अहमदपुर: कौन खा गया प्रसव बाद मिलने वाला महिलाओं का पोषण आहार?

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वसीमुद्दीन | ग्राउंड रिपोर्ट

हाल ही में जारी हुई ग्लोबल हंगर इंडेक्स रिपोर्ट में भारत की रैंकिंग एक विकासशील देश के लिए शर्मसार करने वाली थी। एक ऐसा देश जो विश्वगुरु बनने का सपना देखता हो और कुपोषण से जंग हार रहा हो तो उसे गंभीरता से सोचने की ज़रूरत है। भारत सरकार कुपोषण से लड़ने को कई योजनाएं चलाती हैं, जिसमें महिलाओं और बच्चों को पोषण आहार दिया जाता है, ताकि जन्म के बाद बच्चे और माँ दोनों को ज़रूरी पोषण मिल सके। लेकिन सरकार की इस योजना में सेंध लगा रहे हैं कुछ अधिकारी जो महिलाओं को प्रसव के बाद मिलने वाले लड्डू तक चट कर जाते हैं। ऐसा ही एक मामला सामने आया है मध्यप्रदेश के अहमदपुर से जहां पर प्रसव के बाद महिलाओं को पोषण आहार के रूप में दी जाने वाली सामग्री जैसे दूध, लड्डू प्राथमिक चिकित्सा केंद्र से गायब है। कई किलोमीटर दूर से यहां आने वाली महिलाएं कहती हैं कि पिछले 5 सालों से अहमदपुर के स्वास्थकेंद्र पर पोषण आहार का वितरण नहीं हो रहा। जबकि सरकारी योजना के हिसाब से हर स्वास्थ केंद्र पर प्रसव के बाद महिलाओं को दिया जाने वाला पोषक आहार उपलब्ध होना अनिवार्य है। यहां सवाल पैदा होता है कि क्या इसमें अधिकारियों की मिलीभगत है क्योंकि यहां आने वाली महिलाएं निरंतर इस बारे में शिकायत करती रही हैं जिसपर कोई संज्ञान नहीं लिया गया।

प्रसव के लिए आईं किरण पचोरी का कहना है की प्रसव के बाद खाने के लिए लड्डू दूध जो मिलना चाहिए वह नहीं मिल पा रहा है। बताया जा रहा है कि सन 2014 से प्रसव के लिए आई महिलाओं को अस्पताल में पोषक आहार के रूप में कुछ खाने के लिए नहीं मिल पा रहा है। इस कारण महिलाएं आक्रोशित हैं। वहीं प्रसव के बाद महिलाओं का कहना है कि हम प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में दूरदराज से आते हैं, आने के बाद प्रसव के बाद जो खाद्य सामग्री जैसे लड्डू दूध व अन्य सामग्री जो प्रसव के बाद महिलाओं को मिलना चाहिए, वह हमें नहीं मिल पा रही है, जिसकी वजह से हमें और हमारे घर वालों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। प्रसव के लिए आई हुई महिला ममता कहती हैं कि प्रसव के बाद मुझे खाने को कुछ नहीं दिया, इस बारे में मैं शिकायत भी कर चुकी हूं, फिर भी मुझे पोषण आहार नहीं दिया गया।

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देश में लोक कल्याण के लिए कई सरकारी योजनाएं चलाई जाती हैं, लेकिन उन योजनाओं का ज़मीन पर असर नहीं दिखाई देता। क्योंकि अधिकारियों और ज़िम्मेदार लोगों का भ्रष्ट आचरण पूरे सिस्टम को खोखला कर देता हैं। ज़रूरतमंद की जगह योजनाओं का लाभ लोभी लोग उठाने लगते है। सरकार भी योजना का धन आवंटन कर आश्वस्त हो जाती है। ना कोई जांच बैठती है, न कोई कार्यवाही होती है। और ऐसे ही कुपोषण से जंग आज़ादी के 70 साल बाद तक चलती रहती है।

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