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Peepal Baba: पीपल बाबा के ‘हरित क्रांति’ फार्मूले की 6 खास बातें

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देश में 2 करोड़ से ज्यादे पेड़ लगा चुके मशहूर पर्यावरणकर्मी पीपल बाबा ने देश में पर्यावरण सुधार के लिए “हरियाली क्रांति” नामक एक दिलचस्प फार्मूला दिया है। इस फोर्मुले की खूब चर्चा हो रही है। विगत दशकों में मानव संपदा के विकास के साथ-साथ पर्यावरण में काफी हानि हुई है, बड़े-बड़े पर्यावरणकर्मी और वैज्ञानिक यह बात बता रहे हैं कि इसी नुकसान का नतीजा ये है कि आज पूरी पृथ्वी का संतुलन बिगड़ गया है। इस बिगड़ते संतुलन की वजह से ही मनुष्य बड़ी बड़ी आपदाओं का शिकार हो रहा है।

कोरोना महामारी नें आज अपनें पैर पूरी पूरी दुनियां में पसार लिए हैं छुआछूत की वजह से फैलनें वाली इस बीमारी की वजह से बड़ी जनसंख्या घनत्व वाले शहर आज तबाही के कगार पर हैं। आये दिन भूकंप का आना हो, टिड्डी दलों के हमले, अमेजन से लेकर उत्तराखंड के वनों का दहकना, पूरी पृथ्वी के या फिर जंगली जानवरों का आबादी में हमला इन सभी परिस्थितियों में मानव समाज के सामने अस्तित्व के संकट के रूप में उजागर हो रही है। इसका मुख्य कारण पृथ्वी पर मनुष्यों, जानवरों और वनस्पतियों का बिगड़ता संतुलन है।

अपनें देश के संदर्भ में इन बातों को देखा जाय तो स्थिति और भी खराब नजर आती है अपने देश का क्षेत्रफल 32 लाख 87 हजार 263 वर्ग किलोमीटर है। क्षेत्रफल के लिहाज से अपना देश विश्व के कुल क्षेत्रफल का 2.4 प्रतिशत भौगोलिक हिस्सा रखता है। लेकिन विश्व की कुल जनसंख्या का 17.5% हिस्सा भारत का है इस वजह से अपने देश के प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव निरंतर बढ़ता जा रहा है। हमारी जनसंख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है लेकिन प्राकृतिक संसाधन सिमट रहे हैं इस वजह से हमारे देश में प्राकृतिक संशाधनों पर प्रति व्यक्ति हिस्सेदारी कम होती जा रही है।

इस परिस्थिति में बहुत से राजनेता और बिचारक जहाँ जनसंख्या रोकनें की मांग कर रहे हैं वहीँ देश के 18 राज्यों के 202 जिलों में 14 हजार 5 सौ स्वयंसेवकों की मदद से 2 करोड़ से ज्यादे पेड़ लगा चुके पीपला बाबा , जिन्होंने 43 सालों से घटते पेड़ों को बढ़ाने के लिए जबरदस्त मुहीम छेड़ रखी है- देश में हरियाली क्रांति लानें का सुझाव देते हैं । उन्होंने अपने इस 15 दिवसीय (1 जून से 15 जून तक ) पर्यावरण पखवाड़े में देश में 40 % पेड़ों का हिस्सा प्राप्त करनें के लिए 4 बड़ी बातें लागू करनें की अपील की है, पीपल बाबा का कहना है कि देश में श्वेत क्रांति, हरित क्रांति के तर्ज पर हरियाली क्रांति चलाई जानी चाहिए लेकिन हरियाली क्रांति में लोक भागीदारी हो इसे लोगों के संस्कार से जोड़ा जाये इसके लिए पीपल बाबा नें कई सुझाव प्रस्तुत किये हैं –

मौलिक कर्तव्यों में हर नागरिक को पेड़ लगाने की बात को जोड़ा जाना
स्वच्छ पर्यावरण का मौलिक अधिकार हमें संविधान देता है और समय समय पर संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण भी इसकी वकालत करता रहा है। हमें पर्यावरण के मामले में अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों पर ज्यादे जोर देनें की जरूरत है। जैसे सरदार स्वर्ण सिंह समिति की अनुशंसा पर संविधान के 42वें संशोधन (1976 ई)० के द्वारा मौलिक कर्तव्य (इसे रूस के संविधान से लिया गया है) को संविधान में जोड़ा गया अब पीपल बाबा नें भारत सरकार से यह मांग की है कि मौलिक कर्तव्य नंबर 7 – नागरिक प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और उसका संवर्धन करे में पर्यावरण संवर्धन हेतु हर साल एक पेड़ लगाकर उनके देखभाल करनें की बात को अनिवार्य किया जाय।

