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गाय की एक ऐसी नस्ल जिसे घर में रखना माना जाता है स्टेटस सिंबल

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नई दिल्ली, 15 जुलाई। हमेशा से ही अच्छी नस्ल के घोड़े, कुत्ते और जानवर पालना रईसी दिखाने का ज़रिया रहा है। आंध्र प्रदेश में एक ऐसी ही गाय लोगों के लिए स्टेटस सिंबल बन गई है। हम बात कर रहे हैं, आंध्र प्रदेश की एक घरेलु नस्ल की गाय की, जिसे पुंगनूर ड्वार्फ काउ के नाम से जाना जाता है।

पुंगनूर ड्वार्फ काउ एक विशेष और दुर्लभ किस्म की गाय है जिसकी उत्पत्ती आंध्र-प्रदेश के चित्तूर जिले के पुंगनूर गांव में हुई। इस गाय की संख्या बहुत कम होने की वजह से अभी इसे नस्ल का दर्जा नहीं दिया गया है। यह गाय अन्य गायों से कई मायनों में अलग है।

आमतौर पर गाय के दूध में 3-3.5 प्रतिशत तक फैट होता है लेकिन पुंगानुर गाय के दूध में 8 प्रतिशत तक फैट होता है, जो भैंस के दूध के बराबर है। इसके कद की ऊंचाई 70 से 90 सेंटी मीटर के बीच होती है और वज़न 115 से 200 किलो के बीच।

दिनभर में केवल 5 किलो चारा खाकर पुंगनूर गाय 5-50 लीटर तक दूध दे सकती है। इस वजह से यह गाय बहुत गर्म इलाके जहां सूखे की स्थिति होती है, वहां भी सूखा चारा खाकर जीवित रह सकती है।

पुंगनूर गाय दुनिया की कुछ सबसे छोटे कद वाली गायों में से एक है। इसके दूध में कई औषधीय गुण भी मौजूद है साथ ही पुंगनूर गाय का धार्मिक महत्तव भी है, इसीलिए तिरुमाला तिरुपति मंदिर में इस नस्ल की करीब 200 गायें हैं, जिनके दूध से बने घी को भगवान वेंकटेश की पूजा-अर्चना के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

कम संख्या में मौजूद होने की वजह से आंध्र प्रदेश के धनी वर्ग के लोगों में पुंगानुर गाय खरीदने की होड़ मची रहती है।

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