राजस्थान राजनीतिक संकट

राजस्थान राजनीतिक संकट: भारतीय ट्राईबल पार्टी ने खींचे अपने हाथ

Sharing is Important
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

राजस्थान में सचिन पायलट की अशोक गहलोत से नाराज़गी नया राजनीतिक संकट लेकर आई है। देश में कोरोना हर रोज़ नए रिकॉर्ड स्थापित कर रहा है और नेता अपनी राजनीति कर देश का ध्यान महामारी से भटकाने में लगे हैं। सचिन पायलट राजस्थान पुलिस के स्पेशन ऑपरेशंस ग्रुप (एसओजी) द्वारा पूछताछ को लेकर भेजे गए नोटिस के बाद से खफा हैं। जबकि यह नोटिस सिर्फ सचिन को ही नहीं, बल्कि अशोक गहलोत को भी मिला है। सचिन पायलट ने खुली बगावत करते हुए रविवार को मीडिया को बताया कि गहलोत सरकार अल्पमत में है। उन्हें तीस विधायक का समर्थन हासिल है। सचिन पायलट ने यह भी कहा कि कोई अपना घर छोड़ कर नहीं जाना चाहता लेकिन वे ऐसा अपमान नहीं सह पाएंगे। यहां से अब राजस्थान के सरकार अशोक गहलोत अपने विधायकों को समेट कर सरकार बचाने की कवायद में लग जाएंगे और राजस्थान की जनता कोरोना महामारी के बीच अनाथ कर दी जाएगी। कई दिनों तक राजस्थान में विधायक का नंबर गेम चलता रहेगा और कोरोना अपने नंबर बढ़ाता रहेगा।

ALSO READ:  कृषि छात्रों का सरकार पर हमला, 'जेट' एंट्रेंस फ़ीस कम करने की मांग

इस बीच राजस्थान विधानसभा में 2 विधायक वाली ट्राईबल पार्टी ने अपने विधायकों को राजनीतिक संकट के बीच टतस्थ रहने को कहा है। पार्टी की ओर से नोटिस जारी कर कहा गया है कि-


पार्टी की ओर से विधायकों को आदेश जारी किया जाता है कि राज्य में पैदा हुए राजनीतिक संकट के बीच अगर फ्लोर टेस्ट होता है तो आप न तो बीजेपी, न कांग्रेस न गहलोत और न ही पायलट का साथ देंगे। आप तटस्थ रहेंगे। अगर आपकी ओर से पार्टी के आदेश का उल्लंघन हुआ तो आप पर पार्टी अनुशास्नात्मक कर्रावाई करेगी।

-भारतीय ट्राईबल पार्टी

भारतीय ट्राईबल पार्टी अशोक गहलोत सरकार का समर्थन करती रही है। ऐसे में बीटीपी का फ्लोर टेस्ट में अनुपस्थिक होना अशोक गहलोत के लिए झटके की तरह है। आप जानते ही हैं कि जब सरकार गिराने और बनाने का खेल होता है तो एक-एक विधायक कीमती हो जाता है। फिलहाल पायलट ने अपने पत्ते पूरी तरह नहीं खोले हैं। कहा जा रहा है कि प्रियंका गांधी और राहुल गांधी उन्हें मनाने में लगे हुए हैं। पायलट ने यह भी कहा है कि वे बीजेपी में नहीं जाएंगे ऐसे में यह भी माना जा रहा है कि पायलट कांग्रेस से अलग होकर अपनी अलग पार्टी भी बना सकते हैं। खैर कयास लगाने काम न्यूज़ चैनल को करने देते हैं। हम जब पत्ते खुल जाएंगे तो उसी का विश्लेषण करेंगे।

ALSO READ:  मध्य प्रदेश उपचुनाव: पहली बार आमने-सामने होंगे सिंधिया-पायलट, कमलनाथ ने सौंपी अहम जिम्मेदारी

Ground Report के साथ फेसबुकट्विटर और वॉट्सएप के माध्यम से जुड़ सकते हैं और अपनी राय हमें Greport2018@Gmail.Com पर मेल कर सकते हैं।