Research scholars across the country struggling with financial constraints due to not getting the fellowship

आर्थिक तंगी से जूझ रहे देश भर के रिसर्च स्कॉलर, बीते कई महीनों से नहीं मिली फेलोशिप

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भले ही विकास के बड़े-बड़े दावे कर ‘जय जवान-जय विज्ञान-जय अनुसंधान’ का नारा दे रहे हों और शोध के क्षेत्र में करोड़ो रुपये इंवेस्टमेंट करने की बात कर रहे हों लेकिन ये सच्चाई कि देश भर के हजारों रिसर्च स्कॉलर (Research Scholar) समय पर अपनी फेलोशिप (Fellowship) नहीं मिलने के कारण आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। सरकार द्वारा रिसर्चर को मिलने वाली फेलोशिप से रिसर्च स्कॉलर अपने शोध से जुड़े काम करने के साथ-साथ इससे वे अपनी सभी ज़रुरतें भी पूरी करते हैं, जिसमें उनका निजी व घर खर्च भी शामिल है। बीते कई महीनों से इन रिसर्च स्कॉलर्स को फेलोशिप नहीं मिली है जिससे उनका शोध तो प्रभावित हो ही रहा है साथ ही साथ अब वे घर का खर्च चलाने के लिए भी जूझ रहे हैं।

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इस मामले में ग्राउंड रिपोर्ट से बात करते हुए ऑल इंडिया रिसर्च स्कोलर्स एसोसिएशन के डॉ. लाल चंद्र विश्वकर्मा ने बातचीत में बताया कि, सरकार की जितनी भी फनडिंग एजेंसी हैं जैसे ICMR, CSIR DBT, DST,UGC और Ministry of Education (MHRD) समय पर शोध छात्रों को फेलोशिप देती है लेकिन बीते कई महीनों से हमें फेलोशिप नहीं है। इसके चलते हम आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं और हम जैसे कई अन्य छात्र रिसर्च पर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं।

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डॉ. लाल चंद्र विश्वकर्मा ने आगे बताया कि, फेलोशिप न मिलने के कारण देश का शोध क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। सरकार से कई बार हम यह मांग कर चुके हैं लेकिन सरकार इस पर ध्यान नहीं दे रही है। वहीं शोध छात्रो ने बताया कि कुछ छात्रों को 6 महिने से फेलोशिप नहीं मिली है जबकि कुछ शोध की तो एक वर्ष से भी अधिक समय से फेलोशिप नहीं मिल पाई है।

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उन्होंने बताया कि अन्तिम वर्ष के शोध छात्र सरकार से लगातार मांग कर रहे हैं कि कोविड-19 के चलते शोध छात्र रिसर्च का काम नहीं कर पाए हैं इसलिए उन्हें कम से कम बीते 6 महीने की फेलोशिप दी जाए जिससे देश भर के रिसर्च स्कॉलर्स शोध पर अपना काम जारी रख सकें और देश की तरक्की में अपना योगदान दे सकें।

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