न्यूज़ रूम बने पूजा पंडाल तो न्यूज़ एंकर पुजारी

राममंदिर भूमिपूजन: न्यूज़ रूम बने पूजा पंडाल तो न्यूज़ एंकर पुजारी

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5 अगस्त 2020 को आयोध्या पहुंच कर प्रधमानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राममंदिर भूमि पूजन कर मंदिर निर्माण की आधारशिला रख दी है। 9 नंबर 2019 को भारत के उच्चतम न्यायालय ने बरसों पुराने इस विवाद पर अपना फैसलला सुनाते हुए अयोध्या में राममंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त कर दिया था। आयोध्या में राममंदिर भूमि पूजन और मंदिर की आधारशिला रखे जाने के बाद। भाजपा को सत्ता तक लाने वाला ये आंदोलन आज फलीभूत हो गया।

Ram Mandir: अयोध्या पहुंचे पीएम मोदी, राम मंदिर भूमिपूजन शुरू, पढ़िए पूरी कार्यक्रम सूची

देश इस वक़्त एक बड़े आर्थिक संकट से गुज़र रहा है। कोरोनावायरस संक्रमण तूफान की रफ्तार से फैल रहा है। वर्तमान सरकार इस सकंट से लड़ने में पूरी तरह से विफल नज़र आ रही है। कोरोना संक्रमितों के मामले में देश प्रथम स्थान पर पहुंच चुका है। जब 5 अगस्त को देश के प्रधानमंत्री आयोध्या की धरती पर राममंदिर भूमि पूजन और मंदिर की आधारशिला रख रहे हैं, तब बुधवार यानी 5 को ही देश में सैकड़ों-हज़ारो लोग बाढ़ सेे बेघर हैं। सैकड़ों हज़ारों लोग कोरोना के इलाज के लिए दर-दर भटक रहे हैं। दवा,बेड़ और आक्सीजन के अभाव से मर रहे हैं।

अधिकतर न्यूज़ एंकर पंडित बन गए और न्यूज़ रूम पूजा पंडाल

देश का मीडिया राममंदिर भूमि पूजन की तारीख यानी 5 अगस्त को आयोध्या से पल-पल की ख़बरों को लाइव चला रहा है। मोदी कब दिल्ली से निकले। पीएम मोदी ने भगवा कुर्ता पहना। मोदी अब कितने क़दम पैदल चले। कितने सेंटीमीटर गर्दन मोड़ी। लखनऊ से सेना के हेलीकॉप्टर पर सवार होकर आयोध्या पहुंचे। पीएम मोदी ने यहां पूजा की। मोदी इनके दरबार पर सीधे लेट गए। जीवन में शायद मोदी पहली बार ऐसे लेट कर पूजा की है। सभी न्यूज़ रूप पूजा पंडाल में तब्दील हो गए। मंत्र, जाप , हनुमान चालीसा तमाम तरह के धार्मिक पाठ न्यूज़ चैनल पर 5 अगस्त के पहले से ही चालू हो गए। अधिकतर न्यूज़ एंकर पंडित बन गए और न्यूज़ रूप पूजा पंडाल।

Ram Mandir: अयोध्या में भूमिपूजन के लिए कैसी हैं तैयारियां?

मीडिया का मोदी भक्ति में डूब जाना कोई पहली बार नहीं। लगातार कई दिनों तक न्यूज़ चैनलों का पूजा पंडाल में तब्दील हो जाना बहुत ही निराशाजनक लगता है। मीडिया को कोई धर्म-जाति नहीं होता। ऐसा हम पढ़ते और सुनते आए हैं। मगर अब भारतीय मीडिया की 5 अगस्त की रिपोर्टिंग देख कर लगने लगा है कि इस देश की मीडिया का धर्म भी है और जाति भी है। सरकार से सवाल पूछ कर अपने धर्म का पालन करने वाली मीडिया ने सरकार से सवाल न पूछकर सरकार की भक्ति की माला जपने का काम करना शुरू दिया है।

देश के कुछ हिस्से इस वक़्त बाढ़ से तबाह हो चुके हैं

भारत कोरोना की मार के साथ बाढ़ की मार भी झेल रहा है। असम और बिहार में आई बाढ़ ने इतने बड़े पैमाने पर नुक़सान पहुंचाया है, जिसका अभी पूर्ण रूप से आंकलन भी नहीं किया जा सकता। असम और बिहार में बाढ़ की तबाही को देखते हुए यूनिसेफ ने कहा है कि देशभर में 24 लाख बच्चे बाढ़ से प्रभावित हुए हैं और उन्हें तुरंत मदद दिए जाने की ज़रूरत है।

