“न्याय” कभी भी “बदला” नहीं हो सकता, मुख्य न्यायधीश एस ए बोबडे का बड़ा बयान

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न्यूज़ डेस्क, ग्राउंड रिपोर्ट
हैदराबाद में सामूहिक दुष्कर्म के आरोपियों को मुठभेड़ में मार गिराए जाने पर चीफ जस्टिस एसए बोबडे का बड़ा बयान आया है। हैदराबाद एनकाउंटर मामले के मद्देनजर भारत के मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे ने कहा कि अगर यह बदले के इरादे से किया गया है तो न्याय कतई न्याय नहीं हो सकता है। एक ओर इस एनकाउंटर के बाद पुलिस की वाहवाही हो रही है वहीं कई लोग इसपर सवाल भी उठा रहे हैं। जोधपुर में एक कार्यक्रम में जस्टिस बोबडे ने कहा कि न्याय कभी भी तत्काल में नहीं किया जाना चाहिए, न्याय कभी भी हो सकता है। हालांकि, सीजेआई ने अपनी टिप्पणी में कहीं भी हैदराबाद एनकाउंटर मामले का जिक्र नहीं किया है।

चीफ जस्टिस एसए बोबडे ने जोधपुर में कहा कि देश में हाल की घटनाओं ने नए जोश के साथ पुरानी बहस छेड़ दी है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि आपराधिक न्याय प्रणाली को अपनी स्थिति पर पुनर्विचार करना चाहिए और आपराधिक मामलों को निपटाने में ढिलाई के रवैये में बदलाव लाना चाहिए।

सीजेआई ने आगे कहा कि, न्यायपालिका में आत्म-सुधारात्मक उपायों को लागू करने की आवश्यकता है। लेकिन उन उपायों को प्रचारित किया जाना चाहिए या नहीं यह बहस का विषय हो सकता है। लेकिन, पुलिस को खुद को सही रखना चाहिए क्योंकि उसने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जो कहा उसकी बहुत आलोचना हो रही है। यह एक आत्म-सुधारात्मक उपाय था।

सीजेआई शरद अरविंद बोबडे ने आगे कहा कि, लेकिन, मुझे नहीं लगता कि न्याय तुरंत हो सकता है या होना चाहिए और न्याय कभी भी बदला नहीं हो सकता है। मेरा मानना है कि अगर बदले को न्याय समझा जाता है तो न्याय अपना चरित्र खो देता है।

गौरतलब है कि हैदराबाद में वेटरनरी महिला डॉक्टर से गैंगरेप-हत्या के चारों आरोपियों को शुक्रवार को पुलिस ने एनकाउंटर में ढेर कर दिया। बता दें कि शुक्रवार की सुबह पुलिस चारों आरोपियों को लेकर क्राइम सीन रीक्रिएट करने गई थी। पुलिस कमिश्नर वीसी सज्जनर ने दावा किया कि इस दौरान आरोपियों ने पुलिसवालों पर हमला किया, जिसके जवाबी कार्रवाई में चारों आरोपी मारे गए।

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है, जिसमें तेलंगाना में महिला डॉक्टर से गैंगरेप-हत्या मामले के आरोपियों के एनकाउंटर में शामिल पुलिसवालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने, जांच और एक्शन करने की मांग की गई है।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने इस मुठभेड़ के मामले में स्वत: संज्ञान लिया है। एनएचआरसी ने फौरन ही एक टीम तेलंगाना के लिए रवाना कर दी थी, जो तथ्यों की पड़ताल करेगी। यह टीम वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) की अगुवाई में बनाई गई है। टीम जांच पूरी कर जल्द से जल्द अपनी रिपोर्ट आयोग को सौंपेगा। आयोग ने कहा है कि देशभर में दुष्कर्म और यौन उत्पीड़न के बढ़ते मामलों का पहले ही संज्ञान लेकर राज्य महिला आयोगों और पुलिस प्रमुखों समेत केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय से इस तरह के मामलों की विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। उधर, इस मामले में केंद्र सरकार ने भी हिरासत में हुए मुठभेड़ पर तेलंगाना सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। संसद के सत्र में जवाबदेही सुनिश्चित करने और मामले की संवेदनशीलता के चलते सरकार तथ्यों के साथ पूरी तैयारी रखने के लिए मामले पर पैनी निगाह बनाए हुए है।