चूहों पर किया गया यह शोध अगर इंसान पर सफ़ल रहा तो मानसिक बीमारियों का इलाज संभव

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ग्रााउंड रिपोर्ट | न्यूज़ डेस्क

इजराइल की हाइफा यूनिवर्सिटी से पीएचडी करने वाले दो छात्र हनीद काय्यल और डॉ एडोनिस ईआनक्स ने एक ऐसा परीक्षण किया है, जिससे दिमाग की तंत्रिकाओं में बदलाव कर उन घटनाओं के लिए भी एहसास पैदा किया जो असल में कभी घटी ही नहीं। प्रारंभिक तौर पर चूहों पर किया गया यह प्रयोग अगर इंसान पर सफल रहता है तो कई मानसिक बीमारियों का हल निकाला जा सकता है।

तीन चरणों मे किये गए इस प्रयोग में चूहों को तीन समूह में बांटा गया पहले समूह के चूहों को मीठा खाने को दिया गया और न्यूरल एक्टिविटी को नकारात्मक कर दिया गया जिससे कि मीठा खाने पर चूहे को पेट मे दर्द होने का एहसास हो। अगली बार चूहे ने मीठे से परहेज़ कर दिया।

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दूसरे समूह ने दिमाग के दो भागों से होकर गुजरने वाले संदेश को शांत कर दिया जिसकी वजह से पेट दर्द होने पर भी चूहा मीठा खाता रहा। तीसरे समूह के चूहों को फिर मीठा खाने को दिया गया, इस बार नर्व सेल को एक्टिवेट किया गया और पेट दर्द वाले एहसास के बिना। फिर भी चूहों ने मीठे से परहेज़ किया जैसे उन्हे पता हो कि मीठा उनके लिए ठीक नहीं।

इस पूरे शोध का आधार न्यूरल पाथवे है जिसके द्वारा हमारा दिमाग अलग अलग घटनाओं और उनके अनुभवों को याद के तौर पर कैद कर लेता है। जिससे हमें पता होता है कि क्या करने पर क्या होगा। सकारात्मक और नकारात्मक टैगिंग की वजह से हमें गलत और सही का एहसास होता है। लेकिन यह हम समय और अनुभव के आधार पर अर्जित करते हैं। इस्राइली छात्रों की यह शोध बिना अनुभव के ही उन घटनाओं के प्रति सतर्क कर सकती हैं जो वास्तव में हमारे साथ पहले कभी घटित नहीं हुई।

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अगर ये शोध मानव दिमाग़ पर सफल हो जाए तो दुर्घटना के बाद मानसिक संतुलन खो देने वाले लोगों के न्यूरॉन पाथवे में बदलाव करके या उसे शांत करके, मरीज़ को घटना की वजह से लगे सदमें से बाहर निकाला जा सकेगा।