Lucknow : ‘अब कूड़ा उठेगा या मेरी लाश उठेगी’ : पत्रकार रहमान सैफ़ी

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Ground Report | Nehal Rizvi

2014 में केंद्र की सत्ता में आने के बाद मोदी सरकार ने ‘स्वच्छ भारत अभियान’ का प्रचार इतनी ज़ोर-शोर से करना शुरू किया था मानों पांच साल में ही पूरा देश स्वच्छ हो जाएगा।  

कूड़े के ढ़ेर पर बैठकर धरना देते हुए समाजसेवक रहमान सैफ़ी

स्वच्छ भारत मिशन को शुरू हुए पांच साल पूरे हो चुके हैं। स्वच्छता से जुड़ी पुरानी योजनाओं को फिर नए टारगेट के साथ आगे बढ़ाया गया है। केंद्र सरकार ने साल 2019 तक पूरे भारत को स्वच्छ करने का टारगेट रखा था। इसमें सभी लोगों को पर्सनल और सामुदायिक शौचालय की सुविधा देना शामिल है। पांच साल बीत जाने के बाद अगर इस ‘स्वच्छ भारत अभियान’ के तहत देश में अगर कुछ साफ़ हुआ है तो इस अभियान के नाम पर महज़ जनता का पैसा।

उत्तर-प्रदेश के सीएम योगी भी ‘स्वच्छ भारत अभियान’ के प्रचार-प्रसार में कोई कमी नहीं छोड़ते। मगर यूपी में इस अभियान की ज़मीनी हक़ीक़त क्या है, उसका अंदाज़ा यूपी की राजधानी लखनऊ में जाकर ही पता चलता है। हां, वो अलग बात है कि मंत्रियों के निवास और विधान-सभाओं या किसी बड़े अधिकारी के निवास के आस-पास की सफ़ाई को देख कर आप ‘स्वच्छ भारत अभियान’ की ब्रंडिग के जाल में फंस जाएं।

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ शहर के डालीगंज के इरादतनगर रेलवे पुल के नीचे बनी छत्ते वाली गली के डंपिंग एरिया में पड़ने वाले कूड़े और एरिया में फैलती हुई गंदगी को लेकर समाजसेवक वा पत्रकार ए.आर. रहमान सैफी ने कूड़े के ढ़ेर में बैठकर, यह कहते हुए धरना शुरू कर दिया कि, ‘अब कूड़ा उठेगा या मेरी लाश’। सैफी एक समाज सेवक भी है। जो हमेशा दूसरों की मदद के लिय तैयार रहते हैं। पिछले कुछ वर्षों से लगातार ग़रीबों की मदद करते आ रहे हैं।

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सैफ़ी पिछले काफ़ी समय से डालीगंज एरिया में छत्ते वाली गली की गंदगी को लेकर आवाज़ उठाते रहे हैं। मगर सरकार और लखनऊ नगर-निगम ने ‘स्वच्छ भारत-स्वचछ यूपी’ के ढ़ोल तो बहुत पीटे मगर ज़मीन पर कुछ भी नहीं। सैफ़ी ने लोगों की समस्या को समझा। हिम्मत और साहस से नगर-निगम के दावों की पोल खोलकर रख दी। यूपी की राजधानी में हर तरफ़ ऐसी ही समस्या देखने को मिलती है। अगर लोगों में सैफ़ी जैसा ही साहस और हिम्मत पैदा हो जाए तो हर शहर के नगर-निगम का काम सही ढ़ंग से होना चालू हो जाए।

सैफ़ी ने बताया कि, “डालीगंज छत्ते की गंदगी वहां रह रहे लोगों को चेता रही है कि जल्द ही बड़ी बीमारियां अपनी चपेट मे लेने को आतुर हैं। मैं बचपन से देखता आ रहा हूँ। यहाँ आस-पड़ोस वालों को कितनी परेशानी हो रही है। यहां तक नगर निगम और पुलिस की जीप भी उन नालों मे फंस चुकी थी। और रोड मे खुदी गड्ढों के कारण कई लोगों को गम्भीर चोटें भी लग चुकी है।

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मेरे द्वारा 11 महीने लगातार ज़मीनी स्तर पर व सोशल मीडिया पर अभियान चलाने के परिणामस्वरूप छत्ते का नाला जो गहरे एवं गंदे पानी का जलाशय बना हुआ था, अब उसको पत्थरों से ढंक दिया गया है। किन्तु अभी भी कूड़ा ना हटने के कारण गंदगी आज भी मौजूद है। डर है कि आने वाले दिनों मे संक्रामक बीमारियां भयावह रूप से बस्ती को अपनी चपेट मे ना ले लें।

यहां का कूड़ा हटना इसलिए भी ज़रूरी है क्योंकि एक रास्ता पश्चिम दिशा की ओर मोहन मीकिन वा सीतापुर रोड को जाता है और पूर्वी दिशा डालीगंज स्टेशन, सबजीमंडी, कब्रिस्तान और हजरगंज की ओर निकलता है। मैं, ए आर रहमान सैफी, एक आज़ाद पत्रकार और समाजसेवक हूँ। मै बचपन से ही संघर्ष कर इमानदारी से लोगों की सहायता करता आया हूँ। ज़मीनी संघर्ष व सोशल मीडिया पर छत्ते का काम करते समय आगाह किया था अगर डालीगंज छत्ते का काम ना किया तो यकीनन मै उसी कूड़े पर बैठ कर अनशन शुरू कर दूंगा।”

इसी को लेकर सैफ़ी उसी कूड़े के ढ़ेर में जाकर बैठ गए औऱ धरना शुरू कर दिया। सैफ़ी का कहना था कि- जब तक उनको लिखित में नहीं दिया जाता कि यह कूड़ाघर और गंदगी की समस्या का पूर्ण निदान नहीं होगा वो कूडे के ढ़ेर से नहीं हटने वाले।

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मामला सूबे की राजधानी का था। योगी का आधिकारिक शहर और सूबे का सियासी केंद्र। मौक़े पर हज़रतगंज थाने की पुलिस और नगर-निगम के अधिकारियों ने पहुंचकर सैफ़ी को समझाने की कोशिश की मगर सैफी हटने को तैयार नहीं थे। अधिकारियों के काफ़ी समझाने के बाद जब सैफ़ी को नगर-निगम के अधिकारियों ने लिखित में दिया तब सैफ़ी ने अपना धरना समाप्त किया।

अधिकारियों ने सैफ़ी को भरोसा दिलाया है कि उनकी बात सुनी जाएगी और जल्द ही डालीगंज छत्ते में डंमपिंग की समस्या का निदान किया जाएगा। 21 नंवबर को नगर-निगम के अधिकारियों ने एक मीटिंग का आयोजन कर सैफ़ी को बुलाया है। जहां पर उनकी मांगों को विस्तार से सुनकर उसके निवारण का रास्ता निकाला जाएगा।