पुण्यतिथि: प्रमोद महाजन ज़िंदा होते तो देश के प्रधानमंत्री ज़रूर बनते

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Ground Report | News Desk

वह नेता जो कभी देश की सबसे बड़ी पार्टी भाजपा ( BJP) का ‘चाणक्य’ कहा जाता था। भाई की गोली से घायल होने के बाद उसे आखिर 3 मई 2006 को देह त्याग करना पड़ गया। आज उसी नेता की पुण्यतिथि है। हम बात कर रहे हैं बीजेपी के दिग्गज नेताओं में शामिल रहे प्रमोद महाजन की। महाराष्ट्र के साथ ही देश की राजनीति में भी एक अहम जगह रखने वाला मुंडे और महाजन परिवार को पिछले दस सालों से कई हादसों का शिकार होना पड़ा है। गौर करने वाली बात है कि इस परिवार पर महीने की तीसरी तारीख हमेशा से भारी पड़ी है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी के बेहद अजीज माने जाते थे प्रमोद महाजन।

प्रमोद महाजन 90 के दशक में बीजेपी के ताकतवर नेताओं में से एक थे। अटल बिहारी वाजपेयी जब प्रधानमंत्री बने। तब भी वे से करीब करीब हर मामले में सलाह लेते थे। महाजन और जसवंतसिंह उन कुछ नेताओं में से एक थे। जिनका वाजपेयी सरकार में पीएमओ में सीधा दखल होता था। बीजेपी में इवेंट मैनेजमेंट का श्रेय प्रमोद को ही जाता है। उनकी बीजेपी के पूरे वित्तिय सिस्टम पर पकड़ थी।

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3 मई 2006 को उनके भाई प्रवीण महाजन ने घर में ही उनको तीन गोलियां मार दी थी। 13 दिन तक अस्पताल में रहे। उसके बाद उनका निधन हो गया। वैसे तो ये मौत आज तक रहस्य है लेकिन प्रवीण महाजन ने 2009 में एक इंटरव्यू दिया था जिसमें उन्होने बताया था कि किसी बात को लेकर दोनों भाईयों की बहस हो गई थी और फिर गुस्से में गोली चला दी। बाद में प्रवीण महाजन ने खुद पुलिस के सामने सरेंडर किया। 18 दिसंबर 2007 को उन्हे उम्र कैद की सजा सुनाई। 3 मार्च 2010 में प्रवीण महाजन का निधन हो गया। निधन के वक्त वे पैरोल पर जेल से बाहर थे।

प्रमोद महाजन का जन्म 30 अक्टूबर 1949 को हुआ था । उनका एक बेटा राहुल महाजन है। एक बेटी पूनम महाजन है। जो बीजेपी युवा मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष है। पत्नी का नाम रेखा महाजन है। जन्म आंध्र प्रदेश के महबूबनगर में हुआ था। कार्यक्षेत्र मुंबई रहा। वहीं से वे लोकसभा सांसद बने। प्रमोद पार्टी की तरफ से राज्यसभा सांसद भी बने थे ।

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1974 में प्रमोद ने स्कूल टीचर की नौकरी छोड़कर पूरी तरह से संघ के प्रचारक बने। इमरजेंसी के दौरान प्रमोद को नासिक जेल में डाल दिया गया। जहां से वह 1977 में रिहा हुए। बीजेपी के गठन के बाद संघ ने उन्हें पार्टी के काम के लिए भेज दिया। वह महाराष्ट्र में बीजेपी के महासचिव बनाए गए। तत्कालीन पार्टी अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी की सोमनाथ से अयोध्या रथयात्रा में महाजान का अहम रोल था।

वो अटल बिहारी वाजपेयी के राजनीतिक सलाहकार रहे। संचार मंत्री और संसदीय कार्य मत्री भी रहे। 2004 में प्रमोद महाजन के कहने पर ही लोकसभा चुनाव तय समय से पहले कराए गए थे। दिसंबर 2005 में जब बीजेपी रजत जयंती मना रही थी। तो अटल बिहारी वाजपेयी ने उन्हे लक्ष्मण का खिताब दिया था। हालांकि राम खुद को नहीं कहा था। राम आडवाणी जी को कहा था ।

प्रमोद महाजन की हत्या के आरोपी और उनके छोटे भाई प्रवीण महाजन ने अपने बड़े भाई की निजी जिंदगी से लेकर उनके राजनीतिक जीवन पर एक पुस्तक भी लिखी थी । किताब में प्रवीण महाजन ने प्रमोद महाजन पर आरोप लगाया है कि उसको पैसे व औरतों का नशा था। उसने कहा है कि मुझे किसी की सहानुभूति नहीं चाहिए। ‘माई एलबम’ नामक 175 पृष्ठों की यह पुस्तक काफी चर्चा में रही थी ।

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