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मालेगांव धमाकों की आरोपी सांसद प्रज्ञा ठाकुर रक्षा मामलों की संसदीय समिति के लिए नामित

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Ground Report | Newsdesk

मालेगांव विस्फोट मामले की आरोपी और भोपाल से भाजपा सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को रक्षा मंत्रालय की संसदीय सलाहकार समिति में बतौर सदस्य शामिल किया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रक्षा मंत्रालय की संसदीय सलाहकार समिति में कुल 21 सदस्य हैं जिनमें अब साध्वी प्रज्ञा का नाम भी जुड़ गया है। इस समिति के प्रमुख रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह हैं। इस समिति में सरकार ने विपक्ष के कई नेताओं को शामिल किया है। जिसमें शरद पवार और फारूख अब्दुल्ला प्रमुख हैं।

लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान मालेगांव विस्फोट मामले की आरोपी भाजपा सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को देशभक्त बताया था। इस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि इस बयान के लिए वे प्रज्ञा सिंह ठाकुर को कभी भी मन से माफ नहीं कर पाएंगे।

कांग्रेस नेता जयवीर शेरगिल ने ट्वीट किया कि भाजपा सरकार ने राष्ट्रवाद को नया मॉडल दिया है, बम ब्लास्ट मामले में ट्रायल पर चल रहीं नेता को डिफेंस मामलों की कमेटी में शामिल किया गया। चिंता की कोई बात नहीं, भारत माता की जय। उन्होंने लिखा कि कुछ महीनों पहले पीएम ने ‘मन से माफ ना करने’ की बात कही थी, लेकिन अब संदेश साफ है कि नाथूराम गोडसे के भक्तों के अच्छे दिन आ गए हैं।

इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के अनुसार मालेगांव विस्फोट मामले में प्रज्ञा ठाकुर को अप्रैल 2017 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य कारणों के चलते जमानत दे दी थी। नासिक जिले के मालेगांव में भिकू चौक के निकट 29 सितंबर 2008 को हुए बम विस्फोट में छह लोगों की मौत हुई थी और 101 से अधिक घायल हो गए थे। इस मामले में उनके अलावा लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित और छह अन्य आरोपी हैं।

कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट कर कहा, ‘यह देश का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि आतंक फैलाने का आरोप झेल रही सांसद को रक्षा संबंधी समिति का सदस्य बना दिया।’ उन्होंने प्रधानमंत्री पर कटाक्ष करते हुए कहा कि मोदी जी इन्हें ‘मन से माफ नहीं कर पाए।’ लेकिन देश की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर जिम्मेदारी दे दी। इसीलिए तो मोदी है तो मुमकिन है।

फिलहाल सांसद के खिलाफ गैरकानून गतिविधि (निवारक) अधिनियम (यूएपीए) के तहत कई धाराओं में सुनवाई चल रही है। इस मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने मीडिया रिपोर्टिंग पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। हालांकि, एक विशेष अदालत ने उसके आवेदन को खारिज कर दिया था।

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