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पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे बर्बाद कर रहा किसानों की सैकड़ों बीघा फसल

पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे बर्बाद कर रहा किसानों की सैकड़ों बीघा फसल
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उत्तर-प्रदेश में गाजीपुर से लेकर लखनऊ तक पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे का निर्माण हो रहा है। लेकिन यह निर्माण पूर्वांचल के किसानों के लिए अभिशाप साबित हो रहा है। किसानों के पूरे के पूरे खेत मंगई नदी के पानी में डूब रहे हैं।

पूर्वांचल में मंगई नदी जौनपुर से प्रवेश करती है। इसके बाद आगे यह गाजीपुर से होते हुए बहती है। ऐसे में, नदी अपने साथ उपजाऊ मिट्टी बहाकर लाती है, जिसे खादर मिट्टी कहते हैं। मंगई नदी की उपजाऊ मिट्टी से बने इस भू-भाग को करइल की बखार भी कहा जाता है। लेकिन जब से पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे का निर्माण शुरु हुआ है, इस भू-भाग पर खेती करना मुश्किल हो गया है।

नदी का पानी किसानों के खेतों में बह रहा

पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के निर्माण के लिए गाजीपुर में मंगई नदी पर एक अस्थायी पुलीया बनाई गई है। लेकिन अस्थायी के नाम पर बनाए गए इस पुलीया के पीपे को वहां से हटाया नहीं जा रहा। नतीजा, पीपे के कारण नदी के पानी का बहाव में रुरावट आ रही है। पीपे की रुकावट और दूसरी जगहों पर पानी के बहाव में रुकावट की वजह से नदी का पानी खेतों में बहने लगा है।

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गाजीपुर जिले के मोहम्मदाबाद तहसील में जोगामुसाहिब के नूरपुर मौजे के पास नदी का रास्ता पूरी तरह बाधित हो गया है। इसके अलावा परसा, राजापुर, खेमपुर, सिलाइच, मूर्तजीपुर, रघुवरगंज आदि गांव के खेतों में भी पानी भरने लगा है। और किसानों के सैकड़ों बीघा धान की फसल पानी में समा चुकी है। अगर आगे हालात ऐसे ही रहे तो इस क्षेत्र के बचे-खुचे खेत भी नदी बन जाएंगे।

सैकड़ों किसानों की छिन सकती है रोज़ी-रोटी

क्षेत्र के किसानों का कहना है कि इस बार धान की फसल तो बर्बाद हो ही गई। अगर हालात नहीं सुधरे तो आने वाले सीजन में रबी की बोआई भी नहीं हो पाएगी। किसानों को इस बात की भी आशंका है कि एक्सप्रेस-वे पूरी तरह बन जाने के बाद यह समस्या स्थाई ना हो जाए। अगर ऐसा हुआ तो सैकड़ों किसानों की रोजी-रोटी छिन जाएगी। अब देखना यह है कि नदी की समस्या एक्सप्रेस-वे के बनने तक अस्थायी रहती है या हमेशा के लिए ही किसानों के लिए श्राप बन जाती है

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Written By Jagriti RaiShe is a Journalism Graduate from the Indian Institute of Mass Communication, New Delhi.

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