Tue. Oct 15th, 2019

सत्ता के सामने निडरता से सच बोलने के लिए मिला रवीश को अवॉर्ड

विचार | चित्रांश सक्सेना

रेमॉन मैग्सेसे सम्मान भले ही NDTV की पहचान बन चुके रवीश कुमार के हाथों में आया हो, लेकिन लगता है मानो की यह अवार्ड सैकड़ों-हज़ारों-लाखो दबी पढ़ी उन आवाज़ों को भी मिला है, जो बिना शिकायत किये अपने-अपने स्तर पर लोकतंत्र की किताब को सर्वस्व मानकर सही गलत के बीच का सच सामने लाने का प्रयास करते रहते है । चूंकि रवीश कुमार पत्रकारिता बिरादरी के ऐसे चेहरे है, जो अपनी सरल लेकिन कटाक्षपूर्ण वक्तव्य शैली से सवाल पूछने का भरसक प्रयास करते है । यूं तो बीते कुछ समय से पत्रकारों और उनकी पत्रकारिता पर कई तरह के उपनामों का अविष्कार हुआ है जिसमे “disigner पत्रकार” की संज्ञा काफी प्रचलित हुई है ।

रेमॉन मैग्सेसे सम्मान समूचे विश्व के बहुप्रतिष्ठित सम्मानों में से एक है, जिसे एशिया का नॉबेल पुरुस्कार भी कहा जाता है । इस बार 5 लोगो को मिले अलग अलग श्रेणी में भारत से रवीश कुमार को जर्नलिस्म, लिटरेचर और क्रिएटिव कम्युनिकेशन आर्ट्स की श्रेणी में यह अवार्ड मिला है।

“फिलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रेमॉन मैग्सेसे” की स्मृति में दिया जाने वाला यह सम्मान किसी भारतीय को पत्रकारिता की श्रेणी में 11वी बार मिल रहा है। रवीश को रेमॉन मैग्सेसे सम्मान के लिए चुनते हुए बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज़ ने कहा कि :-

भरसक ट्रोलिंग और लेबलिंग वाले आज के आधुनिक सोशल मीडिया दौर में इस तरह के स्टेटमेंट के साथ सम्मान प्राप्त करना भारतीय पत्रकारिता की विरासत को और मजबूत करता है।

जर्नलिस्म, लिटरेचर और क्रिएटिव कम्युनिकेशन आर्ट की श्रेणी में सम्मान प्राप्त भारतीय :-

2019 रवीश कुमार
2007 पी. साईनाथ
1997 महेश्वेता देवी
1992 रवि शंकर
1991 के वी सुबबना
1984 आर. के . लक्ष्मण
1982 अरुण शौरी
1981 गौर किशोर घोष
1975 बी.जी. वर्गीस
1961 अमिताभ चौधरी

कुल 11 ही महानुभाव यह सम्मान हासिल कर पाए है। रवीश कुमार की पत्रकारिता को लेकर एक बड़े जनमानस के मध्य कोलाहल का भाव रहा है, जिसमें उनका मत है कि रवीश सरकार के खिलाफ अधिक मुखर रहते है। वस्तुतःएक वास्तविक पत्रकार का कार्य ही यही होता है, की वह सरकार से घटनाक्रम पर सवाल करे और ऐसे रवीश ने समय-समय पर साबित भी किया है , चाहे वह माईम के माध्यम से हो या ग्राउंड जीरो की रिपोर्टिंग। सरकार की आलोचना के साथ अच्छे कार्यो की तारीफ़ दोनों के मध्य सन्तुलन रखना रवीश को भली भांति आता है । गौरतलब है कि बीते दिनों बढ़ते कोलाहल के बीच रवीश कुमार का सीधा प्रधानमंत्री जी के नाम पत्र और उसमें उपस्थित एक-एक शब्द कई मायने लिए है ।

आज के दौर में विचारधारा की लड़ाई से दूर पत्रकारिता धर्म को सिरमौर रखते हुए तथ्यों के समावेश से बेआवाज़ की आवाज़ बनना वास्तव में साहस और विवेक का कार्य है। जिसमे रवीश को मिला रैमन मैगसेसे सम्मान उनके बेअबाज़ की आवाज़ बनने की सार्थकता को दर्शाता हैं ।।

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