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IHM प्रिंसिपल के खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच ठंडे बस्ते में, कब जागेगी वसुंधरा सरकार?

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जयपुर, 9 अगस्त। राजस्थान की राजधानी जयपुर स्थित होटल मैनेजमेंट के प्रिंसिपल के. एस. नारायणन पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों का मामला यूं तो गर्म है लेकिन उनके खिलाफ चल रही जांच की फाइल ठंडे बस्ते में है। मामले की जांच कर रहे ज्वाइंट सेक्रेटरी राजेंद्र विजय से इस बारे में जब हमने बात की तो उन्होंने बताया कि फाइल उन्होंने डायरेक्टर को फॉर्वर्ड कर दी है।

हांलाकि, इस बारे में जब हमने टूरिज्म विभाग के डायरेक्टर प्रदीप कुमार बोरार से बात की तो उन्होंने बताया कि इस बारे में उन्हें अभी कोई जानकारी नहीं है। वह देखकर ही कुछ बता पाएंगे कि इस मामले से जुड़ी कोई फाइल उनके पास पहुंची है या नहीं और उसकी जांच कहां तक पहुंची है।

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बतां दें कि शुरूआत में यह फाइल जांच के लिए पर्यटन विभाग के सचिव कुलदीप रान्का के पास पहुंची थी। रान्का ने प्रिंसपल नारायणन के खिलाफ चल रहे भ्रष्ट्राचार के मामले की जांच का जिम्मा विभाग में पदस्थ ज्वाइंट सेक्रेटरी राजेंद्र विजय को सौंपा था, लेकिन अधिकारियों और बाबू मामले की लीपापोती में ही लगे हुए दिखाई देते है।

मामले के प्रति विभाग की असंवेदनशीलता का अंदाजा भी इसी बात से लगाया जा सकता है कि ज्वाइंट सेक्रेरी राजेंद्र विजय के विभाग से गायब अहम 46 फाइलों को अब तक कोई अता-पता नहीं है और खुद राजेंद्र विजय सवालों के घेरे में हैं।

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प्रिंसिपल के. एस. नारायणन से होटल मैनेजमेंट संस्थान में पढ़ाई करने वाले शिक्षक और छात्र भी उनकी नीतियों से नाखुश है। एक वक्त था जब जयपुर स्थित होटल मैनेजमेंट इंस्टिट्यूट शीर्ष अन्य के मुबाकले शीर्ष पर था लेकिन बीते कुछ सालों में छवि इतनी खराब हो चुकी है कि अस इसका नाम शीर्ष 10 संस्थानों की लिस्ट में भी नहीं है।

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बहरहाल, देखना होगा कि वसुंधरा सरकार इस मामले में कब कड़े निर्देश जारी कर इन अधिकारियों पर के खिलाफ कठोर कदम उठाएगा और  प्रशासन आईआईएचएम की कम होती रैंकिंग की सुधार के लिए कब पहल करेगा? यह अपने आप में एक बड़ा सवाल है।

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