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‘चीन पाकिस्तान का ऐसा साथी है जो LOC पर भारत की जवाबी कार्रवाई को रोक सकता है’

China Pakistan Relationship Michael Rubin
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Ground Report | News Desk

सम्पूर्ण विश्व वर्तमान समय में कोरोना वायरस से एक जंग लड़ रहा है । वहीं, अमेरिका में कोरोना ने बहुत तेज़ी से तबाही मचाई हुई है । अमेरिका लगातार ये आरोप लगा रहा है कि कोरोनावायरस को चीन के शहर वुहान की लैब में तैयार किया गया । दूसरी तरफ़ अमेरिकी रक्षा विभाग के एक पूर्व अधिकारी ने चेतावनी देते हुए कहा है कि – पाकिस्तान चीन का पार्टनर नहीं बल्कि कॉलोनी (उपनिवेश देश) बनता जा रहा है। पाकिस्तान ने भारत के साथ अमेरिका के बढ़ते संबंधों के बाद पड़ोसी देश चीन के साथ हाथ मिलाया हुआ है। चीन एक लोकतांत्रिक देश है, जिसमें दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी आबादी है। चीन बहुत तेज़ी से अपनी सैन्य शक्ति को बढ़ाने पर भी लगातार काम कर रहा है ।

पाकिस्तान का मानना है कि चीन उनका ऐसा साथी है जो लाइन ऑफ कंट्रोल से भारत की जवाबी कार्रवाई को थाम सकता है। साथ ही चीन कभी पाकिस्तानी भ्रष्टाचार, अल्पसंख्यकों की खराब हालत और मानवाधिकारों का खस्ताहाल होने पर पाकिस्तान की आलोचना भी नहीं करता।

डॉ. माइकल रुबिन

हिंदूस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार पेंटागन (अमेरिकी रक्षा विभाग) के एक पूर्व अधिकारी डॉ. माइकल रुबिन ने कहा है कि पाकिस्तान ने चीन से हाथ मिलाना तब शुरू किया जब अमेरिका और भारत में दोस्ती बढ़ रही थी। पाकिस्तान का मानना है कि चीन उनका ऐसा साथी है जो लाइन ऑफ कंट्रोल से भारत की जवाबी कार्रवाई को थाम सकता है। साथ ही चीन कभी पाकिस्तानी भ्रष्टाचार, अल्पसंख्यकों की खराब हालत और मानवाधिकारों का खस्ताहाल होने पर पाकिस्तान की आलोचना भी नहीं करता। इसके साथ ही चीन के लिए पाकिस्तान एक बड़ा मार्केट है जो पश्चिम एशिया के देशों और ग्वादर में रणनीतिक बंदरगाह तक पहुंच दे सकता है।

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नेशनल इंटरेस्ट की ओर से प्रकाशित आर्टिकल में रुबिन ने कहा

‘‘पाकिस्तानी जल्द ही यह महसूस करेंगे कि उनके देश ने कितना खतरनाक सौदा किया है। पाकिस्तान ने एक ऐसे देश से समझौता किया है, जिसने धर्म के आधार पर दस लाख उइगर मुसलमानों को कैंपों में कैद कर रखा है। पाकिस्तानियों के मरने और उनके अपमानित होने पर चीन को कोई फर्क नहीं पड़ता है ।’’

रुबिन ने कहा- जब से कोरोनावायरस फैला है गिलगिट-बाल्टिस्तान, पीओके, पंजाब, सिंध और बलूचिस्तान में सीपेक (चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर) के आसपास रहने वाले लोग डरे हुए हैं। लोगों का मानना है कि इस क्षेत्र में चीनियों की मौजूदगी से महामारी आग की तरह फैलेगी। रुबिन के मुताबिक चीन के दबाव की वजह से ही पाकिस्तान ने अपने यहां पूरी तरह से लॉकडाउन नहीं किया।

उन्होंने कहा कि जब कोरोना महामारी फैली तब बहुत से चीनी कर्मचारी नया साल मनाने के लिए चीन में थे, लेकिन अब वे लौटने को तैयार हैं। ऐसे में लोगों के सामने बड़ा खतरा है। सीपेक में 10 से 15 हजार चीनी कर्मचारी काम करते हैं। चीन ने सीपेक में कर्मचारियों की टेस्टिंग और क्वारैंटाइन करने की कोई तैयारी नहीं की है।

“रुबिन ने कहा, “गिलगित-बाल्टिस्तान में पाकिस्तान औऱ चीन की साझेदारी के चलते यहां के स्थानीय लोग पीड़ित हैं। यह जगह पाकिस्तान के कठिन क्षेत्रों में से एक है। यहां केवल एक ही कोरोना परीक्षण केंद्र है और प्रतिदिन केवल पंद्रह लोगों का परीक्षण हो सकता है। जबकि इस क्षेत्र में कोवल 9 ही वेंटिलेटर हैं, स्थानीय डॉक्टरों का कहना है कि उन्हें कम से कम दो सौ चाहिए। पाकिस्तानी अधिकारियों ने लंबे समय से इस क्षेत्र की उपेक्षा की है, यहां तक कि स्व-शासन के अपने अधिकार को छीनने के लिए भी काम कर रहे हैं। ”

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इस्लामाबाद में पाकिस्तानी प्राधिकारी यह कभी नहीं मानते चीन ही है जिसने कोरोना जैसी महामारी को सबसे पहले इस जगह फैलाया । चीन ने पाकिस्तान का साथ दिया क्योंकि इस्लामाबाद नए सहयोगियों की तलाश में था। पाकिस्तानियों को जल्द ही समझ आ जाएगा कि चीन एक भागीदार नहीं, बल्कि कॉलोनी (उपनिवेश देश) की तलाश करता है, जिनके नागरिकों की मौत को वह पूरी तरह अप्रासंगिक मानते हैं।

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