“लब पे आती है दुआ बनके तमन्ना मेरी” गीत गाने पर प्रिंसिपल सस्पेंड

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“सारे जहाँ से अच्छा, हिन्दुस्तां हमारा” जैसे गीत लिखने वाले मशहूर शायर मोहम्मद इक़बाल के गीत उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले के एक सरकारी स्कूल में गाए जाने के कारण स्कूल के प्रधानाध्यापक को निलंबित कर दिया गया है. आरोप है कि प्रार्थना में “लब पे आती है दुआ बनके”.. गीत गवाया जा रहा है. ये निलंबन विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और बजरंग दल की स्थानीय इकाई की शिकायत पर किया गया है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, बीसलपुर के खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) उपेंद्र कुमार की जांच के अनुसार, मंगलवार को निलंबित हेडमास्टर, फुरकान अली (45), ने छात्रों को मोहम्मद इकबाल की 1902 में लिखी गई “लब पे आती है दुआ बन के तमन्ना मेरी” कविता गाने के लिए प्रेरित किया. जांच में पाया गया कि स्कूल में बच्चे सुबह की सभा में अक्सर यही कविता गाया करते थे.

संगठनों का ये आरोप है कि छात्र सुबह की प्रार्थना में ‘लब पे आती है दुआ बनके तमन्ना मेरी’ गीत गा रहे थे. इस कविता ‘लब पे आती है दुआ’ को अल्लामा इकबाल के नाम से प्रसिद्ध मोहम्मद इकबाल ने 1902 में लिखी थी. हालाँकि, इकबाल ने ही ‘सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तान हमारा’ जैसी प्रसिद्ध नज़्म/गीत भी लिखा है जिसे हर हिन्दुस्तानी शौक से गुनगुनाता है. जिसमें ये पंक्ति भी है, “मज़हब नहीं सिखाता, आपस में बैर रखना.”

राज्य सभा सांसद और राजद के राष्ट्रीय प्रवक्ता मनोज झा अपने ट्वीटर अकाउंट से लिखते हैं:

“सुना है एक हेड मास्टर साहेब को सिर्फ इसलिए निलंबित कर दिया गया क्योंकि उन्होंने बच्चों से अल्लामाइकबाल की ‘लब पे आती है ….गाने को कहा. सुनिए और निर्णय करिए क्या ये एक बेहद ही खूबसूरत प्रार्थना नहीं है. ये कहाँ आ गए हम!”

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पीलीभीत के डीएम वैभव श्रीवास्तव ने कहा कि, “प्रधानाध्यापक को निलंबित कर दिया गया क्योंकि  राष्ट्रगान नहीं गाया जा रहा था और छात्रों को धार्मिक प्रार्थना गाने के लिए प्रेरित किया जा रहा था.” उन्होंने कहा, “प्रधानाध्यापक अगर छात्रों को कोई अन्य कविता पढ़ाना चाहते थे, तो उन्हें अनुमति लेनी चाहिए। अगर वह छात्रों से कोई कविता गान कराते हैं और राष्ट्रगान नहीं कराते हैं तो उनके खिलाफ आरोप बनता है.”

हालांकि, प्रधानाध्यापक (निलंबित) फुरकान अली (45) ने आरोपों को खारिज किया है. और कहा है कि, “छात्र लगातार राष्ट्रगान करते हैं. इकबाल की कविता कक्षा एक से आठ तक उर्दू पाठ्यक्रम का हिस्सा है. विहिप और हिंदू युवा वाहिनी कार्यकर्ताओं ने मुझे निकालने की मांग करते हुए स्कूल और कलेक्टरेट के बाहर विरोध किया. मैंने सिर्फ वह कविता गाई है जो सरकारी स्कूल के पाठ्यक्रम का हिस्सा है. मेरे छात्र भी प्रतिदिन सभा के दौरान ‘भारत माता की जय’ जैसे देशभक्ति के नारे लगाते हैं.”

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार को, बीएसए देवेंद्र स्वरूप ने एक आदेश जारी किया, “सोशल मीडिया पर एक वायरल वीडियो के द्वारा यह हमारे संज्ञान में आया है कि प्राथमिक विद्यालय ग्यासपुर में छात्रों को एक अलग प्रार्थना के कराया जा रहा है जो आम तौर पर नहीं होती. स्कूल के प्रधानाध्यापक मोहम्मद फुरकान अली को इसके लिए जिम्मेदार पाया गया है और उन्हें निलंबित कर दिया गया है … “

कवि ‘मोहम्मद इक़बाल’ की पूरी नज़्म जिसपर प्रधानाध्यापक को निलंबित किया गया:

लब पे आती है दुआ बनके तमन्ना मेरी

ज़िन्दगी शमअ की सूरत हो ख़ुदाया मेरी

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दूर दुनिया का मेरे दम अँधेरा हो जाये

हर जगह मेरे चमकने से उजाला हो जाये

हो मेरे दम से यूँ ही मेरे वतन की ज़ीनत

जिस तरह फूल से होती है चमन की ज़ीनत

ज़िन्दगी हो मेरी परवाने की सूरत या रब

इल्म की शमअ से हो मुझको मोहब्बत या रब

हो मेरा काम ग़रीबों की हिमायत करना

दर्द-मंदों से ज़इफ़ों से मोहब्बत करना

मेरे अल्लाह बुराई से बचाना मुझको

नेक जो राह हो उस राह पे चलाना मुझको.

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