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Madhya Pradesh Elections 2018: मैं भाजपा में रहकर भी सेक्युलर

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न्यूज़ डेस्क।। मध्यप्रदेश की सीहोर विधानसभा से 4 बार विधायक रह चुके रमेश सक्सेना को पिछले चुनावों में एक निर्दलीय उम्मीदवार से मात्र 1600 से वोटों से हार मिली थी। वो आज सत्ता में नहीं है लेकिन आज भी उनके घर लोग अपनी समस्या लेकर आते हैं, और रमेश सक्सेना अपनी पूरी ताकत लगाकर उनकी मदद करते हैं। उनके घर में जैसे ही हमने प्रवेश किया तो देखा जनता दरबार लगा हुआ था। कोई राशन कार्ड, आवास योजना, शौचालय, बैंक कर्ज़ और तमाम समस्याएं उन्हे बता रहे थे और पूर्व विधायक उन्हे सभी समस्याएं सुलझवाने का आश्वासन दे रहे थे। लोगों की आंखों में ऐसी चमक थी जैसे मानो अब उनका काम हो ही गया समझो। ऐसे दृश्य भारत में विरले ही देखने को मिलते हैं जहां एक नेता जो अब सत्ता में नहीं फिर भी निरंतर जनसेवा में लगा रहता है।

अपने जीवन के 20 साल से ज़्यादा सीहोर की सेवा में गुज़ार चुके रमेश सक्सेना कहते हैं जो सत्ता के लिए राजनीति करता है वह क्षणिक राजनीति मात्र है। असली राजनेता वही जो सतत् जनसेवा में लगा रहे। इस बार सीहोर विधानसभा में भाजपा के टिकट के कई दावेदार हैं। निर्दलीय विधायक का कहना है की मुख्यमंत्री शिवराज का आशिर्वाद उन पर है उन्हे टिकट ज़रुर मिलेगा वहीं पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष जसपाल अरोरा भी अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। उनका कहना है भाजपा शहर में सर्वे करा कर देख ले जनता किसे ज़्यादा पसंद करती है। रमेश सक्सेना अपने अनुभव और भाजपा के लिए की जीतोड़ मेहनत के दम पर आश्वस्त हैं की टिकट उनके सिवा किसी और को मिलना नामुमकिन है। सीहोर में भाजपा जीतेगी या कांग्रेस यह सवाल इतना रोचक नहीं जितना यह की भाजपा टिकट किसको देगी।

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रमेश सक्सेना से हमने उनके राजनीतिक जीवन पर सवाल किए। शुरु में वो कांग्रेस के साथ थे बाद में भाजपा में आए। उन्होने बताया की उन्होने अपना पहला चुनाव अपनी सेक्यूलर छवी की वजह से जीता। तब हमने उन से सवाल किया फिर आप भाजपा जैसी पार्टी जिस पर सांप्रदायिक होने के आरोप लगते हैं में क्या कर रहे हैं। इस पर रमेश सक्सेना ने दो टूक जवाब देते हुए कहा वे भाजपा में कूशाभाउ ठाकरे की वजह से आए लेकिन आज भी वो भाजपा में होते हुए भी सभी धर्मों की बीच सद्भाव रखते हैं और एक सेक्यूलर नेता हैं। सांप्रदायिक सद्भाव सीहोर में रहे यही उनकी प्राथमिकता है।

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