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क्यों हो रही है मध्यप्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग?

President Rule in Madhya Pradesh
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Ground Report | News Desk

मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) से कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य विवेक तनखा (Vivek Tankha) नें राष्ट्रपति (President Rule) रामनाथ कोविंद का ध्यान मध्यप्रदेश सरकार की दयनीय स्थिति की तरफ खींचा है। उन्होंने पत्र में लिखा कि 23 मार्च को शिवराज सिंह चौहान ने शपथ ली वे अकेले 7.5 करोड़ जनसंख्या वाले इस राज्य को संभाल रहे हैं। अब तक उनकी सरकार में मंत्रीमंडल का गठन तक नहीं हो पाया है। देश कोरोनावायरस जैसी गंभीर महामारी से जूझ रहा है और मध्यप्रदेश के पास अपना स्वास्थ्य मंत्री भी नहीं है। स्वास्थ्य सचिव समेत 45 से ज्यादा अधिकारी कोरोना पॉज़िटिव पाए गए हैं। राज्य में स्थिति हाथ से निकलती जा रही है। 7.5 करोड़ लोगों की जान आधी-अधूरी सरकार के भरोसे छोड़ दी गई है। ऐसे में राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिया जाना चाहिए।

राष्ट्रपति को लिखे खत में विवेक तनखा नें लिखा की मध्यप्रदेश की जनता को एक व्यक्ति के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। जनता का हक है कि उन्हें स्वास्थ्य मंत्री मिले। अगर शिवराज सिंह चौहान ऐसा करने में सक्षम नहीं है तो राष्ट्रपति को राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाकर संवैधानिक नियमों का पालन राज्य में करवाना चाहिए। राज्य की जनता को ऐसी महामारी के समय पूर्ण सरकार मिलने का पूरा हक है।

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आपको बता दें कि दिन प्रतिदिन मध्यप्रदेस की स्थिति कोरोनावायरस से बिगड़ती जा रही है। राज्य का इंदौर शहर कोरोना हॉटस्पॉट बन चुका है। इंदौर में 235 मामले अब तक सामने आ चुके हैं यह राज्य का सबसे अधिक प्रभावित जिला है। वहीं राज्य में मरीज़ों की कुल संख्या 500 से ज्यादा हो चुकी है अब तक 40 लोगों की जान कोरोनावायरस के चलते जा चुकी है। कोरोनावायरस से मरने वालों की अगर दर देखी जाए तो मध्यप्रदेश पंजाब के बाद दूसरे नंबर पर है। यह देश में सबसे खराब स्थिति दर्शाता है।

मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार सिंधिया समेत 22 विधायकों के स्तीफे की वजह से गिर गई थी जिसके बाद शिवराज सिंह चौहान नें 23 मार्च को मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री के रुप में शपथ ली। देश में कोरोना की वजह से हुए लॉकडाउन की वजह से उनका मंत्रीमंडल अब तक शपथ नहीं ले सका है। अकेले शिवराज सिंह चौहान पूरी सरकार चला रहे हैं।

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