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गुलाबी कीट की दहशत से सहमा किसान और सिहरी सरकार

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न्यूज़ डेस्क।। महाराष्ट्र में खरीफ के सीज़न में मुख्य तौर पर कपास की खेती की जाती है और इसमें 99 प्रतिशत हिस्सा बीटी कॉटन का होता है। हर साल सूखे की मार झेलने वाले विदर्भ में भी कपास की खेती किसानों के लिए आय का एक अच्छा ज़रिया है। मॉनसून की बारिश जारी है और किसान कपास की बोवनी के लिए तैयार हैं, लेकिन उन्हे इस बार पिछले साल की तरह गुलाबी कीट से होने वाले नुकसान का भय सता रहा है। पिछले साल महाराष्ट्र में कपास की 80 प्रतिशत फसल इस गुलाबी कीट की वजह से खराब हो गई थी।

2016-17 में 1 एकड़ ज़मीन से जो किसान 17 क्विंटल कपास पैदा कर लेता था, वह 2017-18 में 2 एकड़ ज़मीन पर केवल 7 क्विंटल कपास ही पैदा कर पाया। 2003 में जब किसानों नेबीटी कॉटन उगाना शुरु किया तो कपास की खेती में क्रांतिकारी बदलाव हुआ। बीटी तकनीक से कपास की एक ऐसी किस्म तैयार की गई जिसमें सभी प्रकार के कीट पतंगो से लड़ने की क्षमता थी। बीटी कॉटन खेतों में लगाने से किसानों को सभी प्रकार के कीटनाशकों के प्रयोग से मुक्ति मिल गई थी, और पैदावार में भी रिकॉर्ड बढ़ोतरी हो गई। कम पानी औरकम देखरेख में बीटी कॉटन ने किसानों को अच्छा मुनाफा दिया। लेकिन यह बीटी कॉटन गुलाबी कीट से हार गया और किसान वापस 2003 के पहले वाले दौर में पहुंच गया जहां उसे फसलको इस कीट से बचाने के लिए कीटनाशकों का प्रयोग करना पड़ता था। महाराष्ट्र में पिछले साल कीटनाशक के ज़हर से 45 किसानों की मौत हो गई और 1000 से ज़्यादा किसान और कामगार बीमार हो गए।

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जनवरी 2018 में सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ कॉटन रिसर्च द्वार जारी रिपोर्ट में कहा गया की मध्यप्रदेश, गुजरात और महाराष्ट में कपास पर लगने वाला गुलाबी कीट जो 2010 में 5.17 प्रतिशत था 2017 में बढ़कर 73.82 फीसदी हो गया। कहा जा रहा है अगर जल्द इस गुलाबी कीट को नहीं रोका गया तो यह भारत की कॉटन इंडस्ट्री को पूरी तरह बर्बाद कर देगा। दुनिया में 14 से ज़्यादा देश बीटी कॉटन की खेती करते हैं, लेकिन वहां यह समस्या नहीं है क्योंकि उनके पास बेहतर कीट प्रबंधन प्रणाली है। 20 साल तक भारतीय कॉटन सेक्टर को जिस बीटी कॉटन ने विकास की बुलंदियों पर पहुंचाया वही बीटी कॉटन आज एक गुलाबी कीट के सामने घुटने टेक चुका है। कृषि वैज्ञानिकों के पास फिलहाल इसका कोई जवाब नहीं है और न ही सरकार के पास इस समस्या से निपटने का कोई प्लान। फसल खराब होने के बाद बंटने वाला मुआवज़ा भी किसानों तक नहीं पहुंचा। वो इस आस में बैठा है कि कोई आएगा और उन्हे राह दिखाएगा। अगर इस साल भी यह कीट फसल पर लगा तो यह सिर्फ फसल ही नहीं खाएगा बल्कि साथ में किसान को भी खा जाएगा। कर्ज़ के बोझ में दबा किसान और कर्ज़ में डूब जाएगा। तमाम गुणा भाग कर किसान का कर्ज़ माफ करने वाली फडणवीस सरकार के सामने दोबारा कर्ज़ माफी की स्थिति खड़ी हो जाएगी।

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SOURCE- indiaspend.com