सिटीजन एनवायरनमेंट रेस्पोंसिबिलिटी – CER को नागरिक के लिए अनिवार्य कर्तव्य घोषित किये जायं
जैसे सी एस आर एक्ट -2013 के मुताबिक देश के बड़े औधोगिक घरानों को उनके कमाई के 2 % भाग को सामजिक कार्यों में खर्च करने के लिए अनिवार्य बना दिया गया था और देश के औधोगिक घरानों और समूहों नें सहर्ष स्वीकार किया था। वैसे ही देश के नागरिके लिए सिटीजन एनवायरनमेंट रेस्पोंसिबिलिटी तय की जाय कम से कम उन्हें साल भर में एक पेड़ लगाकर उनकी देखभाल की जिम्मेदारी जरूर दी जाय।

बंजर जमीनों में पेड़ लगाकर हरा भरा करना
बहुत से लोगों का कहना होता है कि हम पेड़ तो लगाना चाहते हैं लेकिन हमारे पास जमीन ही नहीं है ऐसे में देश की सरकारों को बंजर जमीनों को हरियाली केंद्र के रूप में विकसित करनें के लिए खोला जाय।

पर्यावरण पखवाड़े की संकल्पना को मजबूती देना
जैसे देश में हिंदी भाषा के विकास के लिए पर्यावरण पखवाडा मनाया जाता है जिसमें सेमिनार, वेबिनर, निबन्ध प्रतियोगिता आदि का आयोजन किया जाता है वैसे ही पर्यावरण सप्ताह और पर्यावरण दिवस पर पर भी सेमिनार, वेबिनर, निबन्ध प्रतियोगिता ही कराई जाती है। सरकार को इसमें महत्वपूर्ण निर्णय लेने चाहिए जिसके अंतर्गत सरकार लॉक डाउन (Lock Down) की तरह सभी को छुट्टी देकर पर्यावरण पखवाड़े में पेड़ लगवानें पेड़ लगाने की जिम्मेदारी दी जानी चाहिए हर साल 1 जून से 15 जून तक पर्यावरण पखवाड़े में देश के सभी नागरिक केवल और केवल पेड़ लगायें। पूरा पर्यावरण पखवाडा हरियाली क्रांति के लिए समर्पित किया जाय।

स्वच्छ भारत अभियान में स्वच्छ पर्यावरण की हिस्सेदारी हो
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा चलाये गए स्वच्छ भारत अभियान से देश के हर हिस्से के लोग जुड़े थे। साफ सफाई करते हुए तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई थी पर इन तस्वीरों में पेड़ लगाते हुए तस्वीरें भी दिखें – इसके लिए स्वच्छ भारत अभियान में स्वच्छ पर्यावरण का हिस्सा सुनिश्चित किया जाय।

राजनीतिक दल अब अपने घोषणापत्र में पर्यावरण सम्वर्धन को जगह दिया जाय
पीपल बाबा का कहना है कि राजनीतिक दल अपने चुनावी घोषणापत्र में हमेशा से रोटी, कपड़ा, मकान और रोजगार को मुद्दा बनाते रहे हैं इस वजह से पर्यावरण हासिये पर रहा है। पर्यावरण सम्वर्धन के लिए पेड़ लगवानें की भी घोषणा की जानी चाहिए इसके संदर्भ में पीपल बाबा आगे यह कहते हैं कि हरियाली क्रांति को जनता और नेता सब अपना मुद्दा और मकसद बनायें।

बहरहाल देश में ढेर सारी क्रांतियाँ हुई हैं हर क्रांतियों के लक्ष्य भी निर्धारित किये गये हैं। लेकिन सभी क्रांतियाँ सरकारी महकमें के भरोसे ही संचालित होती रही हैं। लेकिन पीपल बाबा के द्वारा दिए गए सुझावों और पर्यावरण पखवाड़े इन सुझावों के साथ कोरोना काल में भी जुड़कर कार्य करनें वाले लोगों की दिलचस्पी नें एक सकारात्मक संकेत दे दिया है अगर आने वाले समय में इन सुझावों के साथ इसे देश के हर हिस्से में ले जाया जाय तो सच में हरियाली क्रांति के माध्यम से जन भागीदारी को सुनिश्चित करते हुए हरित भारत के सपने को साकार किया जा सकता है।