राहुल गांधी द्वारा विदेशी ज़मीन से भारत को बदनाम करने समेत अन्य राजनीतिक समाचार..

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न्यूज़ डेस्क।। राहुल गांधी ने जर्मनी के एक कॉलेज में मोदी सरकार को कोसा तो राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया। राहुल ने कहा कि भारत की सरकार के पास देश के युवाओं को रोजगार दिलाने के लिए कोई विज़न नहीं है। नोटबंदी और GST को गलत कदम बताते हुए राहुल ने कहा कि भारत सरकार ने लघु और मध्यम उद्योगों को बर्बाद कर दिया।

राहुल गांधी केरल बाढ़ पीड़ितों के लिए फण्ड इकट्ठा करने के लिए जर्मनी और अन्य देशों की यात्रा पर गए हैं। और यहां भारत सरकार ने UAE से मिल रही 700 करोड़ की राहत राशि को ठुकरा दिया है। वहीं सी.पी.एम. प्रमुख सीतराम येचुरी बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए दिल्ली के एक बाज़ार में चंदा इकट्ठा करने निकल पड़े। अलग-अलग पार्टी के अलग-अलग तरीके,अपनी राजनीतिक समझ के हिसाब से आप मतलब निकाल सकते हैं।

इधर भाजपा ने प्रेस कांफ्रेंस कर तुरंत राहुल गांधी पर हमला बोला और कहा कि राहुल गांधी ने विदेशी मंच से भारत को बदनाम किया है। इसपर यशवंत सिन्हा ने ट्वीट कर कहा कि भारत के आंतरिक मुद्दों पर विदेशों में बोलने से भारतीय नेताओं को बचना चाहिए। जैसे हमारे प्रधानमंत्री ने इस नियम को तोड़ा सभी उनका अनुसरण करें।

राहुल गांधी ने कहा कि भारत में दलितों और अल्पसंख्यकों को नौकरी नहीं दी जा रही। उनके साथ भेदभाव हो रहा है। उन्होंने इराक का उदाहरण देते हुए कहा कि सद्दाम हुसैन ने भी एक विशेष समूह को कानून बनाकर नौकरियों और योजनाओं से वंचित कर दिया था जिससे ISIS का जन्म हुआ। अगर भारत में भी ऐसा ही हुआ तो लोग आतंकवाद के साथ जुड़ जाएंगे। इस पर संबित पात्रा ने कहा कि राहुल गांधी आतंकवाद को जस्टिफाई कर रहे हैं।

राहुल गांधी अगर यही सबकुछ भारत में रहकर बोलते तो शायद उसका इतना असर नहीं होता। इसलिए उन्होंने विदेशी मंच से वही सारी बातें दोहराई जिन्हें भारत में महत्व नहीं मिलता। इससे पहले बर्कले में जब राहुल गांधी ने इंटरव्यू दिया था तो कई केंद्रीय मंत्रियों को प्रेस कांफ्रेंस कर जवाब देने आना पड़ा था। रही बात विदेशी ज़मीन पर भारत को बदनाम करने की तो यह काम हमारे देश के कई नेता कर चुके हैं और करते रहते हैं। क्योंकि वे सभी जानते हैं कि विदेशी माइक से बोलने पर आवाज़ ज़्यादा दूर तक पहुंचती है। नरेंद्र मोदी ने दक्षिण कोरिया की यात्रा पर कहा था कि पहले भारतीय होने पर शर्म आती थी जब से उनकी सरकार आयी है लोग गर्व महसूस करते हैं। मेडिसन स्क्वायर से सांप सपेरों का देश कहा हो या ब्रिक्स सम्मेलन में इंडिया के आई को लुढ़काया हो। आज के दौर में मुह से निकली बात को बार-बार रिवाइंड फॉरवर्ड कर सुना जा सकता है। अफसोस!

जीएसटी और नोटबंदी से याद आया लंबी बीमारी के बाद अरुण जेटली ने फिर से कामकाज संभाल लिया है। वे वित्त मंत्रालय और कॉरपोरेट मामलों का कामकाज देखेंगे।

केरल में बाढ़ का पानी उतरने लगा है लोग अपने घरों को लौट रहे हैं, जिनके थोड़े बहोत सलामत है। बाढ़ से हुई बर्बादी का आंकलन लगाया जा रहा है। बताया जा रहा है किसानों को 1000 करोड़ से ज़्यादा का नुकसान हुआ है, साथ ही बीमा कंपनियों की शामत आ गयी है। अब लोग बाढ़ से हुए नुकसान की भरपाई के लिए बीमा कंपनियों का दरवाजा खटखटा रहे हैं, कब तक सिर्फ प्रीमियम भरेंगे। उम्मीद है बाढ़ में ‘ एक्ट ऑफ गॉड’ न होता हो, वार्ना केस भगवान पर भी लगाना होगा। फ़िल्म OH My God तो आपने देखी ही होगी। अन्य खबरों के लिए जुड़े रहिये Groundreport.in के साथ।