यूनिसेफ ने एक बयान में कहा कि भारत में बिहार, असम, ओडिशा, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, केरल, उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश और पश्चिम बंगाल में 24 लाख बच्चों सहित साठ लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं । यूनिसेफ ने कहा है कि इन क्षेत्रों में बच्चों के समक्ष पैदा चुनौतियों के समाधान के लिए तुरंत मदद, अधिक संसाधन और नए कार्यक्रम चलाने की ज़रूरत है।

बिहार में बाढ़ : 7 लाख 66 हज़ार 7 सौ 26 हेक्टेयर में लगी फसल को हुआ भारी नुक़सान

इसके साथ ही बिहार में बाढ़ ने 14 ज़िलों को बुरी तरह से प्रभावित किया है। आपदा प्रबंधन विभाग से प्राप्त जानकारी के मुताबिक प्रदेश के 14 ज़िलों सीतामढ़ी, शिवहर, सुपौल, किशनगंज, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, गोपालगंज, पूर्वी चंपारण, पश्चिम चंपारण, खगड़िया, सारण, समस्तीपुर, सिवान एवं मधुबनी में 56,53,704 लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। बाढ़ से 13 लोगों की मौत हो चुकी है। इसके साथ ही बिहार में बाढ़ से 7 लाख 66 हज़ार 7 सौ 26 हेक्टेयर में लगी फसल को भारी नुक़सान हुआ है।

असम में आई बाढ़ से 70 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं

बीबीसी हिंदी के अनुसार असम में आई भीषण बाढ़ के कारण अब तक आधिकारिक रूप से 85 लोगों की मौत हुई है। राज्य के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनावाल ने मीडिया से कहा है कि ‘असम में आई बाढ़ से अब तक 70 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं।’

असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की एक ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, असम के कुल 33 में से 24 ज़िले अब भी बाढ़ के पानी में डूबे हुए हैं। आपदा विभाग की रिपोर्ट में बताया गया है कि ‘2,254 गाँव पूरी तरह बाढ़ की चपेट में हैं और सोमवार रात तक 24 लाख 30 हज़ार 502 लोग प्रभावित हुए हैं।

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ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि जब देश में हर तरफ़ तबाही का मंज़र नज़र आ रहा हो। लोग सुविधाओं के अभाव से तड़प-तड़पकर मर रहे हों। कहीं कोई आक्सीजन की कमी से मर रहा, तो कहीं दवाओं की कमी के कारण। कहीं कोरोना मरीज़ों के लिए हास्पिटल में बेड़ नहीं है, तो कहीं हास्पिटल ही नहीं। स्वास्थ सुविधाओं का ख़ुद ही जनाज़ा उठ चुका हो, तो वो क्या ही कर पाएगा ?

मीडिया का इतना शर्मनाक चेहरा पहली बार दिखा

जब देश ऐसी परिस्थितियों से ग़ुज़र रहा हो, तो क्या देश के पीएम को राममंदिर भूमि पूजन कर उसकी आधारशिला में व्यस्त होना चाहिए था ?  आख़िर ऐसी क्या जल्दी थी। इस काम को मोदी सरकार बाद में भी अंजाम दे सकती थी। अब तो सुप्रीम कोर्ट का फैसला भी मंदिर के हक़ मे ही है।

उससे भी ज़्यादा शर्म का विषय ये रहा कि देश की मीडिया ने सरकार से देश में उभरे किसी भी संकट पर सवाल न करने के बजाए राम नाम का जाप जपना शुरू कर दिया। मीडिया ने 5 अगस्त की रिपोर्टिंग में ये बता दिया कि उसका धर्म सरकार से सवाल नहीं बल्कि सरकार की भक्ति ही उसका धर्म है। साथ ही मीडिया ने ये भी बता दिया कि मीडिया की पहचान हिंदू हद्य सम्राट है न की कुछ और।

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इसके साथ ही आपको ये भी बताते चला जाए कि बुधवार यानी पांच अगस्त की सुबह तक भारत में COVID-19 के कुल मामले 19 लाख के पार हो चुके हैं। देश में पिछले 24 घंटों में 52,509 नए कोरोनावायरस केस सामने आए हैं, वहीं 857 मरीजों की मौत हुई है।इसके साथ ही देश में कोरोनावायरस के कुल केस 19,08,254 हो चुके हैं। 24 घंटों में 857 मरीजों की मौत के बाद देश में इस बीमारी से मरने वाले कुल मरीजों की संख्या 39,795 हो चुकी है।

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