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क्या कोरोना की दूसरी लहर की वजह आपको पता है?

Corona second wave in India
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Coronavirus Second wave in India: देश में कोरोना वायरस पिछले साल की तुलना में और तेज़ी से पैर पसार रहा है। मार्च के महीने में ही देश में हर दिन 1 लाख से उपर मामले सामने आ रहे हैं। हर कोई यही सवाल कर रहा है कि आखिर कोरोना फिर से क्यों फैल रहा है जबकि अब तो वैक्सीनेशन भी शुरु हो चुका है। कोरोना की दूसरी लहर के पीछे जो मुख्य वजह मानी जा रही है, उसको जान आप के भी होश उड़ जाएंगे।

क्या हैं दूसरी लहर की वजह?

  • वैज्ञानिकों का मानना है कि हम अपने देश में फैले कोरोना के वैरिएंट की जांच ही नहीं कर रहे हैं। जिससे पता चल सके की कौन सा स्ट्रेन इतनी तेज़ी से फैल रहा है।
  • इसका मतलब है कि सरकार की ओर से देश में फैल रहे कोरोना के नए स्ट्रेन को लेकर अब तक लापरवाही बरती जा रही है। यह तब है जब पिछले साल देश कोरोना की वजह से बेहाल हो चुका है।
  • वैज्ञानिकों का यह भी मानना है कि अगर जल्द ही इन स्ट्रेन की जांच नहीं की गई तो इस वर्ष होने वाली तबाही का हम अंदाज़ा भी नहीं लगा पाएंगे। इसके परिणाम कल्पना से कई ज़्यादा भयावह हो सकते हैं।

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नए स्ट्रेन की जांच नहीं कर रहे हम

  • नए स्ट्रेन के बारे में जानकारी न होने से इसका असर न सिर्फ इलाज पर पड़ेगा बल्कि वैक्सीन कितनी कारगर है यह जान पाने में भी मुश्किल होगी।
  • भारत अपने पॉजिटिव सैंपलों में से सिर्फ एक प्रतिशत को ही जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए भेजता है। जीनोम सीक्वेंसिंग से ही पता चलता है कि जो वायरस फैला है वो कौनसा है।
  • जीनोम सीक्वेंसिंग के ज़रिए वायरस की पहचान की जाती है और फिर देखा जाता है कि कितने मरीज़ों में समान वायरस पाया गया है।
  • फिल्हाल भारत में यूके, ब्राज़ील और दक्षिण अफ्रीकी स्ट्रेन के मामले सामने आ रहे हैं।
  • बताया जा रही है कि यह स्ट्रेन पिछले वाले स्ट्रेन की तुलना में अधिक तेज़ी से फैलता है।
  • ब्रिटेन कुल संक्रमितों के 8 प्रतिशत सैंपलों की जीनोम सिक्वेंसिंग करता है। बीते हफ्ते तो यूके में 33 फीसदी सैंपलों को सिक्वेंस किया गया। अमेरिका में भी एक हफ्ते में आए 4 लाख नए मामलों के 4 फीसदी सैंपलों की जांच की गई।

तो क्या सो रहे हैं हम

  • अगर यह कहा जाए की हम सो रहे हैं तो यह गलत नहीं होगा। देश में मामले बढ़ने के बावजूद लॉकडाउन नहीं है।
  • लॉकडाउन न करना तो समझ आता भी है लेकिन देश में कहीं भी कोविड गाईडलाईन का पालन अब नहीं हो रहा।
  • जैसे ही मामले बढ़े राज्यों में नाईट कर्फ्यू जैसे कदम उठाए गए, जो केवल दिखावे के कदम लगते हैं।
  • देश के पांच राज्यों में चुनाव के दौरान नेताओं ने खुल कर रैलियां की और इनमें हज़ारों की संख्या में लोगों को इकट्ठा किया गया।
  • पिछले साल भी विदेश से आने वालों की वजह से ही देश में कोरोना का विस्तार हुआ था। इस बार फिर सरकार विदेशों से आने वालों के सैंपल की जीनोम सीक्वेंसिंग नहीं करके यही बता रही है कि सरकार सो रही है।
  • वैक्सीनेशन के सहारे सरकार लहर पर काबू पाना चाहती है लेकिन सबतक वैक्सीन पहुंचते पहुंचते बहुत देर हो जाएगी और कई लोग बेमौत मारे जाएंगे।
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