Privatisation of Public sector units for Aatmnirbhar Bharat

निजी क्षेत्र के कंधों पर रखी जाएगी ‘आत्मनिर्भर’ भारत की नींव

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ग्राउंड रिपोर्ट । न्यूज़ डेस्क

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन (Nirmala Sitharaman) ने रविवार को प्रेस कांन्फ्रेंस कर आत्मनिर्भर भारत पैकेज की पांचवी और आखिरी किश्त का ऐलान कर दिया। आज हुए ऐलानों में जो सबसे अधिक चर्चा का विषय रहा वह है सभी क्षेत्रों को प्राईवेट सेक्टर की कंपनियों के लिए खोलना (Privatisation)। इसके साथ ही मनरेगा और स्वास्थ्य पर निवेश बढ़ाने, कंपनी कानून और दिवालिया कानूनों में बड़े बदलावों की घोषणा की गई।

आज हुए ऐलानों की 5 बड़ी बातें-

01

सबकुछ बेचने की तैयारी में सरकार

सरकार नई लोक उपक्रम नीति लाएगी जिसमें सभी सेक्टरों को निजी क्षेत्र की कंपनियों के लिए खोला जाएगा। लोक उपक्रम चुनिंदा रणनीतिक क्षेत्रों में ही कारोबार कर सकेंगे। इन सेक्टरों को नोटिफाई किया जाएगा। 

02

4 से ज़्यादा सार्वजनिक उपक्रम नहीं होंगे

सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के लिए एक नई ‘अनुकूल’ नीति लाई जाएगी। इसके तहत रणनीतिक क्षेत्रों को परिभाषित किया जाएगा, जिनमें चार से अधिक सार्वजनिक उपक्रम नहीं होंगे। वित्त मंत्री ने यहां आर्थिक पैकेज की पांचवीं किस्त की घोषणा करते हुए कहा कि जिन क्षेत्रों में जनहित में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) की मौजूदगी की जरूरत है, उन्हें अधिसूचित किया जाएगा।

03

स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश बढ़ाएगी सरकार

स्वास्थ्य पर सरकारी निवेश बढ़ाया जाएगा। बुनियादी स्वास्थ्य सुविधा ढाँचों को मजबूत बनाया जायेगा। हर जिला अस्पताल में संक्रामक रोगों के लिए विशेष ब्लॉक बनाये जायेंगे। प्रखंड स्तर पर जन स्वास्थ्य प्रयोगशालायें बनाई जाएगी। अनुसंधान के प्रोत्साहित किया जायेगा। राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन का ब्लूप्रिंट तैयार किया जाएगा।

04

राज्य अब अपनी जीडीपी का 5 फीसदी कर्ज ले पाएंगे

राज्यों की कर्ज उठाने की सीमा उनके सकल घरेलू उत्पाद के तीन प्रतिशत से बढ़ाकर 2020-21 में पांच प्रतिशत किया गया, इससे उन्हें 4.28 जाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त धन उपलब्ध हो सकेगा।

05

मनरेगा के लिए 1 लाख करोड़ का बजट

मनरेगा का बजट पहली बार 1 लाख करोड़ रुपए हो गया है। बजट में 60 हजार करोड़ रुपए का प्रवाधन किया गया था और अब सरकार ने 40 हजार करोड़ रुपए अतिरिक्त देने का फैसला किया है। इस तरह एक वित्त वर्ष में पहली बार मनरेगा के लिए 1 लाख करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है। कोरोना वायरस के कारण उत्पन्न स्थिति के मद्देनजर प्रवासी श्रमिकों के अपने-अपने घर लौटने के कारण उन्हें स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मनरेगा के लिए 40 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त आवंटन किया गया।

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