प्री वेडिंग शूट के बाद टूट जाती हैं शादियां इसलिए लगाया गया प्रतिबंध

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ग्राउंड रिपोर्ट | न्यूज़ डेस्क

गुजराती समाज और भोपाल की जैन समाज नें प्री वेडिंग शूट, महिला संगीत में कोरियोग्राफर बुलाने और बारात में महिलाओं के डांस करने पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसके पीछे उनका तर्क है कि इससे समाज में कुरीतियों का जन्म हो रहा है साथ ही समाज पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है।

जैन समाज का कहना है कि बाहर से कोरियोग्राफर बुलाना ठीक नहीं घर की महिलाएं ही संगीत में डांस सीखें । बाहर से कोरियोग्राफर आकर घर की महिलाओं को छुए यह ठीक नहीं। प्री वेडिंग शूट भी पश्चिमी सभ्यता का चलन है, शादी के पहले लड़का लड़की का मिलना और इस तरह वीडियो बनवाना भारतीय सभ्यता के खिलाफ है। जैन समाज का कहना है कि सभी को यह नियम पालन करना होगा, जो नहीं करेगा उसे समाज से अलग थलग कर दिया जाएगा। सिंधी समाज ने भी ऐसा ही ड्राफ्ट तैयार कर लिया है बस लागू करवाना है।

समाज को सुधारने की दिशा में लिया गया यह कदम युवाओं के गले नहीं उतरता। युवतियां कहती हैं कि यह हमारी आज़ादी पर लगाम लगाने की कोशिश है। 21वी सदी में इतनी पिछड़ी हुई सोच और ऊपर से ऐसा नियम बनाना उचित नहीं है। खराबी लोगों की सोच में है और उसे कोई प्रतिबंध सुधार नहीं सकता।

प्री वेडिंग शूट शादी के पहले कराया जाने वाला एक फोटोशूट होता है जिसमें दूल्हा दुल्हन अच्छी सी लोकेशन पर जाकर विडियोशूट करवाते हैं। जिसे एडिट करके बिल्कुल फिल्मी अंदाज में तैयार किया जाता है। युवा इसका समर्थन करते हैं क्योंकि इस दौरान लड़का और लड़की के बीच अंडरस्टैंडिंग बढ़ जाती है। जैन समाज और गुजराती समाज का कहना है कि कई बार प्री वेडिंग शूट के बाद शादियां टूट जाती हैं।

शादी में संगीत को फ़िल्मी रंग देने के लिए कोरियोग्राफर बुलाए जाते हैं जो पूरे घर के सदस्यों को डांस सिखाता है। लेकिन समाज का कहना है कि कोरियोग्राफर के आने से महिलाओं की सुरक्षा खतरे में पड़ जाती है। इसे अश्लील बताया गया है।

समाज के बड़े इस फैसले का स्वागत कर रहे हैं तो युवा जिनकी शादी होनी है इस फैसले के खिलाफ नज़र आ रहे हैं।