Ram vilas Paswan : 7 बार केंद्र में मंत्री और 6 प्रधानमंत्रियों के साथ काम करने वाले पासवान का पूरा राजनीतिक सफर

Ram vilas Paswan : 7 बार केंद्र में मंत्री और 6 प्रधानमंत्रियों के साथ काम करने वाले पासवान का पूरा राजनीतिक सफर

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बीता गुरूवार 8 अक्टूबर बिहार और बिहार की सियासत के लिय अच्छा नहीं रहा। बिहार की सियासत का एक जाना-माना चेहरा रामविलास पासवान (Ram vilas Paswan) दुनिया को अलविदा कह गया। पासवान ऐसे एकलौते नेता हैं, जो 9 बार सांसद और सात बार केंद्र में मंत्री रहे। उनको देश के छह प्रधानमंत्रियों के साथ काम करने का मौका भी मिला। अचानक से केंद्रीय मंत्री पासवान के निधन से बिहार वासियों में बड़ा झटका लगा। लोजपा संस्थापक रामविलास पासवान 74 वर्षीय रामविलास पासवान पिछले कुछ हफ्तों से बीमार चल रहे थे और दिल्ली के साकेत स्थित अस्पताल में भर्ती थे। हाल ही में उनकी हार्ट सर्जरी हुई थी।

देश के सभी नेताओं और राजनीतिक दलों ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पासवान निधन पर शोक व्यक्त किया।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई हस्तियों और विभिन्न दलों के शीर्ष नेताओं ने शुक्रवार 9 अक्टूबर को केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान (Ram vilas Paswan) के अंतिम दर्शन कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उनका अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ शनिवार को उनके गृह राज्य बिहार की राजधानी पटना में किया जाएगा।

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‘शिवराज एक जेब में 50 करोड़ का तो दूसरी जेब में 50 हजार करोड़ का नारियल रखते हैं, जहां मौका मिलता है फोड़ देते हैं’

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के नेता रामविलास पासवान को उनके आवास पर जाकर श्रद्धांजलि अर्पित की।

खगड़िया में 1946 में जन्मे पासवान का चयन पुलिस सेवा में हो गया था लेकिन उन्होंने अपने मन की सुनी और राजनीति में चले आए। पहली बार 1969 में वह संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी की टिकट पर विधायक निर्वाचित हुए। वह आठ बार लोकसभा के सदस्य चुने गए और कई बार हाजीपुर संसदीय सीट से सबसे ज्यादा वोटों के अंतर से जीतने का रिकॉर्ड अपने नाम किया।

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चिराग पासवान ने ट्वीट कर कहा, ”पापा….अब आप इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन मुझे पता है आप जहां भी हैं हमेशा मेरे साथ हैं। Miss you Papa… बता दें कि रामविलास पासवान, (Ram vilas Paswan) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्‍व वाली एनडीए सरकार में उपभोक्‍ता मामलों तथा खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री मंत्रालय की जिम्‍मेदारी संभाल रहे थे।

 आइये आपको रामविलास पासवान के राजनीतिक सफ़र के बारे में बताते हैं।

  • रामविलास पासवान 1977 में पहली बार सांसद बने। इसके बाद उन्होंने पलटकर नहीं देखा। इसके बाद 1980, 1989, 1996, 1998, 1999, 2004 और 2014 में जीत दर्ज हासिल करने में कामयाब रहे।
  • 1991 के लोकसभा चुनाव में जनता दल के टिकट पर रोसड़ा लोकसभा क्षेत्र से जीत दर्ज की थी। इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए चुनाव में उन्हें हाजीपुर सीट से 1984 और फिर 2009 में हार का सामना करना पड़ा था।
  • पहली बार छह दिसम्बर 89 को वह प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह के मंत्रिपरिषद में श्रम व कल्याण मंत्री बने। इस दौरान वो समाज कल्याण मंत्री थे, जिसके चलते उन्होंने मंडल आयोग की सिफारिशों को देश में लागू करने का काम किया था।
  • इसके चलते ओबीसी समुदाय के 27 फीसदी आरक्षण का लाभ मिला, जिससे देश की राजनीति बदल गई। रामविलास पासवान 1995 में तब केंद्र में मंत्री बने जब एचडी देवेगौड़ा प्रधानमंत्री। देवगौड़ा सरकार में रामविलास पासवान को रेल मंत्रालय का जिम्मा सौंपा गया था।
  • रेल मंत्री के रूप में उन्होंने जून 96 से 13 मार्च 98 तक काम किया। इसके बाद गुजराल सरकार में भी वो रेल मंत्री के पद पर रहे। विश्वनाथ प्रताप सिंह, एचडी देवेगौड़ा, इंद्र कुमार गुजराल, अटल बिहारी वाजपेयी, डॉ मनमोहन सिंह और नरेंद्र मोदी सरकार में पासवान मंत्री रहे हैं।
  • रामविलास पासवान सात बार केंद्र सरकार में में मंत्री बने, इनमें दो बार अटल बिहारी वाजपेयी और दो बार मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में मंत्री रहे । 1989 से लेकर अब तक चंद्रशेखर और वीपी नरसिम्हा राव की सरकार को छोड़कर केंद्र में जिस दल की भी सरकार बनी, उसमें रामविलास पासवान  मंत्री बनना जरूर बने हैं।
  • 2004 में यूपीए की सरकार बनी तो तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पासवान को रसायन व उर्वरक मंत्री बनाया था। मनमोहन सिंह के कार्यकाल में वह मई 2004 से मई 2009 तक मंत्री रहे।
  • इसके बाद वो चुनाव हार गए थे औ यूपीए का साथ छोड़कर 2014 के चुनाव से पहले एनडीए में दोबारा हाथ मिला लिया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहली सरकार में खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री रहे और दोबारा 2019 में भी इसी विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
  • कोरोना काल में देशभर में घर-घर राशन पहुंचाने का काम बाखूबी तरीके से निभाया ताकि कोई भूखा न रह सके। यही नहीं बिना राशन कार्ड वालों को भी अनाज देने का काम किया। उनका पूरा राजनीतिक जीवन दलितों के अधिकारों की लड़ाई में बीता। अब उनके बेटे चिराग पासवान उनकी जगह पार्टी संभाल रहे हैं।
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पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन ने चिराग को लिखा पत्र

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने लोजपा नेता के निधन पर चिराग पासवान को एक पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने कहा, ‘मुझे आपके पिता के निधन के बारे में पता चला। केंद्र सरकार में रामविलास पासवान जी एक अहम दलित चेहरा रहे। 2004 में मैंने यूपीए सरकार का नेतृत्व किया था, जिसका पासवान जी हिस्सा थे, मेरे पास उस समय की बहुत सी यादें हैं। वे जननेता थे और उनकी बहुत प्रसिद्धि थी। वे एक ऐसा नेता थे जो जिसके भी संपर्क में आते थे, वे उनसे प्यार और उनका सम्मान किया करते थे। उनके निधन से देश ने एक महान दलित नेता खो दिया है जो समाज के गरीब और दबे-कुचले वर्ग के लिए हमेशा खड़े रहे। मैं आपके और आपके परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट करता हूं। भगवान आपको ये असीम दुख सहने की क्षमता दे।’

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