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राम मंदिर भूमिपूजन के मुहुर्त को लेकर क्यों हो रहा है विवाद?

राम मंदिर भूमिपूजन
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5 अगस्त को अयोध्या में राममंदिर के भूमिपूजन का कार्यक्रम रखा गया है। प्रधानमंत्री मोदी खुद भूमिपूजन कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे। 5 अगस्त का दिन भाजपा के लिए शुभ रहा है। कश्मीर से धारा 370 हटाने का काम हो या तीन तलाक कानून पास करवाने का, मोदी सरकार के एजेंडे में शामिल सभी कार्य इसी तिथी के हिसाब से किेए गए हैं। अब 5 अगस्त को ही राममंदिर के शिलान्यास का कार्यक्रम तय किया गया है। हिन्दू धर्म के मुताबिक मंदिर का भूमिपूजन विशेष मुहुर्त में किया जाना चाहिए। कई साधु संतों ने राममंदिर के भूमिपूजन के लिए चुने गए मुहुर्त पर सवाल उठाते हुए कहा है कि इस दिन कोई शुभ मुहुर्त नहीं है फिर यह तारीख क्यों चुनी गई।

अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन की तिथि 5 अगस्त को तय की गई है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भूमि पूजन करेंगे। शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने इसे ‘अशुभ घड़ी’ करार दिया है। शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि हमें कोई पद नहीं चाहिए और न ही हम राम मंदिर के ट्रस्टी बनना चाहते हैं। हम केवल यह चाहते हैं कि मंदिर का निर्माण ठीक ढंग से हो और आधारशिला सही समय पर रखी जाए। अभी जो तिथि तय की गई है वह ‘अशुभ घड़ी’ है।

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आचार्य प्रमोद कृष्णन ने भी ट्वीट कर कहा कि ‘मैं ज्योतिषाचार्य नहीं हूं पर इतना अवश्य जानता हूं कि श्री हरि विष्णु शयन काल में मंदिर निमार्ण का मुहूर्त कोई विद्वान ब्राह्मण नहीं निकाल सकता, भगवान श्री राम हमारी आस्था के आधार हैं, इसलिए प्रत्येक कार्य विधि विधान से ‘शास्त्र’ सम्मत होना चाहिए ‘राजनैतिक’ दृष्टिकोण से नहीं।’

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने भी ट्वीट कर कहा कि ‘हमारी आस्था के केंद्र भगवान राम ही हैं! और आज समूचा देश भी राम भरोसे ही चल रहा है। इसीलिए हम सबकी आकांक्षा है कि जल्द से जल्द एक भव्य मंदिर अयोध्या राम जन्म भूमि पर बने और राम लला वहां विराजें। स्व. राजीव गांधी जी भी यही चाहते थे।’ ‘रही बात मुहुर्त की, तो इस देश में 90 प्रतिशत से भी ज्यादा हिंदू ऐसे होंगे, जो मुहूर्त, ग्रह दशा, ज्योतिष, चौघड़िया आदि धार्मिक विज्ञान को मानते हैं। मैं तटस्थ हूं इस बात पर कि 5 अगस्त को शिलान्यास का कोई मुहुर्त नहीं है। ये सीधे-सीधे धार्मिक भावनाओं और मान्यताओं से खिलवाड़ है।’

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