अर्थव्यवस्था और कोरोना पर रघुराम राजन ने दिए ये 5 सुझाव

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कोरोना वायरस संकट के कारण लगभग एक महीने से देश में लॉकडाउन लागू है। देश में सब बंद है, फैक्ट्रियों पर ताले लगे हुए हैं, लोग घरों के अंदर हैं। इसका असर हमारी अर्थव्यवस्था पर पड़ा है और जीडीपी की रफ्तार थम गई है। अर्थव्यवस्था के सामने खड़ी इन चुनौतियों को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को रिजर्व बैक ऑफ इंडिया के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन से बातचीत की। चर्चा में आरबीआई के पूर्व गवर्नर ने कहा कि इस समय गरीबों की मदद करना जरूरी है। जिसके लिए सरकार के लगभग 65 हजार करोड़ रुपये खर्च होंगे। उन्होंने कहा कि यह रकम देश की 200 लाख करोड़ रुपए की जीडीपी के मुकाबले कुछ भी नहीं है। अगर इससे गरीबों की जान बचती है तो जरूर खर्च करना चाहिए।

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इकोनॉमी पर कोरोना के असर को लेकर राजन ने कहा कि भारत इस मौके का फायदा उठा सकता है। इंडस्ट्री और सप्लाई चेन में खास जगह बनाने का मौका है। राजन ने कहा कि लॉकडाउन लंबे समय तक जारी रखना संभव नहीं है। रघुराम ने कहा कि वैश्विक मंच पर भारत एक बड़ी भूमिका निभा सकता है। भारत नए वर्ल्ड ऑर्डर में अपना स्थान बना सकता है। शक्तिहीन लोगों को शक्तिशाली नेता अच्छा लगता है। हम विभाजित समाज के साथ कहीं नहीं पहुंच सकते। उन्होंने कहा कि आज हमें स्वास्थ्य, नौकरी के लिए अच्छी व्यवस्था करने की आवश्यकता है।

कोरोना और अर्थव्यवस्था पर राजन के 5 सुझाव-

  1. महामारी बड़ा संकट है। हमें इससे निपटने के लिए नियम तोड़ने पड़ेंगे। साथ ही हमारे पास मौजूद संसाधनों का भी ध्यान रखना होगा।
  2. हमारी क्षमताएं सीमित हैं, इसलिए प्राथमिकता तय करना जरूरी है। साथ ही यह तय करने की जरूरत है कि अर्थव्यवस्था को कैसे चलाएं? ताकि जब हम लॉकडाउन से निकलें तो इकोनॉमी अपने आप रफ्तार पकड़ ले।
  3. गरीबों को सीधे खाते में ट्रांसफर, मनरेगा, वृद्धावस्था पेंशन और पीडीएस के जरिए आर्थिक मदद देने की कोशिश होनी चाहिए। भारत के पास गरीबों का पेट भरने के 4 सीमित साधन हैं ।
  4. भारतीय इंडस्ट्री और सप्लाई चेन के लिए दुनिया में जगह बनाने का मौका है। हमें क्वालिटी वाले जॉब क्रिएट करने की जरूरत है ताकि लोग सरकारी नौकरी पर निर्भर नहीं रहें।
  5. सामाजिक तालमेल जरूरी है। बड़ी चुनौतियों के वक्त मतभेद नहीं होने चाहिए। राजन ने कहा कि देश में हर रोज कोरोना के 5 लाख टेस्ट करने की जरूरत है।
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