नई शिक्षा नीति

नई शिक्षा नीति में प्राथमिक शिक्षा को लेकर क्या है बदलाव?

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली कैबिनेट बैठक में नई शिक्षा नीति को मंजूरी दी गई। जिसमें मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम शिक्षा मंत्रालय करने, 50% छात्रों के लिए उच्च शिक्षा तक पहुंच और जीडीपी का 6 प्रतिशत खर्च करने का लक्ष्य है । इसकी जानकारी केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर और मानव संसाधन मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने प्रेस वार्ता के दौरान दी।

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प्राथमिक शिक्षा को लेकर बदलाव

  • इस शिक्षा नीति में 10 + 2 पाठ्यक्रम  को खत्म कर दिया गया है। इसकी जगह  5+3+3+4 सिस्टम को लाया जा रहा है। इसके तहत अब स्कूल के पहले 5 साल जिसमें पूर्व-प्राथमिक शिक्षा और प्रथम और द्वित्तीय कक्षा सम्मिलित है।  इसे मूलभूत अवस्था कहा गया जो शिक्षा की नींव तैयार करने का काम करेगा। इसमें पाठ्यक्रम को लचीला, खेलकूद और अन्य गतिविधियों पर आधारित होगा।
  • नई शिक्षा नीति में 8 वर्ष की आयु तक के बच्चों के लिए एक राष्ट्रीय शैक्षणिक पाठ्यक्रम प्रारंभिक बाल देखरेख ढांचा (NCPF ECCE)विकसित किया जाएगा। जिसकी जिम्मेवारी शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण की राष्ट्रीय परिषद (NCERT) की होगी। प्रारंभिक बाल देखरेख ढांचा (ECCE) की सहायता से देश की स्थानीय परंपराएं कला, कहानियां, कविता, खेल और गीत उपयुक्त रूप से शामिल किया जाएगा।
  • बच्चों की शिक्षा गुणवत्ता में सुधार के लिए आंगनवाड़ी शिक्षक और वर्कर को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। ईसीसीई (ECCE) के तहत बच्चों की प्राथमिक शिक्षा के आधार को मजबूत करने के लिए आंगनवाड़ी, प्राथमिक स्कूलों में सह-स्थित आंगनवाड़ी औप प्राथमिक स्कूलों का विस्तार किया जाएगा। जिसका उद्देश्य भौतिक, संज्ञानात्मक, सामाजिक-भावनात्मक-नैतिक विकास, सांस्कृतिक व कलात्मक विकास, और संचार और प्रारंभिक भाषा, साक्षरता और संख्यात्मकता के विकास में इष्टतम परिणामों को प्राप्त करना होगा।
  • पांच वर्ष की उम्र तक शिक्षा से जुड़े विषयों का दायित्व महिला और बाल विकास मंत्रालय के पास रहेगा और उसके बाद एचआरडी यानी शिक्षा मंत्रालय के माध्यम से स्कूल शिक्षा विभाग देखेगा

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