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जयपुर : ‘ज़मीन समाधि सत्याग्रह’ करने पर क्यों मजबूर हुए किसान ?

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जयपुर के पास स्थित नींदड़ गांव में जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) द्वारा प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण के विरोध में किसानों ने सोमवार को ‘जमीन समाधि सत्याग्रह’ आंदोलन किया। शहर के बाहरी क्षेत्र स्थित नींदड़ गांव के किसान जयपुर विकास प्राधिकरण द्वारा किये जा रहे भूमि अधिग्रहण के संदर्भ में संशोधित भूमि अधिग्रहण अधिनियम के तहत मुआवजा देने की मांग को लेकर ‘जमीन समाधि सत्याग्रह’ आंदोलन कर रहे हैं।

साल 2010 में जयपुर विकास प्राधिकरण ने नींदड़ गांव में आवासीय कॉलोनी बसाने के लिए किसानों की जमीन को अधिग्रहित करने की प्रक्रिया को शुरू किया था। 2013 में जमीन आवंटित कर दी गई। ये कॉलोनी 1300 बीघा जमीन पर प्रस्तावित है।  इसके बाद किसानों ने अपने स्तर पर विरोध प्रदर्शन शुरू किया। साल 2017 में नींदड़ बचाओ समिति ने अधिग्रहण को निरस्त करने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की और आंदोलन की शुरुआत की। 

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वहीं, हाईकोर्ट ने जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को सही ठहराया। इसके बाद किसान सुप्रीम कोर्ट पहुंचे, वहां भी फैसला जेडीए के पक्ष में गया। अधिग्रहण के विरोध में किसानों ने दो अक्तूबर 2017 को पहली बार भूमि समाधि ली। यह आंदोलन 44 दिन तक चला। तब तत्कालीन वसुंधरा सरकार ने आपसी सहमति की बात करते हुए राजीनामा किया था। 

नींदड़ बचाओ किसान संघर्ष समिति के नेता नागेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा कि सरकार की ओर से किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए कोई गंभीर प्रयास नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि रविवार को पांच महिलाओं सहित 21 किसान जमीन समाधि सत्याग्रह मे शामिल हुए।आंदोलनकारी किसान जयपुर विकास प्राधिकरण की एक आवासीय परियोजना के लिए अधिग्रहण की जा रही 1,300 बीघा से अधिक भूमि का विरोध कर रहे है।

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