिश करते है कि अपनी आवाज़ से मुंबईकरों के दिल पर राज करने वाले रेडियो चैनल ‘फीवर 104’ के आरजे अनुराग पांडे हिंदी दिवस के बारे में क्या विचार रखते है, और कितनी अहम है मातृभाषा उनके लिए:

सवाल : हिंदी दिवस के मौके पर आज हिंदी का अस्तित्व क्या है ?

जवाब: हिंदी हमारी मातृभाषा है, लेकिन परेशानी ये है कि भारत के लोगों की बड़ी दिक्कत ये है कि वो न हिंदी ठीक से बोल पा रहे, न अंग्रेज़ी और न ही अपनी क्षेत्रीय भाषा से न्याय कर पा रहे है। हर कोई आज अंग्रेज़ी को एहमियत देना चाहता है और उसे बोलना चाहता है। लेकिन आज न लोग ठीक से हिंदी बोल पा रहे न कोई और भाषा इसलिए बीच में ही अटक कर रह जाते है। हमें हिंदी पर गर्व करने ज़रूरत है, हिंदी का अस्तित्व देश के लोगों पर निर्भर करता है।

सवाल : कितनी ज़रूरी है हिंदी आज के दौर में?

जवाब : ज़रूरी ये है कि हम लोग किसी एक भाषा में अपना पूरा कमांड रखें, ताकि हम उस भाषा में आत्मविश्वास से अपने आपको प्रेज़ेंट कर सके। जैसे, महात्मा गांधी ने अपनी आत्मकथा को अंग्रेज़ी-हिंदी के बजाय गुजराती में लिखा। जैसे पीएम मोदी आज भी विदेश में जाते है तो हिंदी में भाषण देते है, वहीं, ज़रूरत पड़ने पर स्पीच टेलीप्रॉम्प्टर से इंग्लिश में बोलते है, इसके अलावा कई अन्य लोग इसका उदाहरण पेश करते है। इसलिए ज़रूरी है कि हमें इन दिग्गजो से सीख लेते हुए, अपनी भाषा को बिना शर्माए उसे आत्मसात करना चाहिए। मैं भी हिंदी भाषी आदमी हूं और मैं कही भी जाता हूं तो हिंदी में ही बात करता हूं। इसमें न मुझे कोई लाज है न हिचक, मैं शोज़ करता हूं। हिंदी की अपनी एक पहचान है, लोगों को इसे आत्मसात करने की ज़रूरत है।

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सवाल : फिल्मों की बात करें तो फ़िल्म हिंदी में बनती लेकिन उसे बनाते वक़्त और उसे प्रेज़ेंट करते वक़्त फ़िल्म से जुड़े लोग हिंदी को भूल जाते, ऐसा क्यों?

जवाब : इसकी सबसे बड़ी वजह है दुनिया के अलग अलग जगहों से लोगों आकर फिल्म के लिए काम करते है। जैसे कुछ लोग साउथ से आते है, कुछ गोवा से, कुछ बाहर देश से तो कुछ मुंबई के ही होते है जो अंग्रेज़ी में काम करते है लेकिन परेशानी ये होती है जो हिंदी भाषी होते है वो फिर हिंदी के बजाय खुद को अंग्रेज़ी में ढालने की कोशिश करने लगते है। लेकिन अगर कोई स्टार स्क्रिप्ट हिंदी में दिए जाने की मांग करता है तो उसे फिर हिंदी में ही स्क्रिप्ट दी जाती है।

सवाल : थिएटर में हिंदी का अस्तित्व खो गया है, ऐसा क्यों?

जवाब : मेट्रो सिटी में अंग्रेज़ी का बढ़ता वजूद और रीजनल भाषा का कब्ज़ा इसकी बड़ी वजह है। साथ ही बदलाव और क्योंकि अंग्रेज़ी ग्लोबल भाषा है, इसलिए भारत समेत कई देशों में बिज़नेस से लेकर हर छोटे बड़े क्षेत्रों में अंग्रेज़ी में ही काम होता है। इसलिए आज लोग इसकी तरफ ज़्यादा आकर्षित होने लगे है।

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लेकिन इसका दूसरा पहलू ये भी है कि रूस, जापान, चीन, जर्मनी जैसे देश अंग्रेज़ी के बजाय अपनी भाषा को महत्व देते है और वहां अंग्रेज़ी न जानना कोई मायने नहीं रखता है। वहीं, हमारे देश का माहौल आज ऐसा हो गया है कि अगर आप किसी बिज़नेस क्लास सोसायटी में बैठे है और आपने हिंदी में कुछ बोल दिया तो लोग आपको अजीब सी नज़रों से ऐसे देखेंगे कि मानों आपने कोई गलती कर दी हो। लोगों को अपनी मानसिकता बदलनी चाहिए और अपनी मातृभाषा को इज़्ज़त के साथ उसका इस्तेमाल करना चाहिए।

सवाल : रेडियो में हिंदी का क्या रोल है?

जवाब : रेडियो के लिए हर स्टेट में काम करने वाले रेडियो जॉकी को हिंदी अंग्रेज़ी के अलावा वहा की रीजनल भाषा भी आनी ज़रूरी है। जैसे, महाराष्ट्र में मराठी, गुजरात में गुजराती, इसलिए भाषा इंसान को दर्शाने का आईना है। आकाशवाणी से लेकर विविध भारतीय ने हिंदी को ही महत्व दिया और आज भी ज़्यादातर स्टेटस में हिंदी में रेडियो चैनल रन किये जाते है।

सवाल : अमिताभ बच्चन के साथ हिंदी को लेकर कोई अनुभव?

जवाब : अमिताभ बच्चन की हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों में मज़बूत पकड़ है। अगर वो हिंदी फिल्म करते है तो उनके लिए स्क्रिप्ट हिंदी (देवनागरी) में लिख कर दी जाती है। ऐसे ही अंग्रेज़ी फिल्मो की स्क्रिप्ट अंग्रेज़ी में दी जाती है। उनका मानना है कि सामने वाला जिस भाषा में समझे उसे उसी भाषा में समझाने की कोशिश की जाए।

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सवाल : रेडियो में स्टार्स इंटरव्यू के लिए आते है तो वो हिंदी में बात करने में कितने कम्फर्ट होते और कितने स्टार्स है जो हिंदी में ज़्यादा बात करते है आपके अनुभव से?

जवाब : कई स्टार्स है जो हिंदी में बात करने पर हिंदी में ही जवाब देते है जैसे अनिल कपूर, आशुतोष राणा, इरफान खान, नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी, शाहरुख खान, सलमान खान और आमिर खान।

सवाल : हिंदी दिवस पर आप क्या खास संदेश देंगे।

जवाब : हिंदी एक सही, उत्तमऔर समृद्ध भाषा है, ऐसी भाषा शायद ही पूरे विश्व में दूसरी हो, एक भारतीय होने के नाते आपको हिंदी समझना और बोलना आना चाहिए, इसका एक फायदा ये भी होगा कि आप भारत के किसी भी कोने में जाकर इस भाषा में संवाद कर सकते है। हिंदी को प्रचार और प्रसार की ज़रूरत है। वैश्विक दृष्टि से आज लोग अपनी सोच बदल रहे है और इस लिहाज़ से हिंदी एक परफेक्ट भाषा है।