1974 में संसद के लिए बनाई थी मूर्ति अब सदस्य बनकर जाएंगे राज्यसभा

Sharing is Important
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

नई दिल्ली, 14 जुलाई। रघुनाथ महापात्रा शिल्पकारी की दुनिया का वो प्रतिष्ठित नाम है, जिनकी बनाई हुई मूर्तियां और कृतियां न सिर्फ भारत बल्कि दुनिया भर में सांस ले रही हैं। 1974 में पद्मश्री, 2001 में पद्मभूषण और 2013 में पद्मविभूषण से सम्मानित हुए रघुनाथ महापात्रा पत्थर पर जीवन उकेरने के लिए जाने जाते हैं।

1974 में उनकी बनाई हुई मूर्ति को संसद भवन के सेंट्रल हॉल में लगाया गया, तब सारा देश उनकी कला से रुबरु हुआ और तब से उनकी ख्याति में दिन प्रतिदिन वृद्धी होती गई।

शिल्पकार के रुप में तब संसद गए रघुनाथ ने यह नहीं सोचा होगा की उन्हे एक दिन संसद का सदस्य बनने का मौका मिलेगा। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने चार सदस्यों को राज्यसभा के लिए मनोनीत किया है जिसमे रघुनाथ महापात्रा का नाम भी शामिल हैं।

24 मार्च 1943 को उड़ीसा के पुरी में शिल्पकार परिवार में रघुनाथ का जन्म हुआ। शिल्पकला उन्हे विरासत में मिली, उनके पूर्वजों ने दुनिया भर में मशहूर कोणार्क और पुरी के मंदिरों को तराशने का काम किया था।

विरासत में मिली इस कला को रघुनाथ ने एकाग्र चित्त के साथ आत्मसात किया। उड़ीसा की परंपरा और संस्कृति को उन्होने अपनी कारीगरी में सहेज कर रखा जिसकी छाप उनकी बनाई हुई मूर्तियों में देखी जा सकती है।

  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
ALSO READ:  पूर्व चीफ जस्टिस रंजन गोगोई जाएंगे राज्यसभा, राममंदिर पर सुनाया था फैसला

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.