Prime Minister’s Research Fellowship Scheme में हुए बड़े बदलाव, जानें खास बातें

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केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने गुरुवार को प्रधानमंत्री रिसर्च फेलोशिप योजना (PMRF) योजना में महत्वपूर्ण संशोधनों की घोषणा की है । उन्होंने बताया कि अब प्रविष्टियों के दो चैनल माध्यम होंगे, जिसमें अभियार्थी सीधे प्रवेश यानी Direct Entry ले सकेंगे और दूसरा होगी Lateral Entry. Lateral Entry उन्हीं छात्रों को मिलेगी जो PMRF द्वारा अनुदान देने वाले संस्थानों में PhD कर रहे हैं।

एचआरडी मंत्री ने बताया कि PMRF देश के विभिन्न उच्च शिक्षण संस्थानों में अनुसंधान की गुणवत्ता में सुधार के लिए बनाई गई है। उन्होंने कहा कि संशोधनों के बाद, किसी भी मान्यता प्राप्त संस्थान / विश्वविद्यालय (IISc / IIT / NIT / IISERs / IIEST / CF IIITs के अलावा) के छात्र फेलोशिप के लिए पात्र हैं। इसके अलावा निशंक ने GATE स्कोर की आवश्यकता को भी घटाकर 750 से घटाकर 750 के साथ 8 या इसके समकक्ष सीजीपीए कर दिया गया है।

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एचआरडी मंत्री ने यह भी बताया कि अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए मंत्रालय में “Research And Innovation Division” के नाम से एक समर्पित डिवीजन बनाया जा रहा है। यह प्रभाग एक निदेशक की अध्यक्षता में होगा जो MHRD के तहत आने वाले विभिन्न संस्थानों के अनुसंधान कार्य का समन्वय करेगा। वहीं बता दें कि पीएम प्रधानमंत्री रिसर्च फेलोशिप 2018-2019 में शुरू की गई थी। इसके तहत हर साल एक हजार छात्रों को फेलोशिप देने की योजना है।

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साल 2019 में 119 छात्र हुए थे चयनित

प्रधानमंत्री रिसर्च फेलोशिप योजना में सफल होने वाले छात्रों को इस फेलोशिप के तहत छात्रों को 80,000 तक की फेलोशिप दी जाती है। इस योजना के तहत छात्रों को पहले दो वर्षों के लिए हर महीने 70,000 की फेलोशिप दी जाती है। तीसरे साल के लिए 75,000 रुपये और चौथे और पांचवे साल में हर महीने 80,000 रुपये की फेलोशिप दी जाती है। केंद्र ने इन फेलोशिप को तीन वर्षों में खर्च करने के लिए 1,650 करोड़ रुपये के आवंटन को मंजूरी दी है।

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