Home » कवि Manglesh Dabral का निधन, बुझ गया ‘पहाड़ का लालटेन’

कवि Manglesh Dabral का निधन, बुझ गया ‘पहाड़ का लालटेन’

Sharing is Important
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता और हिंदी भाषा के प्रख्यात लेखक एवं कवि मंगलेश डबराल (Manglesh Dabral) का बुधवार को निधन हो गया है। पिछले कई दिनों से बीमार चल रहे कवि मंगलेश डबराल का कार्डियक अरेस्ट की वजह से निधन हो गया है।

गाजियाबाद के एक निजी अस्‍पताल में उनका इलाज चल रहा था लेकिन हालत बिगड़ने पर उन्‍हें एम्स में भर्ती कराया गया था लेकिन कार्डियक अरेस्ट पड़ने की वजह से उन्होंने दम तोड़ दिया।

”Too Much Democracy” : क्या लोकतंत्र बनता जा रहा है मोदी सरकार के रास्ते का रोड़ा?

मंगलेश डबराल समकालीन हिन्दी कवियों में सबसे चर्चित नाम हैं। मूलरूप से उत्‍तराखंड के रहने वाले मंगलेश का जन्‍म 14 मई 1949 को टिहरी गढ़वाल, के काफलपानी गांव में हुआ था। उनकी शिक्षा-दीक्षा देहरादून में ही हुई थी।

READ:  ग्रामीण लड़कियों की आजादी की डोर बनी फुटबॉल

दिल्‍ली में कई जगह काम करने के बाद मंगलेश डबराल ने मध्‍य प्रदेश की और रूख किया और भोपाल स्थित मध्यप्रदेश कला परिषद्, भारत भवन से प्रकाशित होने वाले साहित्यिक त्रैमासिक पूर्वाग्रह में सहायक संपादक रहे।

Rahat Indori: मशहरू शायर राहत इंदौरी का कार्डियक अरेस्ट से निधन

डबराल लखनऊ और इलाहाबाद से प्रकाशित होने वाले अमृत प्रभात में भी काम कर चुके थे। वर्ष 1963 में उन्‍होंने जनसत्ता में साहित्य संपादक की भूमिका निभाई। इसके अलावा उन्होंने सहारा समय में संपादन किया था।

मंगलेश डबराल के पांच काव्य संग्रह (पहाड़ पर लालटेन, घर का रास्ता, हम जो देखते हैं, आवाज भी एक जगह है और नये युग में शत्रु) चर्चा का केंद्र थे।

स्वामी अग्निवेश का निधन, कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के लिए छेड़ा था आंदोलन

READ:  Dussehra 2021: जब रावण की जगह दहन किया मोदी-अडानी-अंबानी का पुतला, देखें वीडियो

Ground Report के साथ फेसबुकट्विटर और वॉट्सएप के माध्यम से जुड़ सकते हैं और अपनी राय हमें Greport2018@Gmail.Com पर मेल कर सकते हैं।