E Pharmacy Business in India

ई-फार्मेसी बज़ार में रिलायंस के उतरने से दवा व्यापारियों की उड़ी नींद

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ई-फार्मेसी बाज़ार में रिलायंस और अमेज़न के उतरने से आनेवाले समय में ऑनलाईन दवा व्यापार में प्रतिस्पर्धा बढ़ जाएगी। जिसके चलते ऑनलाईन दवा खरीदने पर ग्राहकों को अच्छे खासे ऑफर मिलेंगे साथ ही बज़ार से कम दामों में दवा मिलना शुरु हो जाएगा। इससे मौजूदा पारंपरिक मेडिकल स्टोर्स की बिक्री पर असर पड़ सकता है।

कोरोना महामारी ने खीरददारी के तौर तरीकों में बड़ा परिवर्तन ला दिया है। कपड़े, घर का राशन, सब्ज़ी, दूध से लेकर बड़े-बड़े इलेक्ट्रॉनिक आयटम लोग ऑनलाईन ही खरीदना बेहतर समझ रहे हैं। महामारी की वजह से लोगों का बज़ार जाना मुमकिन नहीं था, इस आपदा को अवसर में बदलने का काम ऑनलाईन व्यापार कंपनियों ने किया है। फ्लिपकार्ट, अमेज़न के बाद रिलायंस भी जियो मार्ट के साथ बाज़ार में उतर चुकी है। रीटेल मार्केट के साथ-साथ ई-फार्मेसी के बाज़ार में भी काफी उछाल आया है। महामारी के डर ने लोगों को ऑनलाईन दवा खरीदने को मजबूर कर दिया। एक बार दवा ऑनलाईन मंगवाने के बाद लोगों को यह तरीका ज़्यादा सहज नज़र आया।

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धीरे-धीरे ई-फार्मेसी का मार्केट में ऐसा उछाल आया की रिलायंस खुद इसमें उतरने जा रही है। इस कदम से पारंपरिक मेडिकल स्टोर वाले थोड़े घबराए हुए हैं। उन्हें डर है कि अगर ई फार्मेसी का विस्तार हुआ तो उनकी रोज़ी रोटी छिन सकती है। आईये समझते हैं आखिर मेडिकल स्टोर वालों का डर कितना वाज़िब है-

  • रिलायंस रिटेल ने विटालिक हेल्थ में 60 फीसदी हिस्सेदारी 620 करोड़ रुपए में खरीदने के साथ इसकी सहायक कंपनी त्रिसारा हेल्थ प्राईवेट, नेटमेड्स और दाधा फार्मा की 100 फीसदी डायरेक्ट इक्विटी ओनरशिप खरीद ली है।
  • कोरोना की वजह से ऑनलाईन दवा खरीदने के चलन में 200 फीसदी तक का इज़ाफा हुआ है। 1 एमजी, फार्म इज़ी, नेट मेड जैसे ई फार्मेसी एप से दवा की खूब खरीददारी हुई है।
  • इस साल के अंत तक ई-फार्मेसी का बाज़ार भारत में 4.5 अरब डॉलर का हो जाएगा। पिछले वर्ष यह 1.2 अरब डॉलर का बाज़ार था।
  • भारत में हर 10 में से एक दवाई नकली होती है। ऐसोचैम के अनुसार भारत के घरेलू बाज़ार में 25 प्रतिशत नकली दवाएं मिलती है। ई-फार्मेसी की पहुंच बढ़ने से नकली दवा का व्यापार ठप हो जाएगा।
  • पारंपरिक दवा व्यापारियों ने ई-फार्मेसी के कारोबार को गैर कानूनी करार दिया है और सरकार से इस पर रोक लगाने की मांग की है।
  • देश में प्रधानमंत्री मोदी खुद टेलीमेडिसीन और डिजीटल क्रांति के पक्षधर रहे हैं। रिलायंस इंडस्ट्री के इस मार्केट में उतरने के बाद सरकार की ओर से इसमें कोई दखल दिया जाएगा इसकी उम्मीद कम दिखती है।
  • इससे पहले रीटेल मार्केट में 100 फीसदी एफडीआई और ई-कॉमर्स कंपनियों के रीटेल मार्केट में उतरने का भी इसी तरह विरोध हुआ था। माना जा रहा था इससे लाखों रोज़गार खत्म हो जाएंगे। लेकिन इसका कोई खासा असर नहीं हुआ।
  • ई-फार्मेसी से दूर-दराज़ के इलाके में रह रहे लोगों को आसानी से दवा पहुंचाई जा सकती है। इससे जेनेरिक दवाओं का प्रसार बढ़ेगा। लोगों को सस्ती दवा घर के दरवाज़े पर ही मिल जाएगी। ई फार्मेसी से अकेले रहने वाले बुज़ुर्गों को भी फायदा होगा।
  • सरकार द्वारा हाल ही में डिजीटल हेल्थ कार्ड की घोषणा की गई है। इस कदम का फायदा भी ई-फार्मेसी बिज़नेस को होगा। लोग ऑनलाईन अपना हेल्थ कार्ड अपलोड कर घर बैठे दवा मंगवा सकेंगे।

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