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Delhi Air Pollution: पीपल बाबा ने बताया Pollution का Solution, समझें खास बातें

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Delhi Air Pollution: दिल्ली में सर्दियों, दिवाली के पटाखे और पराली जलाने के बाद स्मोग की समस्या काफी बढ़ जाती है। सरकार तत्कालीन तौर पर अनेकों समाधान पेश करती हैं | विगत सालों में ओड इवन (Odd Even) की चर्चा  काफी रही थी इस साल रेड लाइट पर बत्ती बंद करने का अभियान  “युद्ध प्रदूषण के विरुद्ध” काफी चर्चे में है | राष्ट्रीय हरित न्याधिकरण (NGT) के द्वारा दीवाली में  पटाखे न जलाने का आदेश दिया गया था | प्रदूषण (Delhi Air Pollution) जैसे ज्वलंत मुद्दे के स्थाई समाधान के लिए दिवाली के तुरंत बाद पी आर एस दिल्ली की तरफ से आयोजित किये गए जनरेशन नेक्स्ट आईडिया आइडिया सीरिज के वॉल्यूम -10 का (Delhi Air Pollution)  आयोजन किया गया | इसमें देश के महत्वपूर्ण पर्यावरण कर्मी पीपल बाबा मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए | गौरतलब है कि यह आयोजन पी आर सोसाइटी दिल्ली के तत्वावधान में किया जाता है इसमें हमेशा विभिन्न क्षेत्रों के नामी हस्तियों को आमंत्रित किया जाता है | कोरोना काल की सबसे बड़ी उपलब्धी यह रही है कि  पी आर सोसाइटी के  द्वारा आयोजित किये जा रहे इस  ज़ूम मीटिंग के माध्यम से देश के हर हिस्से से लोग जुड़कर हर क्षेत्र में होने वाली नई नई चीजों को सीखते हैं |

केवल प्रकाश संश्लेषण ही वायु प्रदूषण का दीर्घकालिक समाधान है: पीपल बाबा
दीवाली के बाद  दिल्ली पीआर सोसाइटी ने वर्चुअल कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया, जो इस बात पर केंद्रित था कि हम सब मिल कर पेड़ों की संख्या  कैसे बढ़ा सकते हैं। इस सम्मेलन के मुख्य वक्ता देश के नामी पर्यावरणकर्मी   श्री स्वामी प्रेम परिवर्तन   थे जिन्हें पीपल बाबा के नाम से भी जाना जाता है। सरकार, उद्यमियों, वरिष्ठ जनसंपर्क पेशेवरों व्यवसायियों, गैर सरकारी संगठन के लोगों ने इस सम्मेलन में भाग लिया। देश दो करोड़ से ज्यादे पेड़ लगा चुके पीपल बाबा नें जोर देते हुआ कहा कि पौधे लगेंगे तो ही प्रकाश संश्लेषण बढ़ेगा और प्रदूषण से मुक्ति मिलेगी अन्यथा धरती समस्याओं के दलदल में फसती जाएगी |

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चर्चा में शामिल  लोगों ने सवाल पूछते हुए कहा कि अब  सर्दियां ज्यादा ठंडी क्यों नहीं होती हैं ?  जैसी वे अतीत में हुआ करती थीं ? जवाब में पीपल बाबा ने कहा, यह मुख्य रूप से हरे भरे स्थानों के कारण है जो दिन-प्रतिदिन कम हो रहे हैं और पेड़ों के  कम होने के वजह से  कार्बन स्तर तेजी से बढ़ रहा है।

Photosynthesis is only long term solution of the Air Pollution : Peepal Baba

बढ़ते तापमान का दूसरा कारण यह है कि पिछले कुछ वर्षों में बारिश का पैटर्न बदल गया है। अगर हम दिल्ली एनसीआर का उदाहरण लेते हैं, तो दिल्ली एनसीआर ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी बारिश खो दी है। 2014 के बाद का अनुभव देखा जाय तो दिल्ली एनसीआर में एक साल में केवल 7-8 बार बारिश होती है जो प्रतिवर्ष लगभग 100 बार हुआ करती थी। प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया जो बारिश में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और पेड़ों के घटने की वजह से  यह प्रक्रिया बुरी तरह प्रभावित हो रही  है।

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पेड़ों के अलावा पानी पर्यावरण से कार्बन के अवशोषण में भी मदद करता है। दिल्ली में हजारों झीलें थीं लेकिन अब केवल 2 सौ  झीलें ही बची हैं जो पर्यावरण में मौजूद कार्बन को अवशोषित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। हमें उनके आस-पास पेड़ लगाकर उन मृत झीलों  को फिर से जिंदा  करने की आवश्यकता है और 2-3 वर्षों में हम सकारात्मक परिणाम देख सकते हैं।

अगर हम वास्तव में बारिश  को ठीक करना चाहते हैं और फिर हमें बड़े पैमाने पर पेड़ों की संख्या   को बढ़ाना होगा। यदि अब हमें इस मुद्दे की गंभीरता को जल्द से जल्द नहीं समझते हैं , तो इसे ठीक करना काफी कठिन हो जाएगा । यदि हम वर्ष 2026-2027  के पहले कुछ नहीं करते है तो हम फिर कुछ भी नहीं कर पाएगे।

एक व्यवसायी ने सवाल पूछते हुए कहा कि अगर कोई व्यक्ति अपने स्तर पर  जंगल बनाना चाहता है तो इस प्रक्रिया को कैसे आगे बढ़ाया जा सकता है  सकता है ?

इस सवाल का जबाब देते हुए  पीपल बाबा नें बताया कि सबसे पहले, आपको एक बंजर भूमि मिलनी चाहिए क्योंकि बंजर भूमि अन्य या उपयोग की गई भूमि की तुलना में सस्ती है। इसकी लेवेल्लिंग, और फंसिंग तथा कम्पोस्स्टिंग और तालाब निर्माण की प्रक्रिया की शुरुआत साथ-साथ करें |  दूसरी तरफ अगर आपके पास उपजाऊं जमीन है और आप जानते हैं कि इसका सही इस्तेमाल कैसे किया जाए तो आप इससे अच्छा लाभ कमा सकते हैं जैविक खेती करके लाभ कमा  सकते हैं।

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आगे पीपल बाबा ने पर्यवरण प्रदूषण के समाधान के लिए हरियाली क्रांति की महत्ता बताते हुए कहा कि भविष्य में 2 तरह के लोग बचेंगे पहला जिनके पास जमीन है और दूसरा जो पानी (झीलों और नदियों) के पास रहते हैं | 

अंतिम उद्देश्य किसी भी तरह से पर्यावरण में पत्ती की संख्या को बढ़ाना है चाहे आप जंगल में पीपल के पेड़ लगाते हैं या आप अपने घर में मनी प्लांट लगाते हैं, यह पर्यावरण में योगदान देगा पीपल बाबा ने सभा की समाप्ति पर लोगों से आह्वान करते हुए कहा कि आप भी हरियाली क्रांति का हिस्सा बनें अपने जन्मदिवस या संगठन के स्थापना दिवस पर पेड़ लगाने की प्रक्रिया की शुरुआत करें, “ अगर देश के हर नागरिक जन्मदिवस को हरियाली दिवस बनाने का कार्य करते हैं तो वह दिन दूर नहीं जब पुरे देश में हरियाली और खुशहाली होगी।

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