यूपी पुलिस ने तीन साल में किए 6,476 एनकाउंटर्स, मरने वालों में सबसे ज़्यादा मुस्लिम : रिपोर्ट

यूपी पुलिस ने तीन साल में किए 6,476 एनकाउंटर्स, मरने वालों में सबसे ज़्यादा मुस्लिम : रिपोर्ट

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उत्तर प्रदेश पुलिस विकास दूबे के एनकाउंटर के बाद से सवालों के घेरे में है। यूपी में पिछले तीन सालों में हुए एनकाउंटर के रिकॉर्ड सामने आए हैं, जिन्हे देखने के बाद आप चौक सकते हैं। यूपी पुलिस के उन रिकॉर्ड में सबसे अधिक मरने वाले मुस्लिम वर्ग के लोग शामिल है।

रिपोर्ट में दिये गए डेटा के अनुसार, 6,476 से अधिक मुठभेड़ों में मारे गए 125 व्यक्तियों में से लगभग 47 लोग मुस्लिम है। इन एनकाउंटर्स में अब तक 13 पुलिसकर्मियों की मौत हो चुकी है और लगभग 940 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। इनमें से अधिकांश मुठभेड़ पश्चिमी यूपी से जुड़े मामलों में हुई हैं। जिनमें शामली, अलीगढ़, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर शामिल हैं। पुलिस रिकॉर्ड से यह भी पता चला कि इन मुठभेड़ों में 13,837 लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जिसमें 2,419 आरोपी घायल भी हुए हैं।

पुलिस ने पिछले तीन सालों में 6,476 एनकाउंटर किए हैं, जिनमें मारे गए 37 प्रतिशत लोग मुस्लिम थे। यूपी में अल्पसंख्यक समुदाय की आबादी मात्र 19% है।2020 में उत्तर प्रदेश पुलिस ने अबतक एनकाउंटर में 21 लोगों को मार गिराया है। गैंगस्टर विकास दुबे से जुड़े तीन मामलों के अलावा मरने वाले अन्य आरोपी मुजफ्फरनगर, अलीगढ़, बहराइच, मेरठ, बरेली, वाराणसी और बस्ती के थे।

हिंदू-मुस्लिम अगर भाई-भाई हैं तो कहने की जरूरत नहीं, नहीं हैं तो कहने से क्या फर्क पड़ेगा?

पिछले कुछ समय से उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्य प्रणाली सवालों के घेरे में रही है। पुलिस पर फेक एनकाउंटर के आरोप लगते रहे हैं। यूपी पुलिस पर आरोप लगते रहे हैं कि पुलिस ख़ासकर अल्पसंखक वर्ग को निशाना बनाती रही है। लोगों का कहना है कि योगी सरकार की ‘ठोको नीति’ क़ानून व्यवस्था और न्याय प्रणाली पर एक तमाचा है।

हालही में देश भर में CAA-NRC को लेकर हुए प्रदर्शनों के दौरान सबसे अधिक प्रदर्शनकारियों की मौत उत्तर प्रदेश में हुई थी। यूपी के कई शहरों में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर सीधी गोलियां चलाईं थी। पुलिस की इस फायरिंग में 19 लोगों की जान चली गई थी।

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