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सेंट्रल विस्टा प्रोजक्ट के खिलाफ याचिका करने वालों पर लगा एक लाख रूपए जुरमाना

Central Vista Project के खिलाफ याचिका करने वालों पर लगा एक लाख रूपए जुरमाना
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Ground Report | News Desk | Central Vista | दिल्ली हाई कोर्ट में सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के निर्माण कार्य पर रोक लगाने वाली याचिका को खारिज करने के बाद अब सुप्रीम कोर्ट ने भी उच्च न्यायालय के फैसले का समर्थन किया है। उच्च न्यायालय में दायर हुई पीआईएल को खारिज करते हुए बेफिज़ूल और प्रेरित करार दिया।

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दिल्ली उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता अन्या मल्होत्रा और इतिहासकार सोहेल हाशमी पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है और कहा है की ये प्रोजेक्ट राष्ट्रीय महत्वता का है। सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा की पीआईएल दाखिल करने वालो ने सेंट्रल विस्टा (Central Vista) पर बड़ा चयनात्मक फैसला किया और बाकी जगहों पर इसी प्रकार के चल रहे निर्माणाधीन कार्यों के बारे में शोध नहीं किया। जज एएम खानविलकर की अगुवाई में तीन जज वाली बेंच ने बयान दिया की “याचिकाकर्ता को ऐसी पीआईएल उच्च न्यायलय के समक्ष रखनी ही नहीं चाहिए थी, संदिग्ध पीआईएल ने हमारे सिस्टम को समस्याएँ दी हैं। जनहित याचिका की अपनी पवित्रता है और यह हम सभी के लिए है। “

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केंद्र ने दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया था कि निर्माण स्थल पर रहने वाले कर्मियों को सभी सुविधाएं दी गई हैं और कोविड -19 प्रोटोकॉल का पालन किया जा रहा है। सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट में एक नया त्रिकोणीय संसद भवन, प्रधानमंत्री और उपराष्ट्रपति के लिए नया घर, नए ऑफिस और सारे मंत्रालयों के काम के लिए नया केंद्रीय सचिवालय। इस प्रोजेक्ट के तहत राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट तक तीन किलोमीटर लंबे राजपथ को भी नए तौर से तैयार किया जायेगा।

सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट (Central Vista Project) की 2024 तक पूरी तरह बन जाने की उम्मीदें हैं। प्रोजेक्ट के मुख्य सलाहकार के अनुसार सेंट्रल विस्टा का निर्माण कुछ इस प्रकार हो रहा है जिससे आने वाले समय में बढ़ते ट्रैफिक की समस्या से भी छुटकारा मिलें।

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