राहुल गांधी प्रियंका गांधी से मिले सचिन पायलट

प्रियंका-राहुल से मिले सचिन पायलट, क्या थमने को है सियासी तूफान?

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राजस्थान में सचिन पायलट की बगावत के बाद अशोक गहलोत की सरकार गिरने के करीब पहुंच चुकी है। राम मंदिर भूमिपूजन कार्यक्रम की वजह से राजस्थान के सत्ता संग्राम से मीडिया की नज़र हट चुकी थी। लेकिन सचिन पायलट की राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से मुलाकात के बाद यह मुद्दा गरमाता नज़र आ रहा है। अशोक गहलोत अपने विधायकों को बचाने के लिए होटलों के चक्कर काट रहे हैं। वहीं उनकी मुश्किल बीएसपी ने भी बढ़ा रखी है। ऐसे में अब गहलोत अपनी सरकार कैसे बचाएंगे इसको लेकर राजनीतिक पंडित भी परेशान नज़र आ रहे हैं।

कांग्रेस में राहुल गाँधी को बर्दाश्त कर पाना कठिन होने  लगा है?

राजस्थान विधानसभा के प्रस्तावित सत्र से कुछ दिनों पहले पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने सोमवार को कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा से मुलाकात की। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, राहुल एवं प्रियंका से इस मुलाकात में पायलट ने विस्तार से अपना पक्ष रखा और फिर पार्टी के दोनों शीर्ष नेताओं ने उनकी चिंताओं के निदान का भरोसा दिलाया। पायलट से मुलाकात से पहले राहुल गांधी और प्रियंका ने करीब डेढ़ घंटे तक बैठक की । बाद में दोनों राहुल गांधी के आवास से निकले और किसी अन्य स्थान पर जाकर पायलट से मिले। यह मुलाकात विधानसभा सत्र आरंभ होने से कुछ दिनों पहले हुई है और अब राजस्थान में कांग्रेस के भीतर पिछले कुछ हफ्तों से चली आ रही उठापठक थमने की उम्मीद है। 

माना जा रहा है कि सचिन पायलट भाजपा में किसी हाल में शामिल नहीं होंगे। भाजपा में भी सचिन पायलट को शामिल करने को लेकर कोई उत्साह नहीं है। वसुंधरा राजे सरीखे नेता पार्टी में अपना प्रतिद्वंदी खड़ा नहीं करना चाहते। राज्य में 2023 में चुनाव है, भाजपा राज्य में दोबारा सत्ता में आने को लेकर आश्वस्त है। ऐसे में पायलट का बीजेपी में आने का मतलब होगा प्रमुख पद पर दावेदारी। पार्टी से बगावत के बाद पायलट ने खुले तौर पर मुख्यमंत्री पद की मांग की थी जिसे पार्टी आलाकमान ने ठुकरा दिया था। भाजपा में जाकर भी पायलट इस पद पर काबिज़ नहीं हो पाएंगे। अगर पायलट दूसरी पार्टी भी खड़ी करें तो तीन साल के भीतर अपने दम पर इतना जनादेश जुटाना उनके बस में नहीं होगा। ऐसे में अगर पायलट समझौता कर कांग्रेस में वापस आ जाएं तो गहलोत के बाद उनका नंबर आना तय होगा और हालिया राजनैतिक संकट भी आसानी से टल जाएगा।

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